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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Chamoli News ›   Badari Vishal's door closed

कपाट बंद होने से पूर्व 7500 ने किए बदरी विशाल के दर्शन

Tue, 17 Nov 2015 06:32 PM IST
बदरीनाथ
बदरीनाथ Updated Tue, 17 Nov 2015 06:32 PM IST
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भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार को अपराह्न 4 बजकर 35 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। धाम के कपाट बंद होने के समय करीब सात हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर मनौतियां मांगी। कपाट बंद होने के दौरान धाम में चटख धूप खिली रही। इससे धाम पहुंचे श्रद्धालुओं ने जहां बदरी विशाल के दर्शन किये, वहीं धाम के प्राकृतिक सौंदर्य का भी जमकर आनंद लिया।
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मंगलवार को बदरीनाथ धाम में तड़के से ही बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा शुरू हो गई थी, जो दोपहर बाद कपाट बंद होने की प्रक्रिया के साथ संपन्न हुई। इस दौरान दिनभर बदरीनाथ के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खुले रखे गए थे। बदरीनाथ मंदिर के सिंह द्वार के दोनों ओर बदरीनाथ के वेदपाठी और संस्कृत के छात्रों ने स्वस्ति वाचन व विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।  
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धार्मिक परंपरा के अनुसार अपराह्न दो बजकर 30 मिनट पर बदरीनाथ के मुख्य पुजारी रावल ईश्वरन नंबूदरी ने माता लक्ष्मी का वेश धारण कर लक्ष्मी जी की प्रतिमा को बदरीनाथ गर्भगृह में रखा और माणा गांव की कन्याओं की ओर से निर्मित कंबल पर घी का लेपन कर बदरीविशाल को ओढ़ाया गया। इसके पश्चात बदरीनाथ गर्भगृह से कुबेर जी, गरुड़ जी और उद्धव जी की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाकर उत्सव डोली में रखा गया। इसके बाद आदि गुरू शंकराचार्य की डोली और तीनों देवों की उत्सव डोलियां पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुई। बुधवार को सभी डोलियां शीतकालीन गद्दी स्थल पांडुकेश्वर योग ध्यान बदरी मंदिर में पहुंच जाएंगी। साथ ही आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ नृसिंह मंदिर के लिए रवाना होगी। इस दौरान धाम में पहुंचे हजारों तीर्थयात्रियों व स्थानीय श्रद्धालुओं के बदरीनाथ के जयकारों से संपूर्ण बदरीशपुरी गुंजायमान हो उठी।
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इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, कपकोट के विधायक ललित फरस्वाण, आईटीबीपी के डीजी श्रीकृष्ण, डिमरी महापंचायत के अध्यक्ष सुरेश डिमरी, सदस्य हरीश डिमरी, जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन, एसपी सुनील कुमार मीणा आदि मौजूद थे।


दिनभर गूंजे भजन-कीर्तन, भंडारे हुए
बदरीनाथ। बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने के दौरान धाम परिसर में सीमांत गांव माणा और बामणी गांवों के महिला-पुरुषों और तीर्थयात्रियों की ओर से भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। दिनभर चले कीर्तनों से बदरीनाथ धाम गुंजायमान रहा। इस मौके पर गढ़वाल राइफल की बैंड धुनों और जय-जय हो बदरीनाथ के जयघोष के साथ कपाट बंद होने की प्रक्रिया संपन्न हुई। इस मौके पर दीप स्टार ऋषिकेश कलाकारों ने संगीतमय भजनों की शानदार प्रस्तुतियां दी। इस दौरान धाम में पहुंची पांडुकेश्वर की महिलाओं ने पारंपरिक गीतों के साथ नृत्य भी प्रस्तुत किया। वहीं गढ़वाल स्काउट, मंदिर समिति व जिला प्रशासन की ओर से भंडारों का आयोजन किया गया था।
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