छह माह तक अपने ननिहाल देवराड़ा में रहने के बाद मां नंदा बृहस्पतिवार को कुरुड़ गांव में स्थित अपने सिद्धपीठ में विराजमान हो गई हैं। इस दौरान मां नंदा के दर्शनों के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने मां नंदा के दर्शन कर मनौतियां मांगीं।
बीते वर्ष अगस्त माह में नंदा लोकजात यात्रा के दौरान यात्रा के अंतिम पड़ाव में पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा छह माह के प्रवास के लिए अपने ननिहाल देवराड़ा पहुंची थीं। बीते 23 दिसंबर को मां नंदा ने अपने सिद्धपीठ कुरुड़ (मायका क्षेत्र) के लिए प्रस्थान किया था। विभिन्न 23 पड़ावों को पार करते हुए बृहस्पतिवार को मां नंदा की डोली सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंची। यहां भक्तों ने मां नंदा के जयकारों के साथ स्वागत किया। भक्तों ने मां नंदा के दर्शन कर मनौतियां मांगीं। बुधवार को रात्रि प्रवास के लिए मां नंदा की डोली सेंती गांव के लक्ष्मी नारायण मंदिर में पहुंची थी। यहां भक्तों ने मां नंदा की डोली का ढोल नगाड़ों के साथ स्वागत किया था। बृहस्पतिवार को ब्रह्ममुहूर्त में गौड़ ब्राह्मणों ने मां नंदा का स्नान व महाभिषेक किया और पूजा की। इसके बाद मां नंदा की डोली घाट मुख्य बाजार स्थित सिद्धेश्वर महादेव मंदिर पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने मां नंदा और भोलेनाथ की पूजा की। करीब एक घंटे तक पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा ने अपने सिद्धपीठ के लिए प्रस्थान किया। अपराह्न करीब साढ़े तीन बजे मां नंदा अपने मंदिर में विराजमान हो गईं। मां नंदा की डोली के साथ चल रहे मुख्य पुजारी योगेश्वर प्रसाद गौड़, विजय प्रसाद गौड़, मनोहर प्रसाद गौड़, दिनेश प्रसाद और महिमानंद गौड़ ने मां नंदा की विशेष पूजा कर डोली को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित किया।