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Chamoli News: कांचुलाखर्क में हाईवे का 20 मीटर हिस्सा धंसा
Sun, 30 Jul 2023 05:02 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sun, 30 Jul 2023 05:02 PM IST
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फोटो
खतरे में हो रही आवाजाही, चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे भू-धंसाव से हुआ खतरनाक
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे कई जगहों पर भू-धंसाव और भूस्खलन होने से खतरनाक बना है। भू-धंसाव से हाईवे कांचुलाखर्क में करीब 20 मीटर धंस गया है। जबकि चाड़ा तोक में भी हाईवे जगह-जगह धंस गया है जिससे इन जगहों पर यात्रा वाहनों की आवाजाही खतरे के बीच हो रही है।
लोक निर्माण विभाग (एनएच) की ओर से छह माह पूर्व उक्त हाईवे पर डामरीकरण कार्य किया गया लेकिन डामर भी भू-धंसाव की भेंट चढ़ गया है। गंगोलगांव निवासी महेंद्र सिंह का कहना है कि हाईवे के संरक्षण में नई तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। यह हाईवे अधिकांश जगहों पर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के सेंचुरी एरिया से होते हुए गुजरता है। लिहाजा सेंचुरी एरिया में हाईवे पर निर्माण कार्य मजबूती से किया जाना चाहिए। चोपता से मंडल तक हाईवे घने जंगल के बीचोंबीच से होकर गुजरता है। यहां कोई यात्रा वाहन फंस गया तो यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यात्राकाल में पुलिस व वन कर्मियों की लगातार गश्त शुरू की जानी चाहिए।
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खतरे में हो रही आवाजाही, चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे भू-धंसाव से हुआ खतरनाक
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। चमोली-मंडल-ऊखीमठ हाईवे कई जगहों पर भू-धंसाव और भूस्खलन होने से खतरनाक बना है। भू-धंसाव से हाईवे कांचुलाखर्क में करीब 20 मीटर धंस गया है। जबकि चाड़ा तोक में भी हाईवे जगह-जगह धंस गया है जिससे इन जगहों पर यात्रा वाहनों की आवाजाही खतरे के बीच हो रही है।
लोक निर्माण विभाग (एनएच) की ओर से छह माह पूर्व उक्त हाईवे पर डामरीकरण कार्य किया गया लेकिन डामर भी भू-धंसाव की भेंट चढ़ गया है। गंगोलगांव निवासी महेंद्र सिंह का कहना है कि हाईवे के संरक्षण में नई तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। यह हाईवे अधिकांश जगहों पर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के सेंचुरी एरिया से होते हुए गुजरता है। लिहाजा सेंचुरी एरिया में हाईवे पर निर्माण कार्य मजबूती से किया जाना चाहिए। चोपता से मंडल तक हाईवे घने जंगल के बीचोंबीच से होकर गुजरता है। यहां कोई यात्रा वाहन फंस गया तो यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। यात्राकाल में पुलिस व वन कर्मियों की लगातार गश्त शुरू की जानी चाहिए।
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