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सड़क से अछूते गांवों में बर्फबारी ने बढ़ाई दिक्कत

Mon, 16 Jan 2017 10:20 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोपेश्वर
ब्यूरो/ अमर उजाला, गोपेश्वर Updated Mon, 16 Jan 2017 10:20 PM IST
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The problem raised in the villages untouched snow from the road.
Snowfall

जिले के कई गांव आज भी सड़क से मीलों दूर हैं। पल्ला किमाणा, कौंज-पोथनी, लांजी, पोखनी, दुर्मी, पगना, थेंग, पगनों, पाणा, ईराणी, झींझी गांव आज भी सड़क सुविधा से वंचित वंचित हैं। पल्ला किमाणा गांव तक जाने के लिए ग्रामीणों को आज भी करीब सात किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ रही है। ग्रामीण पैदल पगडंडी पर खड़ी चढ़ाई चढ़कर अपने गंतव्य को जाते हैं।

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निजमुला घाटी के पाणा और ईराणी गांव के ग्रामीण अपने गांवों तक जाने के लिए पगना गांव से करीब दस किमी की पैदल दूरी तय करते हैं। इन गांवों के लिए पिछले दो वर्षों से सड़क तो निर्मित हो रही है, लेकिन पीएमजीएसवाई के अधिकारियों की लेटलतीफी के कारण सड़क निर्माण कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। इन दिनों बारिश और बर्फबारी से ऊंचाई वाले गांवों में ठिठुरन से हाल बेहाल है। ऐसे में नेतागणों को मतदाताओं तक पहुंचना या फिर पैदल सफर करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
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खुमानी और गेहूं की फसल के लिए भी लाभकारी है बर्फबारी
जोशीमठ।
जोशीमठ क्षेत्र में बारिश और बर्फबारी से सेब काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं। काश्तकारों का कहना है कि समय पर हो रही बर्फबारी सेब की फसल के लिए खाद का काम करेगी।
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बर्फबारी खुमानी और गेहूं की फसल के लिए भी लाभकारी होगी। सेब काश्तकार लक्ष्मण सिंह, बादर सिंह और आत्माराम घिल्डियाल का कहना है कि  दिसंबर माह में बर्फबारी नहीं होने से फसल के नुकसान का डर सता रहा था, लेकिन अब बर्फबारी होने से अच्छी फसल मिल सकेगी। रविवार रात से ही जोशीमठ के सुनील और औली क्षेत्र में बर्फबारी हो रही है।

बीते वर्ष भी जनवरी माह के दूसरे सप्ताह में जमकर बर्फबारी हुई थी, जिससे सेब की पैदावार बढ़ी थी। निचले क्षेत्रों में बारिश गेहूं की फसल के लिए लाभकारी होगी।

नंदप्रयाग के काश्तकार मदन सिंह और सुनील का कहना है कि यह बारिश गेहूं और सरसों की फसल के लिए वरदान साबित होगी। आगामी कुछ दिनों तक बारिश होती है तो फसल भी अच्छी होगी।

इधर, जिला उद्यान अधिकारी एसएल शाह का कहना है कि माघ (जनवरी) माह में हो रही बारिश फसल की ग्रोथ के लिए अच्छी होती है। सेब की फसल के शीत तापमान के लिए नब्बे दिन या कम से कम 16 सौ घंटे बर्फबारी और बारिश जरूरी है। इस वक्त हो रही बर्फबारी फसल के लिए खाद का काम करती है। गेहूं और खुमानी की फसल पर भी


बर्फबारी से कीड़े नहीं लगते हैं।
रुद्रप्रयाग।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों के गांवों में हुई बर्फबारी रवि फसलों के लिए वरदान साबित हो रही है। हल्की मात्रा में गिर रही बर्फ से जहां गेहूं और जौ के पौधों को पर्याप्त पानी मिल रहा है, वहीं, जमीन की नमी में भी वृद्धि हो रही है।

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