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आईटीबीपी करेगी स्नो मेकिंग मशीनों की देखभाल
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
Updated Mon, 20 Feb 2017 10:25 PM IST
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औली में जंक खा रही स्नो मशीन।
- फोटो : file photo
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पांच सालों से औली में जंक खा रही स्नो मेकिंग मशीनों की मेंटीनेंस अब आईटीबीपी करेगी। खेल विभाग और उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन ने आईटीबीपी औली को मशीनों के मेंटीनेंस का प्रस्ताव भेजा है। खेल विभाग आईटीबीपी के अधिकारियों के जवाब का इंतजार कर रहा है।
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यदि आईटीबीपी ने खेल विभाग के प्रस्ताव को स्वीकार किया तो वर्षों से जंक खा रही मशीनें कृत्रिम बर्फ बनाना शुरू कर देंगी। वर्ष 2011 में सैफ गेम्स के दौरान कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए राज्य के खेल मंत्रालय ने करोड़ों रुपये खर्च कर औली स्लोप के इर्द-गिर्द स्नो मेकिंग मशीन, 21 स्नो गन और चार स्नो मोबाइल स्थापित किए गए थे। तब ऐन मौके पर बर्फबारी होने से स्नो मशीनों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया।
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वर्ष 2014 में जीएमवीएन ने जब कृत्रिम बर्फ बनाने के लिए मशीनों को चालू करना चाहा तो मशीनें नहीं चल पाई। मौजूदा समय में भी मशीनें खराब हालत में पड़ी हैं। इस बार औली में बर्फबारी कम होने से 19 फरवरी से प्रस्तावित राष्ट्रीय जूनियर स्कीइंग प्रतियोगिता स्थगित करनी पड़ी।
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राज्य खेल सचिव शैलेश बगोली ने बताया कि औली में जंक खा रही कृत्रिम बर्फ बनाने वाली मशीनों की मेंटीनेंस के लिए आईटीबीपी सुनील को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृति के बाद आईटीबीपी के अधिकारी मशीनों का परीक्षण करने औली पहुंचेंगे।
सरकार की बेरुखी पड़ रही भारी
गोपेश्वर। उत्तराखंड विंटर गेम्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एसएस पांगती का कहना है कि औली में स्नो मेकिंग मशीनों से कृत्रिम बर्फ बनाकर स्कीइंग प्रतियोगिताएं कराई जा सकती हैं।
जापान में कई बार बर्फबारी कम होने पर मशीनों से कृत्रिम बर्फ बनाकर ही स्कीइंग प्रतियोगिता कराई जाती है लेकिन यहां सरकार की बेरुखी साहसिक खेल और खिलाड़ियों पर भारी पड़ रही है। औली में लगी स्नो मेकिंग मशीनें सही हालत में हैं, लेकिन पांच साल से देखरेख के अभाव में मशीनें जंक खा रही हैं।