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नहीं बन पाया उर्गम का विद्यालय भवन
Chamoli
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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गोपेश्वर। शिक्षा विभाग ने उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम को जीआईसी उर्गम विद्यालय भवन के निर्माण के प्रथम चरण की किश्त के रुप में एक लाख 77 हजार रुपये का चेक दिया, लेकिन निर्माण निगम के अधिकारियों की लेट लतीफ के चलते चेक कालातीत हो गया है। इससे भवन निर्माण अधर में लटका हुआ है।
इस बात का खुलासा उर्गम संघर्ष समिति के अध्यक्ष द्वारा सूचना अधिकार के तहत ली गई जानकारी में हुआ। अब शिक्षा विभाग ने उक्त चेक के कालातीत होने के कारण और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होने के पश्चात ही दोबारा धनराशि आवंटित किए जाने की बात कही है। लेकिन डेढ़ वर्ष से भी अधिक का समय व्यतीत होने के बावजूद अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अधिकारियों के इस उदासीन रवैये से जीआईसी उर्गम के छात्र-छात्राएं क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन होने के कारण खुले आसमान के नीचे पठन-पाठन के लिए मजबूर हैं।
क्या था मामला
जीआईसी उर्गम के भवन निर्माण के लिए जिला शिक्षाधिकारी चमोली ने 31 मार्च 2011 को परियोजना प्रबंधक उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम गोपेश्वर को पहले चरण में एक लाख 77 हजार रुपये का चेक दिया, जिसे निर्माण निगम के अधिकारियों ने 28 अप्रैल को बैंक में जमा किया गया, तब तक चेक की अवधि जा चुकी थी। अब निर्माण निगम ने विभाग से दोबारा धन की मांग कर रहा है।
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निर्माण निगम के अधिकारियों की लेट लतीफ के चलते चेक कालातीत हुआ है। अब हम तभी दोबारा धन आहरण करेंगे, जब संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो। इसके बाद फिर धनराशि मांगने के लिए पत्रावलियां वित्त विभाग को भेजी जाएंगी।
-मनीषा पंवार, सचिव, शिक्षा, उत्तराखंड शासन
इस मामले में प्रबंधक अधिकारी, पेयजल निर्माण निगम श्रीनगर की टीम ने जांच की है। इसकी रिपोर्ट भी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। शीघ्र ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग से पुन: धनराशि की मांग की गई है।
-जीपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, पेयजल निर्माण, निगम, गोपेश्वर।
अधिकारियों के आश्वासन से ग्रामीण छले जा रहे हैं। उर्गम घाटी के ग्रामीण पिछले पांच सालों से जीआईसी उर्गम के भवन निर्माण की मांग उठाते आ रहे हैं। शीघ्र जिला मुख्यालय पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
-लक्ष्मण सिंह नेगी, अध्यक्ष, उर्गम घाटी संघर्ष समिति, जोशीमठ।
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इस बात का खुलासा उर्गम संघर्ष समिति के अध्यक्ष द्वारा सूचना अधिकार के तहत ली गई जानकारी में हुआ। अब शिक्षा विभाग ने उक्त चेक के कालातीत होने के कारण और संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई होने के पश्चात ही दोबारा धनराशि आवंटित किए जाने की बात कही है। लेकिन डेढ़ वर्ष से भी अधिक का समय व्यतीत होने के बावजूद अभी तक मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। अधिकारियों के इस उदासीन रवैये से जीआईसी उर्गम के छात्र-छात्राएं क्षतिग्रस्त विद्यालय भवन होने के कारण खुले आसमान के नीचे पठन-पाठन के लिए मजबूर हैं।
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क्या था मामला
जीआईसी उर्गम के भवन निर्माण के लिए जिला शिक्षाधिकारी चमोली ने 31 मार्च 2011 को परियोजना प्रबंधक उत्तराखंड पेयजल संसाधन विकास एवं निर्माण निगम गोपेश्वर को पहले चरण में एक लाख 77 हजार रुपये का चेक दिया, जिसे निर्माण निगम के अधिकारियों ने 28 अप्रैल को बैंक में जमा किया गया, तब तक चेक की अवधि जा चुकी थी। अब निर्माण निगम ने विभाग से दोबारा धन की मांग कर रहा है।
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निर्माण निगम के अधिकारियों की लेट लतीफ के चलते चेक कालातीत हुआ है। अब हम तभी दोबारा धन आहरण करेंगे, जब संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित हो। इसके बाद फिर धनराशि मांगने के लिए पत्रावलियां वित्त विभाग को भेजी जाएंगी।
-मनीषा पंवार, सचिव, शिक्षा, उत्तराखंड शासन
इस मामले में प्रबंधक अधिकारी, पेयजल निर्माण निगम श्रीनगर की टीम ने जांच की है। इसकी रिपोर्ट भी उच्च अधिकारियों को भेज दी गई है। शीघ्र ही दोषी अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग से पुन: धनराशि की मांग की गई है।
-जीपी सिंह, परियोजना प्रबंधक, पेयजल निर्माण, निगम, गोपेश्वर।
अधिकारियों के आश्वासन से ग्रामीण छले जा रहे हैं। उर्गम घाटी के ग्रामीण पिछले पांच सालों से जीआईसी उर्गम के भवन निर्माण की मांग उठाते आ रहे हैं। शीघ्र जिला मुख्यालय पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
-लक्ष्मण सिंह नेगी, अध्यक्ष, उर्गम घाटी संघर्ष समिति, जोशीमठ।