{"_id":"60e71f028ebc3eccc73a3b6e","slug":"after-walking-a-distance-of-12-km-the-patient-was-taken-to-the-hospital-karnpryag-news-drn383865384","type":"story","status":"publish","title_hn":"12 किमी की पैदल दूरी तय कर मरीज को पहुंचाया अस्पताल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
12 किमी की पैदल दूरी तय कर मरीज को पहुंचाया अस्पताल
विज्ञापन
गांव तक सड़क न होने का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को गैरसैंण ब्लॉक के तेवाखर्क गांव की एक महिला की अचानक तबीयत खराब हुई तो ग्रामीणों को महिला को अस्पताल ले जाने और और फिर वापस लाने के लिए 12 किमी की पैदल पूरी नापनी पड़ी। अब महिला की तबीयत में सुधार है।
ब्लाक गैरसैंण के दूरस्थ गांव सेरा और तेवाखर्क के लोग आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। बृहस्पतिवार को तेवाखर्क की काशी देवी (52) पत्नी बचन सिंह की अचानक तबीयत खराब हो गई। पहले ग्रामीणों ने उसे घरेलू दवाई दी, लेकिन जब उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो हुकम सिंह, जमन सिंह, राजेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, भरत सिंह, विशन सिंह, सुनील सिंह आदि ग्रामीणों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और 6 किमी तेज ढलान पार कर मालकोट मोटर मार्ग तक पहुंचाया। उसके बाद 108 वाहन से महिला को सीएचसी गैरसैंण पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक इलाज किया और तबीयत सुधरने पर घर भेज दिया। इसके बाद ग्रामीण फिर खड़ी चढ़ाई पार कर छह किमी पैदल चलकर महिला को घर लाए।
15 दिनों में सड़क के शासनादेश का आश्वासन आज तक नहीं हुआ पूरा
ग्रामीण हुकम सिंह ने बताया कि सेरा और तेवाखर्क गांव में 80 परिवार रहते हैं और दो दशकों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। जब सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीणों ने पिछले साल 26 जनवरी से 15 फरवरी तक श्रमदान कर सड़क बनाई। उसके बाद 16 फरवरी 2020 से बुजुर्ग लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था, लेकिन भराड़ीसैंण में मार्च महीने में बजट सत्र से पहले अधिकारी ग्रामीणों के बीच पहुंचे थे और 15 दिनों में सड़क का शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया था, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया। गांव के राजेंद्र सिंह ने कहा कि बैंक जाने के लिए भी बुजुर्ग पहले 6 किमी पैदल चलते हैं और फिर गैरसैंण वाहन से जाते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क नहीं बनाई गई तो ग्रामीण फिर से आंदोलन करेंगे।
विज्ञापन
कोट
लोक निर्माण विभाग के एई आदित्य ठाकुर ने कहा कि विभाग के स्तर से मालकोट-सेरा-तेवाखर्क सड़क की फाइल शासन में भेज दी गई है। वित्तीय स्वीकृति मिलनी बाकी है। उम्मीद है कि जल्द सड़क निर्माण की सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी। उसके बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।
विज्ञापन
ब्लाक गैरसैंण के दूरस्थ गांव सेरा और तेवाखर्क के लोग आज भी सड़क सुविधा से वंचित हैं। बृहस्पतिवार को तेवाखर्क की काशी देवी (52) पत्नी बचन सिंह की अचानक तबीयत खराब हो गई। पहले ग्रामीणों ने उसे घरेलू दवाई दी, लेकिन जब उनकी तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो हुकम सिंह, जमन सिंह, राजेंद्र सिंह, गोविंद सिंह, भरत सिंह, विशन सिंह, सुनील सिंह आदि ग्रामीणों ने महिला को स्ट्रेचर पर लिटाया और 6 किमी तेज ढलान पार कर मालकोट मोटर मार्ग तक पहुंचाया। उसके बाद 108 वाहन से महिला को सीएचसी गैरसैंण पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसका प्राथमिक इलाज किया और तबीयत सुधरने पर घर भेज दिया। इसके बाद ग्रामीण फिर खड़ी चढ़ाई पार कर छह किमी पैदल चलकर महिला को घर लाए।
विज्ञापन
15 दिनों में सड़क के शासनादेश का आश्वासन आज तक नहीं हुआ पूरा
ग्रामीण हुकम सिंह ने बताया कि सेरा और तेवाखर्क गांव में 80 परिवार रहते हैं और दो दशकों से सड़क निर्माण की मांग कर रहे हैं। जब सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीणों ने पिछले साल 26 जनवरी से 15 फरवरी तक श्रमदान कर सड़क बनाई। उसके बाद 16 फरवरी 2020 से बुजुर्ग लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया था, लेकिन भराड़ीसैंण में मार्च महीने में बजट सत्र से पहले अधिकारी ग्रामीणों के बीच पहुंचे थे और 15 दिनों में सड़क का शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया था, जो अभी तक पूरा नहीं हो पाया। गांव के राजेंद्र सिंह ने कहा कि बैंक जाने के लिए भी बुजुर्ग पहले 6 किमी पैदल चलते हैं और फिर गैरसैंण वाहन से जाते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क नहीं बनाई गई तो ग्रामीण फिर से आंदोलन करेंगे।
विज्ञापन
कोट
लोक निर्माण विभाग के एई आदित्य ठाकुर ने कहा कि विभाग के स्तर से मालकोट-सेरा-तेवाखर्क सड़क की फाइल शासन में भेज दी गई है। वित्तीय स्वीकृति मिलनी बाकी है। उम्मीद है कि जल्द सड़क निर्माण की सभी औपचारिकताएं पूरी हो जाएंगी। उसके बाद काम शुरू कर दिया जाएगा।