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चमोली में भालू के आतंक से लोगों में दहशत
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चमोली जिले में भालू से लोगों में दहशत है। इस वर्ष दो लोगों के साथ ही 122 मवेशियों को भालू मार चुका है। जोशीमठ, घाट, नारायणबगड़, देवाल, थराली, गैरसैंण, कर्णप्रयाग क्षेत्र में भालू की दहशत है। पिछले कुछ सालों से भालू के आबादी क्षेत्र में घुसने और मानव व पशुओं पर हमले की घटनाएं बढ़ गई हैं। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क के डीएफओ ने कहा कि सर्दियों में भालू खाने की तलाश में आबादी क्षेत्रों में आता है। उन्होंने घर के बाहर खाने की वस्तुओं न रखने की अपील की।
एक वर्ष में चमोली जिले में भालू दो लोगों के साथ ही 122 मवेशियों को अपना मार चुका है। शुक्रवार को ही घाट ब्लाक के वादुक गांव में जंगल जा रही महिला पर भालू ने हमला कर मार दिया। जबकि गत अगस्त माह में कर्णप्रयाग क्षेत्र में भी भालू ने एक व्यक्ति को मार दिया था। अकेले अक्तूबर माह में भालू जिले में 66 मवेशियों पर हमला कर उन्हें घायल किया। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ एनबी शर्मा का कहना है कि भालू गर्मियों में चार महीने गुफाओं में और सर्दियों में खाने की तलाश में आबादी क्षेत्रों में पहुंच जाता है। भालू को यदि आबादी क्षेत्र में खाना न मिले तो वह जंगल की ओर लौट जाएगा। घर के बाहर खाद्य सामग्री नहीं रखनी चाहिए।
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एक वर्ष में चमोली जिले में भालू दो लोगों के साथ ही 122 मवेशियों को अपना मार चुका है। शुक्रवार को ही घाट ब्लाक के वादुक गांव में जंगल जा रही महिला पर भालू ने हमला कर मार दिया। जबकि गत अगस्त माह में कर्णप्रयाग क्षेत्र में भी भालू ने एक व्यक्ति को मार दिया था। अकेले अक्तूबर माह में भालू जिले में 66 मवेशियों पर हमला कर उन्हें घायल किया। नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ एनबी शर्मा का कहना है कि भालू गर्मियों में चार महीने गुफाओं में और सर्दियों में खाने की तलाश में आबादी क्षेत्रों में पहुंच जाता है। भालू को यदि आबादी क्षेत्र में खाना न मिले तो वह जंगल की ओर लौट जाएगा। घर के बाहर खाद्य सामग्री नहीं रखनी चाहिए।
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