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तपोवन सुरंग से 200 मीटर तक हटाया मलबा

Sat, 06 Mar 2021 10:47 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 10:47 PM IST
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Debris removed up to 200 meters from Tapovan tunnel
तपोवन सुरंग में भरा पानी व मलबा। - फोटो : GOPESHWAR
तपोवन सुरंग से 200 मीटर तक मलबा हटाया जा चुका है जबकि लगातार पानी के रिसाव से मलबा हटाने में दिक्कतें आ रही हैं। पानी की निकासी के लिए चार पाइप लगाए गए हैं। नदी में चारों और मलबे के बीच शवों की तलाश अभी भी जारी है। एनडीआरएफ की पांच टीमों में से दो टीमें लौट गई हैं, जबकि दो टीमें शवों की तलाश और एक टीम सुरंग में सर्च ऑपरेशन में जुटी है।
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660 मीटर लंबी तपोवन सुरंग में से 200 मीटर तक का मलबा हटा लिया गया है जबकि इंटेक एडिट से मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। एसडीआरएफ की भी दो टीमें रैणी गांव में मलबे में लोगों की तलाश में जुटी हैं। रैणी में ऋषि गंगा जल विद्युत परियोजना साइट पर भी मलबे में लोगों की तलाश जारी है। यहां मलबे को हटाने में चार जेसीबी लगी हैं। वहीं एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहिरवार ने बताया कि आपदा में लापता 25 लोगों के मृत प्रमाणपत्र मिल चुके हैं, जिनकी मुआवजे की राशि 3 करोड़ 50 लाख रुपये भी भुगतान कर लिया गया है। सुरंग में सर्च अभियान अंतिम छोर तक जारी रहेगा। स्थिति सामान्य होते ही परियोजना का छूटा कार्य भी जल्द शुरू कर दिया जाएगा।
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नीती घाटी में पटरी पर लौटने लगा जनजीवन
मलारी हाईवे पर बैली ब्रिज लगने के बाद नीती घाटी में धीरे-धीरे जनजीवन पटरी पर लौटने लगा है। यहां वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। सीमा क्षेत्र में सेना, के वाहनों की आवाजाही भी बढ़ गई है। भंग्यूल और जुग्जु-ग्वाड़ गांव के ग्रामीण ट्रॉली से आवाजाही कर रहे हैं।
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आपदा के एक माह बाद भी तपोवन और रैणी में सन्नाटा
गोपेश्वर। ऋषि गंगा की त्रासदी को एक माह का समय हो गया है, लेकिन आपदा प्रभावित क्षेत्र तपोवन और रैणी में अभी भी जीवन सामान्य नहीं हो पाया है। तपोवन बाजार सुनसान है और तपोवन सुरंग में फंसे लोगों के जीवित मिलने की आस परिजनों में टूट चुकी है।

आपदा में लापता 204 लोगों में अभी तक मलबे से 72 शव और 31 मानव अंग बरामद हो चुके हैं। इनमें 43 शव और एक मानव अंग की शिनाख्त ही हुई है, जबकि 133 लोग अभी भी लापता हैं। 110 परिजन, 58 शवों और 28 मानव अंगों के डीएनए सैंपल मिलान के लिए एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैबोरेट्री) देहरादून भेजे गए हैं। पिछले आठ दिनों से मलबे से एक भी शव बरामद नहीं हुआ है। ब्यूरो
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