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‘विश्व बैंक ने हाट गांव के साथ किया अन्याय’
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पीपलकोटी में विश्व बैंक की टीम के साथ बैठक करते हाट गांव के ग्रामीण।
- फोटो : GOPESHWAR
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विश्व बैंक की टीम ने बुधवार को परियोजना प्रभावित छोटी काशी हाट गांव के ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान प्रभावितों ने विश्व बैंक पर परियोजना के लिए गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया। कहा कि टीएचडीसी के साथ विश्व बैंक भी इसके लिए बराबर का दोषी है। ग्रामीणों ने हाट गांव में ही दोबारा बसाने, हाट गांव, लक्ष्मी नारायण व अन्य मंदिरों के संरक्षण की मांग उठाई।
अलकनंदा पर चार हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी (444 मेगावाट) की जल विद्युत परियोजना विश्व बैंक की मदद से बन रही है। केंद्र सरकार परियोजना निर्माण की स्वयं मॉनीटरिंग कर रही है। परियोजना के पावर हाउस साइट छोटी काशी स्थित हैं। गांव के पुनर्वास को लेकर ग्रामीण लगातार परियोजना प्रबंधन व जिला प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि हाट गांव की भूमि का अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ है। अधिग्रहण की प्रक्रिया में गांव के सभी लोगों को शामिल नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल की शिकायत पर बुधवार को विश्व बैंक की टीम पीपलकोटी पहुंची। यहां गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के एक कक्ष में आयोजित बैठक में विश्व बैंक के ऊर्जा विशेषज्ञ डी जेनन ने गांव की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने और ग्रामीणों को नियमानुसार मुआवजा वितरण के साथ ही परियोजना को लेकर अपनी बात रखी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विस्थापन के लिए मजबूर किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विश्व बैंक ने ग्रामीणों की मूल भावनाओं व सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के साथ घोर अन्याय किया है। ग्रामीणों ने उन्हें हाट गांव में ही दोबारा बसाने और हाट गांव, गांव के लक्ष्मी नारायण व अन्य मंदिरों के संरक्षण की मांग उठाई।
इस मौके पर ज्येष्ठ प्रमुख पंकज हटवाल, वन सरपंच सोहन कुमार, युवक मंगल दल अध्यक्ष अमित गैरोला, उप प्रधान पिंकी, वार्ड सदस्य हेमा देवी, पंकज कुमार, शशि, नरेंद्र प्रसाद, नरेंद्र पोखरियाल आदि मौजूद थे। इधर, परियोजना की निर्मात्री कंपनी टीएचडीसी के महाप्रबंधक से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
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अलकनंदा पर चार हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी (444 मेगावाट) की जल विद्युत परियोजना विश्व बैंक की मदद से बन रही है। केंद्र सरकार परियोजना निर्माण की स्वयं मॉनीटरिंग कर रही है। परियोजना के पावर हाउस साइट छोटी काशी स्थित हैं। गांव के पुनर्वास को लेकर ग्रामीण लगातार परियोजना प्रबंधन व जिला प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि हाट गांव की भूमि का अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ है। अधिग्रहण की प्रक्रिया में गांव के सभी लोगों को शामिल नहीं किया गया है। ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल की शिकायत पर बुधवार को विश्व बैंक की टीम पीपलकोटी पहुंची। यहां गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के एक कक्ष में आयोजित बैठक में विश्व बैंक के ऊर्जा विशेषज्ञ डी जेनन ने गांव की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को संरक्षित करने और ग्रामीणों को नियमानुसार मुआवजा वितरण के साथ ही परियोजना को लेकर अपनी बात रखी, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया। ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विस्थापन के लिए मजबूर किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विश्व बैंक ने ग्रामीणों की मूल भावनाओं व सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के साथ घोर अन्याय किया है। ग्रामीणों ने उन्हें हाट गांव में ही दोबारा बसाने और हाट गांव, गांव के लक्ष्मी नारायण व अन्य मंदिरों के संरक्षण की मांग उठाई।
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इस मौके पर ज्येष्ठ प्रमुख पंकज हटवाल, वन सरपंच सोहन कुमार, युवक मंगल दल अध्यक्ष अमित गैरोला, उप प्रधान पिंकी, वार्ड सदस्य हेमा देवी, पंकज कुमार, शशि, नरेंद्र प्रसाद, नरेंद्र पोखरियाल आदि मौजूद थे। इधर, परियोजना की निर्मात्री कंपनी टीएचडीसी के महाप्रबंधक से दूरभाष पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई।
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