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Chamoli News: अलकनंदा के कटाव से पांडुकेश्वर के निचले क्षेत्र में खतरा
Wed, 07 Oct 2026 07:27 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Wed, 07 Oct 2026 07:27 PM IST
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ग्रामीणों ने गांव के चारों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की उठाई मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। पांडुकेश्वर के निचले क्षेत्र में अलकनंदा नदी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए ग्रामीणों ने बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर कटाव तेज हो जाता है जिससे गांव के निचले हिस्से को खतरा बना हुआ है।
वर्ष 2013 की आपदा के दौरान पांडुकेश्वर से गोविंदघाट तक अलकनंदा में आई बाढ़ से कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए थे। गोविंदघाट में गुरुद्वारे की धर्मशालाओं के साथ ही पार्किंग को भी नुकसान पहुंचा था। आपदा के बाद शासन की ओर से कुछ स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए गए लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश स्थानों पर कार्य अधूरे छोड़ दिए गए। धीरज मेहता, अजय और जयदीप आदि ने बताया कि पांडुकेश्वर बदरीनाथ धाम का शीतकालीन गद्दीस्थल भी है। शीतकाल में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में ऐतिहासिक गांव के संरक्षण के लिए निचले हिस्से में चारों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराया जाना जरूरी है। इससे अलकनंदा के कटाव को रोका जा सकेगा और गांव को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि पांडुकेश्वर में नदी से हो रहे कटाव की स्थिति को दिखवाया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। पांडुकेश्वर के निचले क्षेत्र में अलकनंदा नदी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए ग्रामीणों ने बाढ़ सुरक्षा कार्य कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का जलस्तर बढ़ने पर कटाव तेज हो जाता है जिससे गांव के निचले हिस्से को खतरा बना हुआ है।
वर्ष 2013 की आपदा के दौरान पांडुकेश्वर से गोविंदघाट तक अलकनंदा में आई बाढ़ से कई स्थानों पर तटबंध क्षतिग्रस्त हो गए थे। गोविंदघाट में गुरुद्वारे की धर्मशालाओं के साथ ही पार्किंग को भी नुकसान पहुंचा था। आपदा के बाद शासन की ओर से कुछ स्थानों पर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराए गए लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अधिकांश स्थानों पर कार्य अधूरे छोड़ दिए गए। धीरज मेहता, अजय और जयदीप आदि ने बताया कि पांडुकेश्वर बदरीनाथ धाम का शीतकालीन गद्दीस्थल भी है। शीतकाल में भी यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में ऐतिहासिक गांव के संरक्षण के लिए निचले हिस्से में चारों ओर बाढ़ सुरक्षा कार्य कराया जाना जरूरी है। इससे अलकनंदा के कटाव को रोका जा सकेगा और गांव को संभावित नुकसान से बचाया जा सकेगा। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि पांडुकेश्वर में नदी से हो रहे कटाव की स्थिति को दिखवाया जाएगा।
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