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ग्रामीण क्षेत्रों के उत्पादों को अब आसानी से मिल जाएगा बाजार

Tue, 01 Nov 2022 12:31 AM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 01 Nov 2022 12:31 AM IST
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Now the products of remote villages will be easily available in the market
ब्लॉक के सुदूरवर्ती गांवों में होने वाले उत्पादों को अब आसानी बाजार तक पहुंचाया जा सकेगा। जनमैत्री कल्पघाटी युवा समिति ने काश्तकारों की सुविधा के लिए रूलर मार्केटिंग वैन शुरू की है। यह वैन गांव-गांव पहुंचेगी और काश्तकारों की ओर से उत्पादित उत्पादों को बाजार तक पहुंचाएगी।
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उर्गम घाटी में जनमैत्री कल्पघाटी युवा समिति की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्द्धन पर कार्य किया जा रहा है। संस्था की ओर से पहले चरण में बड़ागांव, पांडुकेश्वर, सलूड़, उर्गम और पाखी गांव के 1200 काश्तकारों के कृषक उत्पादक संगठन बनाए गए हैं। काश्तकारों के लिए उत्पादों को बेचने के लिए पांच संग्रहण केंद्र भी बनाए गए हैं। जोशीमठ क्षेत्र में राजमा, चौलाई, आलू, सेब आदि की बेहतर पैदावार होती है लेकिन गांवों से उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में यह केंद्र और रूलर मार्केटिंग वैन काश्तकारों के लिए फायदेमंद होगी।
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समिति के सचिव प्रदीप चौहान ने बताया कि काश्तकारों के उत्पादों को बेहतर बाजार देने की मंशा से रूलर मार्केटिंग वैन शुरू की गई है। इसके माध्यम से जहां संग्रहण केंद्रों से उत्पादों को स्थानीय बाजार के साथ ही राज्य के विभिन्न स्थानों पर होने वाले मेलों और अन्य कार्यक्रमों में बेचने के लिए ले जाने की व्यवस्था बनाई गई है। उर्गम गांव के रघुवीर सिंह और अनूप सिंह का कहना है समिति की ओर से किया गया प्रयास काश्तकारों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराएगा। इससे काश्तकारों की आय में भी वृद्धि होगी।
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ऐसे होगा उत्पादों का विपणन
जनमैत्री संस्था काश्तकारों से समर्थन मूल्य पर उनके उत्पाद खरीदेगी। काश्तकार ग्रामीण क्षेत्रों में बनाए गए संग्रहण केंद्रों तक उत्पाद स्वयं पहुंचाएंगे और यहां से वैन की मदद से उत्पादों को बाजार और मेलों में बेचे जाएंगे। पूर्व में काश्तकारों को गांवों की पगडंडियों से अपने उत्पादों को घोड़े-खच्चरों की मदद से बाजार तक पहुंचाया जाता था। इससे काश्तकार अपने सभी उत्पादों को बाजार तक नहीं पहुंचा पाते थे। साथ ही घोड़े-खच्चरों का भाड़ा देना पड़ता था। अब संस्था की ओर से ग्रामीणों को गांव में ही उत्पादों को बेचने की सुविधा दी जा रही है। संवाद
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