पहाड़ी परंपराओं को बढ़ाने पर दिया जोर
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तेफना में दूसरे दिन दशोली गढ़ पर्यटन एवं सांस्कृतिक मेले की तैयारी बैठक में पहाड़ी परंपराओं को सामने लाने पर जोर दिया गया।
निर्णय लिया गया कि मेले में पहाड़ के ढोल वादन, डौंर, हुड़का सहित जागर गायन की परंपरा पर आधारित कार्यक्रमों का प्रतियोगितात्मक आयोजन किया जाएगा, जिसके लिए समिति प्रतिभागियों को पुरस्कार के साथ-साथ सम्मानित भी करेगी। मेेले को जिलास्तरीय बनाने के लिए प्रयास भी किए जाएंगे।
मेला समिति के अध्यक्ष पीएस राणा की अध्यक्षता और सचिव बीरेंद्र सिंह रावत के संचालन में हुई बैठक में कहा गया कि इस बार मेला सात दिवसीय होगा। 20 जनवरी से शुरू होने वाले मेले का समापन 26 जनवरी को होगा। प्रस्ताव रखा गया कि मेले में मांगल गीतों के साथ प्रतियोगिताएं भी होंगी।
मेला आयोजन में विभिन्न विभागों से सहयोग लिया जाएगा। जिला पंचायत अध्यक्ष मुुन्नी शाह ने कहा कि 6 जनवरी के बाद जिले में विभिन्न अधिकारियों के साथ बैठक कर मेले को भव्य रूप देने के प्रयास होंगे। इस मौके पर स्वागत, संचालन, खेल, सांस्कृतिक सहित अन्य समितियों का गठन किया गया।
बैठक में घाट के प्रमुख कर्ण सिंह, माहेश्वरी कन्याल और लक्ष्मी जोशी, दशमद्वार विकास मंच के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद पंत, बलवीर सिंह, तेफना की प्रधान रामी देवी, कमेड़ा की कमला नेगी, मंगरोली के तेजवीर कंडेरी, मनोज रावत, विक्रम सिंह, महिला मंगल दल अध्यक्ष अमृत रावत, मेला समिति के उपाध्यक्ष विजेंद्र रावत और दयाल सिंह आदि ने विचार रखे। बैठक में मैखुरा, उत्तरों, सोनला, स्वर्का, जयकंडी, गंडासू, कांडई आदि के ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और ग्रामीण मौजूद थे।