{"_id":"f8931c940f73623aa618ac10343a6217","slug":"first-were-lush-farmland-now-lying-fallow-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहले लहलहाते थे खेत, अब पड़े हैं बंजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहले लहलहाते थे खेत, अब पड़े हैं बंजर
ब्यूरो/अमर उजाला,
Updated Fri, 22 Jan 2016 09:12 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मंडल घाटी के ग्राम पंचायत देवलधार में एक दशक पूर्व जहां खेतों में फसलें लहलहाती थीं, मौजूदा समय में वे खेत बंजर पड़े हैं।
लघु सिंचाई विभाग ने खेतों में पानी पहुंचाने के लिए यहां हाईड्रम योजना का निर्माण शुरू किया, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के चलते आज तक हाईड्रम योजना का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाया है।
वर्ष 2001 में शासन से हाईड्रम योजना स्थापित करने के लिए लघु सिंचाई विभाग को नौ लाख 35 हजार रुपये स्वीकृत हुए। ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब वे अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे।
योजना पर ठेकेदार की ओर से छह लाख 90 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन आज तक योजना का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। ग्रामीण ओम प्रकाश डिमरी का कहना है कि पहले स्वयं के संसाधनों से निर्मित गूल से अपने खेतों की सिंचाई करते थे।
विज्ञापन
हाईड्रम योजना के निर्माण के दौरान गूल के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया और अब गूल भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। कई बार विभागीय अधिकारियों से हाईड्रम योजना को पूर्ण करने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बालखिला नदी पर 14 साल पूर्व लगाई गई हाईड्रम मशीनें भी जंक खा रही हैं।
हाईड्रम योजना के पाइप जगह-जगह लावारिस हालत में पड़े हैं। हाईड्रम से जोड़े गए पाइप भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। सिंचाई की व्यवस्था न होने से कई किसान खेती छोड़ चुके हैं।
कोट
हाईड्रम योजनाओं के निर्माण में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से धनराशि दी जानी थी, लेकिन हमें कई हाईड्रम योजनाओं में धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। इस हाईड्रम योजना की क्या स्थिति है, इसे दिखवाया जाएगा। - राजीव कुमार सक्सेना, ईई, लघु सिंचाई विभाग, चमोली।
विज्ञापन
लघु सिंचाई विभाग ने खेतों में पानी पहुंचाने के लिए यहां हाईड्रम योजना का निर्माण शुरू किया, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही के चलते आज तक हाईड्रम योजना का पानी खेतों तक नहीं पहुंच पाया है।
वर्ष 2001 में शासन से हाईड्रम योजना स्थापित करने के लिए लघु सिंचाई विभाग को नौ लाख 35 हजार रुपये स्वीकृत हुए। ग्रामीणों को उम्मीद जगी कि अब वे अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे।
विज्ञापन
योजना पर ठेकेदार की ओर से छह लाख 90 हजार रुपये खर्च किए, लेकिन आज तक योजना का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। ग्रामीण ओम प्रकाश डिमरी का कहना है कि पहले स्वयं के संसाधनों से निर्मित गूल से अपने खेतों की सिंचाई करते थे।
विज्ञापन
हाईड्रम योजना के निर्माण के दौरान गूल के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया और अब गूल भी क्षतिग्रस्त पड़ी है। कई बार विभागीय अधिकारियों से हाईड्रम योजना को पूर्ण करने की मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। बालखिला नदी पर 14 साल पूर्व लगाई गई हाईड्रम मशीनें भी जंक खा रही हैं।
हाईड्रम योजना के पाइप जगह-जगह लावारिस हालत में पड़े हैं। हाईड्रम से जोड़े गए पाइप भी क्षतिग्रस्त पड़े हैं। सिंचाई की व्यवस्था न होने से कई किसान खेती छोड़ चुके हैं।
कोट
हाईड्रम योजनाओं के निर्माण में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से धनराशि दी जानी थी, लेकिन हमें कई हाईड्रम योजनाओं में धनराशि का भुगतान नहीं हो पाया है। इस हाईड्रम योजना की क्या स्थिति है, इसे दिखवाया जाएगा। - राजीव कुमार सक्सेना, ईई, लघु सिंचाई विभाग, चमोली।