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Chamoli News: आईआईटी रूड़की के वैज्ञानिक जल्द करेंगे कर्णप्रयाग के भूधंसाव क्षेत्र का निरीक्षण
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कर्णप्रयाग का बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड, सब्जी मंडी के ऊपरी भाग, अपर बाजार, शक्तिनगर व आईटीआई क्षेत्र भूस्खलन से प्रभावित है। पूर्व में वैज्ञानिकों की टीम यहां का निरीक्षण कर चुकी है। अब फिर से बहुगुणानगर क्षेत्र का आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिक तीसरी बार निरीक्षण करेंगे।
12 साल पहले आई आपदा के कारण बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड, सब्जी मंडी के ऊपरी भाग में मकान प्रभावित हो गए थे। इसके बाद से यहां भू-धंसाव होने लगा। मगर अभी तक यहां सुरक्षा कार्य न होने के कारण लोग खतरे के साये में रातें बिताने के लिए मजबूर हैं। यहां बदरीनाथ हाईवे किनारे इस भू-भाग में करीब 30 मकानों में दो फीट तक दरारें पड़ी हैं।
पिछले साल जुलाई और अगस्त में यहां भू-धंसाव में तेजी आई जो अभी भी जारी है। पंकज डिमरी, उमेश रतूड़ी, बीपी सती, राकेश खंडूड़ी, हरेंद्र बिष्ट आदि का कहना है कि इस भू-धंसाव वाले क्षेत्र का दो बार प्रशासन के अलावा रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। प्रभावित क्षेत्र की जमीन की जांच की जानी थी लेकिन नहीं हुई।
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वहीं कर्णप्रयाग तहसीलदार सुरेंद्र सिंह देव ने कहा कि बहुगुणानगर क्षेत्र में 30 मकानों में दरारें हैं। पूर्व में आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने यहां का सर्वे किया लेकिन अभी तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आई। अब फिर से वैज्ञानिक बहुगुणानगर क्षेत्र का भूगर्भीय सर्वेक्षण करेंगे।
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12 साल पहले आई आपदा के कारण बहुगुणानगर, सीएमपी बैंड, सब्जी मंडी के ऊपरी भाग में मकान प्रभावित हो गए थे। इसके बाद से यहां भू-धंसाव होने लगा। मगर अभी तक यहां सुरक्षा कार्य न होने के कारण लोग खतरे के साये में रातें बिताने के लिए मजबूर हैं। यहां बदरीनाथ हाईवे किनारे इस भू-भाग में करीब 30 मकानों में दो फीट तक दरारें पड़ी हैं।
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पिछले साल जुलाई और अगस्त में यहां भू-धंसाव में तेजी आई जो अभी भी जारी है। पंकज डिमरी, उमेश रतूड़ी, बीपी सती, राकेश खंडूड़ी, हरेंद्र बिष्ट आदि का कहना है कि इस भू-धंसाव वाले क्षेत्र का दो बार प्रशासन के अलावा रुड़की आईआईटी के वैज्ञानिक भी निरीक्षण कर चुके हैं। प्रभावित क्षेत्र की जमीन की जांच की जानी थी लेकिन नहीं हुई।
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वहीं कर्णप्रयाग तहसीलदार सुरेंद्र सिंह देव ने कहा कि बहुगुणानगर क्षेत्र में 30 मकानों में दरारें हैं। पूर्व में आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने यहां का सर्वे किया लेकिन अभी तक फाइनल रिपोर्ट नहीं आई। अब फिर से वैज्ञानिक बहुगुणानगर क्षेत्र का भूगर्भीय सर्वेक्षण करेंगे।