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हेमकुंड साहिब की यात्रा खुली, सीमित यात्री ही पहुंचे
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हेमकुंड साहिब के कपाट शुक्रवार को खोल दिए गए। इस साल कोरोना सेे बनी परिस्थितियों के कारण हेमकुंड साहिब के कपाट तीन महीने देरी से खुले। कपाट खुलने के दौरान श्रद्धालुओं में जोश और उत्साह तो भरपूर था, लेकिन सामान्य दिनों में यहां जैसी रौनक रहती थी वह इस साल नहीं दिखी।
कोरोना का असर और उससे उपजी परिस्थितियों के चलते नियमों में सख्ती की गई। हेमकुंड साहिब में जहां सामान्य दिनों में कपाट खुलने के दौरान आठ से दस हजार श्रद्धालु मौजूद रहते थे इस साल मात्र 127 श्रद्धालु ही वहां पहुंचे। प्रशासन के नियमों के तहत एक दिन में 200 यात्री ही हेमकुंड साहिब जा सकते हैं। उनको भी 72 घंटे पहले की कोरोना का पीसीआर टेस्ट कराना अनिवार्य है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रास्ते में दर्जनों दुकानें हैं। घांघरिया में ही 30 से अधिक होटल व दुकानें हैं, जो इस बार सब बंद हैं। रास्ते में एक-दो दुकानें ही खुली हैं। घांघरिया में मात्र तीन होटल ही खुले हैं।
बुजुर्गों को न आने सलाह
जोशीमठ। प्रशासन पहले ही गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को सलाह दे चुका है कि इस साल घोड़े खच्चरों की व्यवस्था नहीं होने के कारण बुजुर्ग यात्रियों को यात्रा पर न आने दिया जाए। ताकि किसी तरह की समस्या न हो।
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कोरोना का असर और उससे उपजी परिस्थितियों के चलते नियमों में सख्ती की गई। हेमकुंड साहिब में जहां सामान्य दिनों में कपाट खुलने के दौरान आठ से दस हजार श्रद्धालु मौजूद रहते थे इस साल मात्र 127 श्रद्धालु ही वहां पहुंचे। प्रशासन के नियमों के तहत एक दिन में 200 यात्री ही हेमकुंड साहिब जा सकते हैं। उनको भी 72 घंटे पहले की कोरोना का पीसीआर टेस्ट कराना अनिवार्य है। गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब तक रास्ते में दर्जनों दुकानें हैं। घांघरिया में ही 30 से अधिक होटल व दुकानें हैं, जो इस बार सब बंद हैं। रास्ते में एक-दो दुकानें ही खुली हैं। घांघरिया में मात्र तीन होटल ही खुले हैं।
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बुजुर्गों को न आने सलाह
जोशीमठ। प्रशासन पहले ही गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी को सलाह दे चुका है कि इस साल घोड़े खच्चरों की व्यवस्था नहीं होने के कारण बुजुर्ग यात्रियों को यात्रा पर न आने दिया जाए। ताकि किसी तरह की समस्या न हो।
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