संतानदायिनी माता अनसूया के मंदिर में चल रहा लक्ष होम यज्ञ सोमवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। यज्ञ संपन्न होने के बाद आचार्य ब्राह्मणों ने पूजा-अर्चना कर मां अनसूया की मूर्ति को मंदिर के गर्भगृह में स्थापित कर दिया। जबकि बणद्वारा गांव की ज्वाला माता, देवलधार, सगर और कठूड़ की देव डोलियां भी अपने-अपने मंदिर में विराजमान हुईं। इस दौरान अपनी आराध्य देवी की विदाई पर ध्याणियों और देवी भक्तों की आंखें नम हो गईं।
सोमवार को तड़के से ही अनसूया मंदिर में विभिन्न पूजाएं शुरू हो गई थीं। सुबह नौ बजे देव डोलियों की शृंगार पूजा और आरती हुई। इसके बाद प्रधान आचार्य डा. प्रदीप सेमवाल व अन्य यज्ञाचार्यों ने पूर्णाहुति के लिए मंत्रोच्चारण किया। अपराह्न तीन बजे पूर्णाहुति संपन्न होने के बाद माता अनसूया ने भक्तों को दर्शन दिया और अपने मंदिर के गर्भगृह में स्थापित हो गईं। श्रीमद्देवी भागवत कथा का व्याख्यान कर रहे आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने भी श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया। इस मौके पर अनसूया मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद सिंह राणा, दिवारा यात्रा समिति के अध्यक्ष भगत सिंह बिष्ट, रविंद्र बर्त्वाल, सुनील बिष्ट, राहुल बिष्ट, कुंवर सिंह नेगी, हरि सिंह बिष्ट, विनोद के साथ ही कई भक्त मौजूद रहे।