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पहाड़ी गीतों में पाश्चात्य संगीत की मची धूम
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राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले की चौथी सांस्कृतिक संध्या में गायिका प्रियंका महर ने गढ़वाली, कुमाऊंनी, हिंदी और पंजाबी गीतों की धूम मचा दी। मेहर ने पहाड़ी गीतों में पाश्चात्य संगीत का ऐसा जादू छेड़ा की पंडाल में बैठे दर्शक नाचते हुए मंच तक पहुंच गए।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी ने किया। मेला मंच पर ‘देश मेरा रंगीला’ कार्यक्रम के तहत कलाकारों ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों की संस्कृति पर आधारित नृत्य पेश कर अनेकता में एकता का संदेश दिया। लोक गायकों एवं कलाकारों ने गिद, महाराष्ट्र की लावणी, राजस्थान का घूमर, बिहार की जट-जाटनि, हरियाणा के झूमर, जम्मू-कश्मीर के कूद डांडी नाच, तमिलनाडु के भारत नाट्य, उत्तराखंड का गढ़वाली व कुमाऊंनी लोकनृत्य व लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति पर दर्शक खूब झूमे। गायिका (मैशअप) प्रियंका महर ने रणसिंह बाजो तुतरी बाजी, बाजी रे मुरूली हुडकी घमाघम... गीत के साथ प्रस्तुति की शुरुआत की। महर ने दमादम मस्त कलंदर..., चला फुल्यारी फूल ले ओला..., हाय तेरी रूमाला..., हिट-हिट मेरी सौंजड्या चल कखी दूर..., हे जी सारयूं मां फूल खिली गेना..., चैत की चैत्वाल..., ता छुमता छुमा छुमा रे डिंग तालो..., गढ़वाल में बाग लागो..., बाबडी हो गई..., तू कैन्दी बिगरेल दी पूरा लंदन ठुमक दा... सहित कई हिंदी, गढ़वाली व पंजाबी लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। महर व उनके साथी कलाकारों के साथ लोग मंच पर चढ़कर नाचने लगे। मंच का संचालन राकेश कुमार पल्लव, योगेश धस्माना तथा सानिया अजीज ने किया। मंच संचालक सानिया अजीज की ओर से मंच पर वॉक राउंड प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। मेला समिति की ओर से कलाकारों को प्रतीक चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर कर्णप्रयाग के एसडीएम देवानंद, चमोली की एसडीएम बुसरा अंसारी, थानाध्यक्ष गिरीश चंद्र शर्मा, चौकी इंचार्ज नवीन नेगी, तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, मानवेंद्र बर्तवाल, रविंद्र नेगी, संजय रावत, बृजेश बिष्ट, महाराज लिंगवाल, इंदु पंवार, विजय डिमरी, अनिल नेगी और गजेंद्र नयाल आदि मौजूद रहे।
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सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि रुद्रप्रयाग विधायक भरत चौधरी ने किया। मेला मंच पर ‘देश मेरा रंगीला’ कार्यक्रम के तहत कलाकारों ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि राज्यों की संस्कृति पर आधारित नृत्य पेश कर अनेकता में एकता का संदेश दिया। लोक गायकों एवं कलाकारों ने गिद, महाराष्ट्र की लावणी, राजस्थान का घूमर, बिहार की जट-जाटनि, हरियाणा के झूमर, जम्मू-कश्मीर के कूद डांडी नाच, तमिलनाडु के भारत नाट्य, उत्तराखंड का गढ़वाली व कुमाऊंनी लोकनृत्य व लोकगीतों की शानदार प्रस्तुति पर दर्शक खूब झूमे। गायिका (मैशअप) प्रियंका महर ने रणसिंह बाजो तुतरी बाजी, बाजी रे मुरूली हुडकी घमाघम... गीत के साथ प्रस्तुति की शुरुआत की। महर ने दमादम मस्त कलंदर..., चला फुल्यारी फूल ले ओला..., हाय तेरी रूमाला..., हिट-हिट मेरी सौंजड्या चल कखी दूर..., हे जी सारयूं मां फूल खिली गेना..., चैत की चैत्वाल..., ता छुमता छुमा छुमा रे डिंग तालो..., गढ़वाल में बाग लागो..., बाबडी हो गई..., तू कैन्दी बिगरेल दी पूरा लंदन ठुमक दा... सहित कई हिंदी, गढ़वाली व पंजाबी लोकगीत और लोकनृत्य की प्रस्तुति दी। महर व उनके साथी कलाकारों के साथ लोग मंच पर चढ़कर नाचने लगे। मंच का संचालन राकेश कुमार पल्लव, योगेश धस्माना तथा सानिया अजीज ने किया। मंच संचालक सानिया अजीज की ओर से मंच पर वॉक राउंड प्रतियोगिता का आयोजन किया। प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए। मेला समिति की ओर से कलाकारों को प्रतीक चिह्न व शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर कर्णप्रयाग के एसडीएम देवानंद, चमोली की एसडीएम बुसरा अंसारी, थानाध्यक्ष गिरीश चंद्र शर्मा, चौकी इंचार्ज नवीन नेगी, तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, मानवेंद्र बर्तवाल, रविंद्र नेगी, संजय रावत, बृजेश बिष्ट, महाराज लिंगवाल, इंदु पंवार, विजय डिमरी, अनिल नेगी और गजेंद्र नयाल आदि मौजूद रहे।
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