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Chamoli News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा
Tue, 25 Aug 2026 06:50 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Tue, 25 Aug 2026 06:50 PM IST
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अदालत से
विशेष सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला
पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने के भी आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने जयगणेश रावल को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। वहीं धमकी देने के अपराध में एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा और 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
मामला ज्योतिर्मठ थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार मई 2024 में आरोपी ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में 25 फरवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी माना। अदालत ने अर्थदंड में से 20 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश दिए। इसके अलावा पॉक्सो और उत्तराखंड पीड़ित सहायता योजना के तहत राज्य सरकार को पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर 30 दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। फैसले के बाद आरोपी को जिला कारागार पुरसाड़ी भेजने के आदेश दिए गए।
एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ा
पोखरी (चमोली)। न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) पोखरी मोहम्मद वासिक की अदालत ने मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के मामले में कैलाश सिंह और उनकी पत्नी रामेश्वरी देवी को एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ दिया।
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24 मार्च 2024 को ग्राम नैल में सुमित्रा देवी के साथ मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में 10 गवाहों के बयान कराए गए तथा घटना से संबंधित वीडियो भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने दोनों आरोपियों की पहली बार हुई दोषसिद्धि, अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और उनके व्यक्तिगत हालात को देखते हुए जेल की सजा देने के बजाय परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देना उचित माना। अदालत ने दोनों को एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ा है। इस अवधि में उन्हें शांति बनाए रखने, सदाचारी रहने और दोबारा इस तरह का अपराध नहीं करने की शर्त रखी गई है। दोनों को 25-25 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि का एक-एक जमानती प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। संवाद
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विशेष सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला
पीड़िता को तीन लाख रुपये मुआवजा देने के भी आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी-
गोपेश्वर। नाबालिग से दुष्कर्म और धमकी देने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश बिंध्याचल सिंह की अदालत ने जयगणेश रावल को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। वहीं धमकी देने के अपराध में एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा और 500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
मामला ज्योतिर्मठ थाने में दर्ज प्राथमिकी से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार मई 2024 में आरोपी ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म किया और उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। मामले में 25 फरवरी 2025 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अदालत ने अभियोजन की ओर से पेश साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी माना। अदालत ने अर्थदंड में से 20 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने के आदेश दिए। इसके अलावा पॉक्सो और उत्तराखंड पीड़ित सहायता योजना के तहत राज्य सरकार को पीड़िता को तीन लाख रुपये प्रतिकर 30 दिन में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। फैसले के बाद आरोपी को जिला कारागार पुरसाड़ी भेजने के आदेश दिए गए।
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एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ा
पोखरी (चमोली)। न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) पोखरी मोहम्मद वासिक की अदालत ने मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के मामले में कैलाश सिंह और उनकी पत्नी रामेश्वरी देवी को एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ दिया।
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24 मार्च 2024 को ग्राम नैल में सुमित्रा देवी के साथ मारपीट और गाली-गलौज का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले में 10 गवाहों के बयान कराए गए तथा घटना से संबंधित वीडियो भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। अदालत ने दोनों आरोपियों की पहली बार हुई दोषसिद्धि, अपराध की प्रकृति, परिस्थितियों और उनके व्यक्तिगत हालात को देखते हुए जेल की सजा देने के बजाय परिवीक्षा अधिनियम का लाभ देना उचित माना। अदालत ने दोनों को एक वर्ष तक सदाचार में रहने की शर्त पर छोड़ा है। इस अवधि में उन्हें शांति बनाए रखने, सदाचारी रहने और दोबारा इस तरह का अपराध नहीं करने की शर्त रखी गई है। दोनों को 25-25 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और इतनी ही धनराशि का एक-एक जमानती प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं। संवाद