वैटनरी कालेज के लिए निशुल्क नहीं देंगे भूमि
शैल गांव के ग्रामीणों ने बैठक कर वैटनरी कालेज के लिए निशुल्क जमीन देने के निर्णय को खारिज कर दिया है। ग्रामीणों ने कालेज के लिए जमीन देने के एवज में चार शर्तें रखी हैं।
बीते शनिवार को डिप्टी स्पीकर डा. अनुसूया प्रसाद मैखुरी और कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय भरसार के कुलसचिव डा. यशवंत बर्त्वाल ने शैल गांव के लोगों के साथ बैठक की थी जिसमें ग्रामीणों ने वैटनरी कालेज के लिए नि:शुल्क जमीन देने की बात कही थी। अब महज तीन दिनों में ग्रामीणों ने निर्णय बदलते हुए शर्तें लगा दी हैं।
सभासद उमेश शैली, नवीन शैली, लक्ष्मी प्रसाद थपलियाल, सुनील शैली और अन्य 10 भू-स्वामियों ने शैल गांव में बैठक कर वैटनरी कालेज के लिए काश्तकारों को जमीन का मुआवजा देने, प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक परिवार और काश्तकार को स्थायी नौकरी देने, अधिगृहीत जमीन पर पेड़ों तथा फसल का मुआवजा देने सहित विभाग की ओर से भवन कार्य, वाहन और कैंटीन आदि की सुविधाएं ग्रामीणों को देने की शर्तें रखीं।
मामले में नगर पंचायत अध्यक्ष मुकेश नेगी ने कहा कि ग्रामीणों के साथ एक बार फिर सहमति बनाने के प्रयास किए जाएंगे। दूसरी ओर भरसार कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. यशवंत बर्त्वाल ने कहा कि ग्रामीणों की शर्तों के अनुसार जमीन का मुआवजा, स्थायी नौकरी, पेड़ और फसल का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है। निर्माण सहित अन्य कार्यों के लिए निर्माण निगम में रजिस्ट्रेशन करने की सलाह ग्रामीणों को दी गई है।