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लंपी वायरस : पशुपालन विभाग अलर्ट, डॉक्टरों को दिए निर्देश
Wed, 27 Aug 2025 05:11 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 27 Aug 2025 05:11 PM IST
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कहा- पशु में लंपी वायरस दिखने पर तुरंत पशुपालन विभाग को करें सूचित
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। क्षेत्र में लंपी वायरस को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क है। हालांकि अभी इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंपी वायरस को लेकर डॉक्टरों की टीम प्रत्येक गांव पर नजर रख रही है। डॉक्टरों ने पशुपालकों को लंपी वायरस के लक्षण दिखने पर तुरंत पशुपालन विभाग को सूचित करने के लिए कहा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. असीम देव ने बताया कि अभी जिले में लंपी वायरस से जुड़ा कोई भी मामला नहीं आया है। फिर भी सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, चिकित्सकों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। गांव-गांव में पशुपालकों से संपर्क किया जा रहा है। यदि कोई मामला आता है तो वैक्सीनेशन किया जाएगा। चिकित्सकों की टीम गांव-गांव जाकर पशुपालकों को लंपी वायरस के लक्षणों के बारे में बता रही है। उन्होंने बताया कि लंपी वायरस मुख्य रूप से गाय और भैंस को संक्रमित करता है। इसमें शरीर में छोटी-छोटी गांठ बन जाती हैं और पशु दूध देना कम कर देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु में बुखार, थकान या त्वचा पर गांठ जैसे लक्षण दिखाई देते है तो तुरंत नजदीकी पशुपालन विभाग को सूचित करें। उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। क्षेत्र में लंपी वायरस को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क है। हालांकि अभी इसका कोई मामला सामने नहीं आया है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लंपी वायरस को लेकर डॉक्टरों की टीम प्रत्येक गांव पर नजर रख रही है। डॉक्टरों ने पशुपालकों को लंपी वायरस के लक्षण दिखने पर तुरंत पशुपालन विभाग को सूचित करने के लिए कहा।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. असीम देव ने बताया कि अभी जिले में लंपी वायरस से जुड़ा कोई भी मामला नहीं आया है। फिर भी सभी कर्मचारियों, अधिकारियों, चिकित्सकों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है। गांव-गांव में पशुपालकों से संपर्क किया जा रहा है। यदि कोई मामला आता है तो वैक्सीनेशन किया जाएगा। चिकित्सकों की टीम गांव-गांव जाकर पशुपालकों को लंपी वायरस के लक्षणों के बारे में बता रही है। उन्होंने बताया कि लंपी वायरस मुख्य रूप से गाय और भैंस को संक्रमित करता है। इसमें शरीर में छोटी-छोटी गांठ बन जाती हैं और पशु दूध देना कम कर देता है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु में बुखार, थकान या त्वचा पर गांठ जैसे लक्षण दिखाई देते है तो तुरंत नजदीकी पशुपालन विभाग को सूचित करें। उन्हें स्वस्थ पशुओं से अलग कर दें।
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