{"_id":"630b87e034d93a3e974ee614","slug":"develop-gopeshwar-mahavidyalaya-as-a-campus-gopeshwar-news-drn421133034","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोपेश्वर महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन विवि कैंपस के रुप में विकसित करो सरकार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोपेश्वर महाविद्यालय को श्रीदेव सुमन विवि कैंपस के रुप में विकसित करो सरकार
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाविद्यालय गोपेश्वर को श्रीदेव सुमन विवि का कैंपस बनाने के बाद सुविधाएं न दिए जाने पर जनप्रतिनिधियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि जब यह महाविद्यालय गढ़वाल केंद्रीय विवि से संबद्ध था तो यह आदर्श महाविद्यालय हुआ करता था लेकिन आज महाविद्यालय सरकारों की अनदेखी का दंश झेल रहा है। उन्होंने कैंपस को विकसित करने की मांग उठाई।
ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष मोहन सिंह नेगी, दशोली ब्लॉक अध्यक्ष नयन सिंह कुंवर, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह बिष्ट, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता विकास जुगरान आदि का कहना है कि गोपेश्वर महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी। सीमांत चमोली जिले का यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। अपने लक्ष्य, उद्देश्य और संकल्पों को प्राप्त करने पर वर्ष 2014 में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की ओर से महाविद्यालय को ए ग्रेड में रखा गया है लेकिन शासन से वर्ष 2016 में इसे श्रीदेव सुमन विवि का कैंपस घोषित करने का आदेश जारी हुआ। तब से महाविद्यालय में व्यावसायिक पाठ्यक्रम से लेकर खेल गतिविधि तक ठप पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के पुस्तकालय में वर्षों पुरानी किताबें धूल फांक रही हैं। एक माह पूर्व जिला योजना की बैठक में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के सम्मुख भी कैंपस को विकसित कर सुविधाएं जुटाने की मांग रखी गई थी लेकिन आज तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। संवाद
गोपेश्वर महाविद्यालय को पूर्ण रूप से श्रीदेव सुमन विवि कैंपस बनाने की मांग संगठन और शासन के सम्मुख रखी जाएगी। महाविद्यालय का कैंपस के रूप में विकसित होना और यहां सुविधाएं जुटाना नितांत जरूरी है। इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री से भी वार्ता की जाएगी। - रघुवीर सिंह बिष्ट, जिलाध्यक्ष, भाजपा, चमोली।
विज्ञापन
कैंपस तो बना नहीं, कॉलेज की जमीन पर हो रहा अतिक्रमण
राजकीय महाविद्यालय गोपेश्वर परिसर की भूमि पर अब अतिक्रमण होने लगा है। महाविद्यालय की भूमि कागजों में 2.8228 हेक्टेयर है लेकिन परिसर की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। कई बार महाविद्यालय प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने का प्रयास भी किया गया लेकिन अभी भी स्थिति जस की तस है। महाविद्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि महाविद्यालय की तकरीबन नौ नाली भूमि पर लोगों की ओर से पक्का निर्माण किया गया है। महाविद्यालय के भागीरथी और अलकनंदा छात्रावास के पीछे प्राचार्य आवास के आसपास और पुस्तकालय व कर्मचारी आवास से लगी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। इधर, प्राचार्य डा. मनोज उनियाल का कहना है कि कई बार अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए जिला प्रशासन को लिखा गया। अब फिर से अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन से पत्राचार किया जाएगा। संवाद
विज्ञापन
ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष मोहन सिंह नेगी, दशोली ब्लॉक अध्यक्ष नयन सिंह कुंवर, जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मण सिंह बिष्ट, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता विकास जुगरान आदि का कहना है कि गोपेश्वर महाविद्यालय की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी। सीमांत चमोली जिले का यह महाविद्यालय उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। अपने लक्ष्य, उद्देश्य और संकल्पों को प्राप्त करने पर वर्ष 2014 में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की ओर से महाविद्यालय को ए ग्रेड में रखा गया है लेकिन शासन से वर्ष 2016 में इसे श्रीदेव सुमन विवि का कैंपस घोषित करने का आदेश जारी हुआ। तब से महाविद्यालय में व्यावसायिक पाठ्यक्रम से लेकर खेल गतिविधि तक ठप पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के पुस्तकालय में वर्षों पुरानी किताबें धूल फांक रही हैं। एक माह पूर्व जिला योजना की बैठक में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के सम्मुख भी कैंपस को विकसित कर सुविधाएं जुटाने की मांग रखी गई थी लेकिन आज तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। संवाद
विज्ञापन
गोपेश्वर महाविद्यालय को पूर्ण रूप से श्रीदेव सुमन विवि कैंपस बनाने की मांग संगठन और शासन के सम्मुख रखी जाएगी। महाविद्यालय का कैंपस के रूप में विकसित होना और यहां सुविधाएं जुटाना नितांत जरूरी है। इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री से भी वार्ता की जाएगी। - रघुवीर सिंह बिष्ट, जिलाध्यक्ष, भाजपा, चमोली।
विज्ञापन
कैंपस तो बना नहीं, कॉलेज की जमीन पर हो रहा अतिक्रमण
राजकीय महाविद्यालय गोपेश्वर परिसर की भूमि पर अब अतिक्रमण होने लगा है। महाविद्यालय की भूमि कागजों में 2.8228 हेक्टेयर है लेकिन परिसर की भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। कई बार महाविद्यालय प्रशासन की ओर से जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटाने का प्रयास भी किया गया लेकिन अभी भी स्थिति जस की तस है। महाविद्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि महाविद्यालय की तकरीबन नौ नाली भूमि पर लोगों की ओर से पक्का निर्माण किया गया है। महाविद्यालय के भागीरथी और अलकनंदा छात्रावास के पीछे प्राचार्य आवास के आसपास और पुस्तकालय व कर्मचारी आवास से लगी भूमि पर अतिक्रमण हो रहा है। इधर, प्राचार्य डा. मनोज उनियाल का कहना है कि कई बार अतिक्रमण चिह्नित करने के लिए जिला प्रशासन को लिखा गया। अब फिर से अतिक्रमण हटाने को लेकर प्रशासन से पत्राचार किया जाएगा। संवाद