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Bageshwar News: याद आएगी 99 की वह जंग और बागेश्वर के तीन लालों की शहादत

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jul 2026 11:14 PM IST
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We will remember the battle of 1999 and the martyrdom of the three sons of Bageshwar.
बागेश्वर। भारतीय सेना के अदम्य पराक्रम और शौर्य के प्रतीक कारगिल विजय दिवस पर रविवार को पूरा जिला अपने अमर शहीदों को नमन करेगा। जिला सैनिक कल्याण विभाग की ओर से आयोजित होने वाले मुख्य कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक और नागरिक शहीद स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर जवानों को श्रद्धांजलि देंगे।
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वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय के दौरान जब द्रास, कारगिल और बटालिक की बर्फीली चोटियों पर देश के वीर जवान दुश्मनों से लोहा ले रहे थे, तब जिले के तीन जांबाज सपूतों ने भी मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। द्योनाई के पैरा रेजीमेंट के नायक राम सिंह बोरा ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए शहादत दी, जिन्हें मरणोपरांत मेंशन-इन-डिस्पैच से सम्मानित किया गया। रैखोली निवासी कुमाऊं रेजीमेंट के हवलदार हरि सिंह थापा और बीईजी के नायक कर्मी के मोहन सिंह मरणोपरांत सेना मेडल ने अपने शौर्य से जिले का नाम इतिहास के पन्नों में अमर कर दिया।
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....कोट
कारगिल विजय भारतीय सेना के अदम्य साहस, पराक्रम और अप्रतिम बलिदान का प्रतीक है। इस युद्ध में जिले के तीन सपूतों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया। ऐसे वीरों के शौर्य से ही आज हमारी सीमाएं और देश सुरक्षित हैं। हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम शहीदों के सपनों का आत्मनिर्भर और मजबूत भारत बनाएं तथा उनके परिजनों का सदैव सम्मान करें।
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.... लेफ्टिनेंट कर्नल सेवानिवृत्त वेदप्रकाश जोशी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, बागेश्वर


सड़क को तरस रहा कारगिल शहीद मोहन सिंह का गांव दोबाड़
बागेश्वर। कारगिल युद्ध में देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सेना मेडल विजेता अमर शहीद मोहन सिंह का गांव दोबाड़ आज भी सड़क सुविधा से अछूता है। आजादी और शहादत के दशकों बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सड़क न होने से गांव में बीमारों और गर्भवतियों को आज भी पांच किलोमीटर डोली में बिठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
मूलभूत सुविधाओं और सड़क के अभाव में गांव से पलायन इस कदर बढ़ा कि करीब 100 परिवार गांव छोड़ चुके हैं। छात्र संख्या शून्य होने के कारण गांव का एकमात्र जूनियर हाईस्कूल भी वर्षों पहले बंद हो चुका है। खुद शहीद का परिवार भी हल्द्वानी में बस चुका है।


....कोट
दोबाड़ गांव के लिए सड़क स्वीकृत है और बजट की भी कोई कमी नहीं है। वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में क्षतिपूरक वृक्षारोपण के लिए जिले में सरकारी भूमि उपलब्ध नहीं हो पा रही है। अब पड़ोसी जिले पिथौरागढ़ में सीए लैंड ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जल्द से जल्द वन भूमि की एनओसी मिल सके और सड़क निर्माण शुरू कराया जा सके।

..........सुरेश गढि़या, विधायक, कपकोट
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