फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   Worked hard and made agriculture a source of income

मेहनत की और खेती को बना लिया आय का जरिया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2020 11:06 PM IST
विज्ञापन
Worked hard and made agriculture a source of income
बागेश्वर के जारती गांव में पैदा की गई हल्दी। संवाद न्यूज एंजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। पलायन की मार झेल रहे सैनिक बहुल कपकोट के जारती गांव के दो नौजवान प्रेरणा बन गए हैं। चाचा-भतीजे की इस जोड़ी ने हल्दी की खेती से ही डेढ़ साल में दो लाख रुपये कमाकर जहां अपनी आर्थिकी सुधारी है वहीं वे अन्य युवाओं के लिए प्रेरक बन गए हैं।
विज्ञापन

दूरस्थ क्षेत्र में स्थित जारती गांव में 80 प्रतिशत लोग सेना में हैं। नौकरी के कारण गांव से पलायन हुआ और करीब 900 की आबादी 400 के भीतर सिमट गई। जंगली सुअर और बंदरों के आतंक से परेशान होकर ग्रामीण भी खेती से विमुख हो गए। ऐसे में गांव के भूपेंद्र सिंह मेहता और जितेंद्र मेहता (चाचा-भतीजा) ने चार वर्ष पहले अपनी 30 नाली कृषि भूमि पर हल्दी की खेती करने की ठानी। पहल वर्ष इन लोगों को आशातीत सफलता मिली तो इन्होंने हल्दी की खेती को रोजगार का जरिया बना लिया। पिछले डेढ़ वर्ष में इन्होंने हल्दी की खेती से ही दो लाख रुपये की कमाई की है।
विज्ञापन

उच्च शिक्षित हैं चाचा-भतीजा
भूपेंद्र सिंह मेहता एमएससी गणित पास हैं। वह बेड़ा मझेड़ा में एक निजी स्कूल में प्रधानाचार्य हैं और उनका भतीजे जितेंद्र मेहता ने एनिमेशन से बीएससी की पढ़ाई की है। जितेंद्र भी हल्द्वानी में नौकरी करते हैं। ये लोग कुछ समय हल्दी की खेती के लिए देते हैं। इस काम में भूपेंद्र सिंह मेहता की पत्नी भगवती मेहता (एमए इतिहास) और बहन मोहनी देवी खेतीबाड़ी में मदद करतीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

10 हजार के बीज से 2 लाख की हल्दी
भूपेंद्र बताते हैं कि 18 महीने पहले उन्होंने 30 नाली भूमि में दस हजार रुपये से पंथ पीताभ, स्वर्णा प्रजाति की 7 क्विंटल हल्दी लगाई थी। इससे करीब 40 क्विंटल हल्दी का उत्पादन हुआ है, जिसका बाजार मूल्य करीब दो लाख रुपये है। बताया कि अदरक से भी अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने सहयोग के लिए उद्यान विभाग कपकोट का आभार जताया। कहा कि विभाग ने समय समय पर प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध कराया।
मार्केटिंग की सुविधा न होने से निराशा
बागेश्वर। मार्केटिंग (विपणन) की सुविधा न होने से निराश भूपेंद्र और जितेंद्र कहते हैं कि वे कपकोट या बागेश्वर में हल्दी बेचते हैं। इस समय कच्ची हल्दी 45 रुपये किलो और सूखी करीब 80 रुपये किलो बिक रही है। उनका कहना कि यदि सरकार बाजार उपलब्ध करा दें तो आय कई गुना बढ़ सकती है।
---
शर्मा के खेतों में उगी हल्दी की गांठों का जवाब नहीं
अल्मोड़ा। ग्रामीण जहां खेती से विमुख हो रहे हैं। वहीं हवालबाग विकासखंड के तल्ला तिखून पट्टी के ढैली गांव निवासी पूर्णानंद शर्मा गांव में पिछले कई वर्षों से हल्दी, अदरक के साथ फलों के उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं।

आईटीआई स्याल्दे में मिनिस्टीरियल कर्मी शर्मा पिछले कई वर्षों से अवकाश के दिनों में ढैली गांव आकर पांच नाली भूमि में वह खेती और बागवानी करते आ रहे हैं। प्रतिवर्ष वह हल्दी, अदरक और जड़ी-बूटियों का उत्पादन करते हैं। उन्होंने आड़ूू माल्टा, नींबू, नाशपाती, तेजपात के पौधे भी लगाए हैं। उनके खेतों में सामान्य से कई गुना अधिक वजनी हल्दी उत्पादित होती है। पिछले वर्ष उनके खेत में 750 ग्राम की हल्दी की गांठ हुई थी। इस बार उन्होंने साढ़े चार क्विंटल हल्दी का उत्पादन किया। वह क्षेत्र में एक दर्जन ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराते हैं। शर्मा बताते हैं कि क्षेत्र में सुअरों और बंदर फसल को चौपट कर रहे हैं, जिससे उत्पादन गिर रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed