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पगना गांव में कई हेक्टेयर कृषि भूमि पर भू-धंसाव
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लगातार तीन दिनों तक रही मूसलाधार बारिश से निजमूला घाटी के पगना गांव में ग्रामीणों की कई हेक्टेयर कृषि भूमि भू-धंसाव की चपेट में आ गई है। साथ ही खेतों में दरारें पड़ गई हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से शीघ्र क्षेत्र का निरीक्षण कर प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग उठाई।
पगना गांव के निचले क्षेत्र में कई खेत भू-धंसाव की चपेट में आ गए हैं और भू-धंसाव का दायरा बढ़ता जा रहा है। प्रभावित मकर सिंह, हिम्मत सिंह, कमल सिंह, हरेंद्र सिंह और महेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी आजीविका का साधन कृषि और पशु ही हैं। खेतीबाड़ी से ही परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। अब बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कई खेत भू-धंसाव के कारण धंस गए हैं, यहां कृषि कार्य करना अब मुश्किल है। उन्होंने जिला प्रशासन से शीघ्र प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और क्षति का मुआवजा देने की मांग उठाई। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से सूचना मिलने पर क्षेत्र का निरीक्षण करवाया जाएगा।
खतरे की जद में आया पंचकेदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर
जोशीमठ। बीते दिनों हुई बारिश से पंचकेदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर खतरे की जद में आ गया है। यहां पर भैटा-भर्की सड़क निर्माणाधीन है, जिसका पुश्ता ढहने से मंदिर की धर्मशाला और पुजारी आवास को भारी नुकसान पहुंचा है।
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बारिश से क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है। कल्पेश्वर महादेव मंदिर के आसपास काफी भूस्खलन हुआ है। मंदिर परिसर के पीछे भारी मलबा आ चुका है, जो भविष्य में मंदिर के लिए खतरा बन सकता है। वहीं पंचकेदार पेयजल लाइन टूटने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। वहीं भर्की गांव जाने वाला पैदल मार्ग करीब एक किमी तक ध्वस्त हो चुका है। ऐसे में लोगों को आवाजाही में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। देवग्राम के प्रधान देवेंद्र रावत ने एसडीएम जोशीमठ को इस संबंध में पत्र भेजा है। उन्होंने यहां पर सुरक्षा के उपाय कराने की मांग की है। स्थानीय निवासी रघुवीर सिंह नेगी ने बताया कि सड़क का पुश्ता ढहने से कल्पेश्वर मंदिर के पीछे मलबा भर गया है, जिससे मंदिर को कभी भी खतरा पैदा हो सकता है। मंदिर में बनी धर्मशाला में दरारें आ गई हैं। पुजारी आवास को भी नुकसान हुआ है।
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पगना गांव के निचले क्षेत्र में कई खेत भू-धंसाव की चपेट में आ गए हैं और भू-धंसाव का दायरा बढ़ता जा रहा है। प्रभावित मकर सिंह, हिम्मत सिंह, कमल सिंह, हरेंद्र सिंह और महेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी आजीविका का साधन कृषि और पशु ही हैं। खेतीबाड़ी से ही परिवारों का भरण-पोषण करते हैं। अब बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं। कई खेत भू-धंसाव के कारण धंस गए हैं, यहां कृषि कार्य करना अब मुश्किल है। उन्होंने जिला प्रशासन से शीघ्र प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण करने और क्षति का मुआवजा देने की मांग उठाई। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने कहा कि ग्रामीणों की ओर से सूचना मिलने पर क्षेत्र का निरीक्षण करवाया जाएगा।
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खतरे की जद में आया पंचकेदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर
जोशीमठ। बीते दिनों हुई बारिश से पंचकेदार कल्पेश्वर महादेव मंदिर खतरे की जद में आ गया है। यहां पर भैटा-भर्की सड़क निर्माणाधीन है, जिसका पुश्ता ढहने से मंदिर की धर्मशाला और पुजारी आवास को भारी नुकसान पहुंचा है।
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बारिश से क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ है। कल्पेश्वर महादेव मंदिर के आसपास काफी भूस्खलन हुआ है। मंदिर परिसर के पीछे भारी मलबा आ चुका है, जो भविष्य में मंदिर के लिए खतरा बन सकता है। वहीं पंचकेदार पेयजल लाइन टूटने से पानी की आपूर्ति भी बाधित हो गई है। वहीं भर्की गांव जाने वाला पैदल मार्ग करीब एक किमी तक ध्वस्त हो चुका है। ऐसे में लोगों को आवाजाही में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। देवग्राम के प्रधान देवेंद्र रावत ने एसडीएम जोशीमठ को इस संबंध में पत्र भेजा है। उन्होंने यहां पर सुरक्षा के उपाय कराने की मांग की है। स्थानीय निवासी रघुवीर सिंह नेगी ने बताया कि सड़क का पुश्ता ढहने से कल्पेश्वर मंदिर के पीछे मलबा भर गया है, जिससे मंदिर को कभी भी खतरा पैदा हो सकता है। मंदिर में बनी धर्मशाला में दरारें आ गई हैं। पुजारी आवास को भी नुकसान हुआ है।