{"_id":"5c967370bdec22141d19e459","slug":"trap-of-forest-law-trapped-in-road-construction","type":"story","status":"publish","title_hn":"गापानी सड़क निर्माण में फंसा वन अधिनियम का पेच","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गापानी सड़क निर्माण में फंसा वन अधिनियम का पेच
Sat, 23 Mar 2019 11:27 PM IST
Almora desk
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
Published by: Almora desk
Updated Sat, 23 Mar 2019 11:27 PM IST
विज्ञापन
ागेश्वर के गापानी में सड़क के अभाव में खतरनाक पैदल रास्तों से गुजरते ग्रामीण।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अनगढ़ी से गापानी तक आठ किमी सड़क निर्माण में वन अधिनियम का पेच फंस गया है। पूर्व में भेजा गया प्रस्ताव नोडल एजेंसी ने खारिज कर दिया है। अब नए सिरे से प्रस्ताव बनाकर भेजने की कवायद चल रही है।
ग्राम गापानी को सड़क से जोड़े जाने की मांग को लेकर ग्रामीण बीते कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। सड़क निर्माण की मांग करते- करते थक चुके ग्रामीणों ने अब लोक सभा चुनावों के बहिष्कार का एलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों से मांग करने के बाद भी गापानी गांव को यातायात सुविधा से नहीं जोड़ा गया। आलम यह है कि गापानी जाने के लिए पैदल रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ग्रामीण जंगल के खतरनाक रास्ते से गांव पहुंचते हैं। स्कूली बच्चे व महिलाएं भी इन्हीं जोखिम भरे रास्तों जाने का मजबूर हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी
गापानी गांव में सड़क नहीं होने से बीमार मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में सर्वाधिक परेशानी होती है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में अचानक बीमार होने पर डोली से उठाकर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। तत्काल इलाज न मिलने पर कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। गर्भवती महिलाओं को तत्काल इलाज नहीं मिल पाता है। ब्यूरो
विज्ञापन
= कोट
गापानी सड़क निर्माण के लिए वन अधिनियम का प्रस्ताव नोडल एजेंसी भारत सरकार को भेजा गया था। प्रस्तावित मार्ग पर पेड़ों की संख्या अधिक होने के कारण प्रस्ताव नामंजूर हो गया है। अब नए सिरे से प्रस्ताव भेजा जा रहा है। वन अधिनियम से क्लीयर होने के बाद ही गापानी के लिए सड़क निर्माण कार्य शुरू होगा।
- संजय पांडे, ईई लोनिवि कपकोट
कोट
अनगढ़ी से गापानी तक आठ किमी सड़क स्वीकृत है। वन अधिनियम से क्लीयर नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। वन अधिनियम से मंजूरी के बाद सड़क निर्माण शुरू होगा।
- बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट
विज्ञापन
ग्राम गापानी को सड़क से जोड़े जाने की मांग को लेकर ग्रामीण बीते कई सालों से संघर्ष कर रहे हैं। सड़क निर्माण की मांग करते- करते थक चुके ग्रामीणों ने अब लोक सभा चुनावों के बहिष्कार का एलान किया है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन प्रशासन सहित जनप्रतिनिधियों से मांग करने के बाद भी गापानी गांव को यातायात सुविधा से नहीं जोड़ा गया। आलम यह है कि गापानी जाने के लिए पैदल रास्ते भी सुरक्षित नहीं हैं। ग्रामीण जंगल के खतरनाक रास्ते से गांव पहुंचते हैं। स्कूली बच्चे व महिलाएं भी इन्हीं जोखिम भरे रास्तों जाने का मजबूर हैं।
विज्ञापन
गर्भवती महिलाओं के लिए परेशानी
गापानी गांव में सड़क नहीं होने से बीमार मरीजों व गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में सर्वाधिक परेशानी होती है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में अचानक बीमार होने पर डोली से उठाकर जिला अस्पताल ले जाना पड़ता है। तत्काल इलाज न मिलने पर कई मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। गर्भवती महिलाओं को तत्काल इलाज नहीं मिल पाता है। ब्यूरो
विज्ञापन
= कोट
गापानी सड़क निर्माण के लिए वन अधिनियम का प्रस्ताव नोडल एजेंसी भारत सरकार को भेजा गया था। प्रस्तावित मार्ग पर पेड़ों की संख्या अधिक होने के कारण प्रस्ताव नामंजूर हो गया है। अब नए सिरे से प्रस्ताव भेजा जा रहा है। वन अधिनियम से क्लीयर होने के बाद ही गापानी के लिए सड़क निर्माण कार्य शुरू होगा।
- संजय पांडे, ईई लोनिवि कपकोट
कोट
अनगढ़ी से गापानी तक आठ किमी सड़क स्वीकृत है। वन अधिनियम से क्लीयर नहीं होने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। वन अधिनियम से मंजूरी के बाद सड़क निर्माण शुरू होगा।
- बलवंत सिंह भौर्याल, विधायक कपकोट