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..सड़क सुविधा से जुड़ेगा सिलपाटा क्षेत्र
Chamoli
Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
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कर्णप्रयाग। गैरसैंण विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्र सिलपाटा की सड़क सुविधा की मांग जल्द पूरी होने वाली है। वनाधिनियम के चलते अधर में लटकी सड़कों के निर्माण के लिए शासन स्तर से वन भूमि हस्तांतरण की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। गैरसैंण कैबिनेट में मुख्यमंत्री की इस घोषणा से लोगों में सड़क निर्माण को लेकर पुन: उम्मीदें जगी हैं।
गैरसैंण ब्लाक के सिलपाटा, प्यूंरा, पज्याणा, लंगटाई, छिमटा और डोल्टू ग्राम पंचायतों के हजारों लोग आज भी पांच से सात किमी दूरी पैदल नाप रहे हैं। वर्ष 1998 में सुगड़बैंड-सिलपाटा मोटर मार्ग की स्वीकृति भी मिली लेकिन उत्तराखंड राज्य निर्माण के 12 साल बाद भी यह मार्ग चार किमी से आगे नहीं बन पाया जबकि बकरियाबैंड-सिलपाटा मार्ग प्रस्तावित है। मोटर मार्गों के निर्माण की मांग को लेकर वर्ष 2008 में सिलपाटा विकास संघर्ष समिति का गठन करते हुए लोगों ने 2009 में लोकसभा मतदान का बहिष्कार भी किया लेकिन सड़क सुविधा फिर भी नसीब नहीं हुई। तीन नवंबर को गैरसैंण में कैबिनेट बैठक में सिलपाटा क्षेत्र के लिए स्वीकृत मार्गोँ के मध्य पड़ने वाली वन भूमि को हस्तांतरित किए जाने की घोषणा से क्षेत्रीय जनता में सड़क निर्माण को लेकर उम्मीदें बंधी हैं।
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गैरसैंण ब्लाक के सिलपाटा, प्यूंरा, पज्याणा, लंगटाई, छिमटा और डोल्टू ग्राम पंचायतों के हजारों लोग आज भी पांच से सात किमी दूरी पैदल नाप रहे हैं। वर्ष 1998 में सुगड़बैंड-सिलपाटा मोटर मार्ग की स्वीकृति भी मिली लेकिन उत्तराखंड राज्य निर्माण के 12 साल बाद भी यह मार्ग चार किमी से आगे नहीं बन पाया जबकि बकरियाबैंड-सिलपाटा मार्ग प्रस्तावित है। मोटर मार्गों के निर्माण की मांग को लेकर वर्ष 2008 में सिलपाटा विकास संघर्ष समिति का गठन करते हुए लोगों ने 2009 में लोकसभा मतदान का बहिष्कार भी किया लेकिन सड़क सुविधा फिर भी नसीब नहीं हुई। तीन नवंबर को गैरसैंण में कैबिनेट बैठक में सिलपाटा क्षेत्र के लिए स्वीकृत मार्गोँ के मध्य पड़ने वाली वन भूमि को हस्तांतरित किए जाने की घोषणा से क्षेत्रीय जनता में सड़क निर्माण को लेकर उम्मीदें बंधी हैं।
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