{"_id":"65ba36feb7c4b5fe840ddae2","slug":"shortage-of-professors-in-nursing-college-gopeshwar-news-c-47-1-sdrn1001-104338-2024-01-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Chamoli News: नर्सिंग कॉलेज में प्रोफेसरों की कमी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Chamoli News: नर्सिंग कॉलेज में प्रोफेसरों की कमी
Wed, 31 Jan 2024 05:33 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 31 Jan 2024 05:33 PM IST
विज्ञापन
फोटो
गोपेश्वर। राजकीय नर्सिंग कॉलेज गोपेश्वर में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि यहां प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 12 पद सृजित हैं जिसमें से पांच पर तैनाती ही नहीं है जबकि आवश्यकता करीब 22 प्रोफेसर की है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन बाधित हो रहा है।
वर्ष 2018 में गोपेश्वर के हल्दापानी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना हुई थी। वर्तमान में यहां एएनएम व जेएनएम के 220 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं जिनमें से पांच छात्राएं जम्मू कश्मीर और एक छात्रा लद्दाख की है। कॉलेज में लंबे समय से प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के एक-एक पद रिक्त चल रहे हैं जबकि अन्य शिक्षकों के तीन पद रिक्त हैं। इधर, कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता कपरुवाण का कहना है कि प्रोफेसर की तैनाती के लिए निदेशालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित शिक्षकों से ही व्यवस्था बनाई जा रही है। संवाद
विज्ञापन
गोपेश्वर। राजकीय नर्सिंग कॉलेज गोपेश्वर में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर की कमी बनी हुई है। स्थिति यह है कि यहां प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 12 पद सृजित हैं जिसमें से पांच पर तैनाती ही नहीं है जबकि आवश्यकता करीब 22 प्रोफेसर की है। ऐसे में छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन बाधित हो रहा है।
वर्ष 2018 में गोपेश्वर के हल्दापानी में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना हुई थी। वर्तमान में यहां एएनएम व जेएनएम के 220 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं जिनमें से पांच छात्राएं जम्मू कश्मीर और एक छात्रा लद्दाख की है। कॉलेज में लंबे समय से प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर के एक-एक पद रिक्त चल रहे हैं जबकि अन्य शिक्षकों के तीन पद रिक्त हैं। इधर, कॉलेज की प्राचार्य डॉ. ममता कपरुवाण का कहना है कि प्रोफेसर की तैनाती के लिए निदेशालय से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सीमित शिक्षकों से ही व्यवस्था बनाई जा रही है। संवाद
विज्ञापन