फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Bageshwar News ›   travelling 5km for a medicine

दवा की एक गोली के लिए पांच किमी की दौड़

Thu, 16 Nov 2017 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। Updated Thu, 16 Nov 2017 10:24 PM IST
विज्ञापन
travelling 5km for a medicine
टकनारभैंसूड़ी का दृश्य - फोटो : अमर उजाला
टकनार-भैंसूड़ी के ग्रामीणों ने रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे के साथ 2011-12 में हुए विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था, लेकिन सरकारों पर इसका जरा भी असर नहीं हुआ। गांव में बच्चों के लिए जूनियर से आगे की पढ़ाई का कोई इंतजाम नहीं है। दवा की एक गोली के लिए ग्रामीणों को पांच से सात किमी की दौड़ लगानी पड़ती है। सुदूरवर्ती अन्य गांवों की तरह ही इस गांव के लोगों ने भी गांव में आज तक न तो सांसद देखा और न ही डीएम।
विज्ञापन


बुनियादी सुविधाएं और रोजगार के संकट के कारण गांव के कई घरों में ताले लटके हैं। ग्रामीण कहते हैं राजनेताओं से अब तक मिले विकास के वायदे कोरे  साबित हुए हैं।पल्ला कमस्यार क्षेत्र के सुदूरवर्ती गांव टकनार-भैंसूड़ी की जनसंख्या पांच सौ से अधिक है। गांव आज तक सड़क से नहीं जुड़ सका है। इसके लिए ग्रामीणों ने 2011-12 में हुए विधानसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था।
विज्ञापन


बावजूद राजनेताओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। ग्रामीण जिला मुख्यालय आने के लिए पांच से सात किमी की पैदल दूरी तय करके दुदिला से वाहन पकड़ते हैं। गांव में स्वास्थ्य सेवाएं भी चौपट हैं। इसके लिए ग्रामीणों को सात किमी दूर कमेड़ीदेवी जाना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में प्रसव पीड़िताओं की समस्या दोगुनी हो जाती है। गांव में पैदल चलने के लिए भी ढंग की पगडंडियां नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


लछम राम का कहना है कि नेताओं के तमाम आश्वासन के बाद गांव को यातायात से वंचित रखा गया है। सड़क नहीं होने से गांव का विकास भी चौपट है। नेता आते हैं लेकिन वोट के अलावा दूसरी बात नहीं करते।
लछम राम
किड़ुली देवी कहती हैं गांव में अस्पताल के नाम एएनएम सेंटर तक नहीं है। सात किमी उबड़-खाबड़ रास्ते से कमेड़ीदेवी जाना प्रसव पीड़िताओं के लिए किसी बड़ी परेशानी से कम नहीं है।
किड़ुली देवी

चनुली देवी का कहना है कि सड़क नहीं होने से नमक जैसी वस्तु के लिए छह किमी दूर कोटमन्या जाना पड़ता है। गांव में रोजगार के कोई साधन नहीं होने के कारण कई लोग पलायन करके बेड़ीनाग, हल्द्वानी और दिल्ली चले गए हैं।

चनुली देवी

राज मिस्त्री धन राम कहते हैं कि सड़क नहीं होने से लोग इस गांव की बेटियों से विवाह करना नहीं चाहते। संपन्न लोग तो दूरस्थ क्षेत्रों में जाकर बैंकट हॉल बुक करा लेते हैं, लेकिन गरीबों को तो मुसीबत ही झेलनी पड़ती है। पहले लोग गांव में रहते थे, घर बनाने के काम से उन्हें रोजगार मिलता था। अब पलायन से यह भी चौपट हो गया है।
धन राम

टकनार गांव का भ्रमण कर समस्याओं का आकलन किया जाएगा। सड़क समेत अन्य समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करने के प्रयास होंगे।
बलवंत भौर्याल,विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed