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खास खबर-- फोटो- यहां सीमा पर चौकसी के साथ ही सड़कों से भी जूझ रहे हैं भारतीय जवान

Wed, 24 Aug 2022 09:48 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Wed, 24 Aug 2022 09:48 PM IST
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Soldiers batteling with ememy on border,  in country with bad roads
चमोली जिले में ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य के तहत चारधाम यात्रा मार्ग को तो चकाचक बना दिया गया लेकिन जोशीमठ-मलारी हाईवे की स्थिति बदहाल है। करीब सौ किलोमीटर लंबे इसी हाईवे से होकर सेना और आईटीबीपी के जवान सीमा पर स्थित अग्रिम चौकियों तक पहुंचते हैं। हाईवे का अधिकांश हिस्सा भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में है। कई जगहों पर भूस्खलन होने पर जवान खुद ही बोल्डर और मलबा हटाकर आगे बढ़ते हैं।
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चमोली जिले में नीती और माणा घाटी से जाने वाली सड़कें चीन सीमा को जोड़ती हैं। माणा घाटी में बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की ओर से हाईवे को सुगम बना लिया गया है लेकिन जोशीमठ-मलारी हाईवे अभी भी बदहाल स्थिति में है। जोशीमठ से ही हाईवे बदहाल है। रविग्राम से करीब एक किलोमीटर की दूरी तक हाईवे पर भू-धंसाव हो रहा है। तीन वर्ष पूर्व बीआरओ ने हाईवे के चौड़ीकरण का काम शुरू किया लेकिन जगह-जगह भूस्खलन होने के कारण चट्टानों पर अब भी बड़े-बड़े बोल्डर अटके हुए हैं।
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तपोवन से रैणी गांव के बीच कई जगहों पर हाईवे क्षतिग्रस्त है। रैणी गांव के निचले हिस्से में बीआरओ ने दीवार का निर्माण किया है लेकिन इसके समीप ही नदी की तरफ हाईवे धंस रहा है। जबकि चट्टान पर भी बोल्डर अटके हैं। यहां पहाड़ और नदी की तरफ दीवारों का निर्माण हो रहा है। यहां बारिश से हाईवे पर भारी कीचड़ जमा हो गया है। जुम्मा, तमक, जेलम और सुरांईथोटा में भी हाईवे खस्ताहाल है। 7 फरवरी 2021 को आई रैणी आपदा से भी हाईवे को काफी नुकसान हुआ था।
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मलारी में भोटिया जनजाति के ग्रामीण निवास करते हैं। ग्राम प्रधान पुष्कर सिंह राणा और अग्गी राणा का कहना है कि जोशीमठ-मलारी हाईवे के सुधारीकरण पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रैणी गांव के समीप निर्माणाधीन 104 मीटर लंबा मोटर पुल का निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ है। तंग सड़क पर कई बार सेना के वाहन फंस जाते हैं। संवाद
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जोशीमठ-मलारी हाईवे का चौड़ीकरण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। कुछ जगहों पर आपदा के चलते भूस्खलन से हाईवे क्षतिग्रस्त हुआ था, उस जगहों पर सुधारीकरण कार्य जारी है। रैणी गांव के पास मोटर पुल का निर्माण कार्य भी गतिमान है। हाईवे को सुचारु रखने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। कई जगहों पर अचानक बोल्डर हाईवे पर आ जाते हैं, तो उन्हें सेना व आईटीबीपी के जवान हटा लेते हैं।

- कर्नल मनीष कपिल, कमांडर, बीआरओ, जोशीमठ।
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नीती घाटी के 10000 ग्रामीणों की लाइफलाइन है मलारी हाईवे
गोपेश्वर। जोशीमठ-मलारी हाईवे सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। सेना व आईटीबीपी के अलावा इस हाईवे से नीती घाटी के 30 से अधिक गांव जुड़े हुए हैं। करीब दस हजार ग्रामीणों की आवाजाही का भी यह एकमात्र मार्ग है। सुकी गांव के ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह बुटोला का कहना है कि मलारी हाईवे हर एक किलोमीटर के बाद बदहाल स्थिति में है। फाक्ती के समीप हाईवे पर बोल्डर व मलबा पसरा हुआ है। तमक नाला में भी वाहनों की आवाजाही खतरनाक बनी है। संवाद
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