{"_id":"6706cbfebd705947c3079a6b","slug":"tour-guide-dinesh-danu-crossed-trail-pass-fourth-time-bageshwar-news-c-231-1-shld1005-110305-2024-10-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: टूर गाइड दिनेश दानू ने चौथी बार पार किया ट्रेल दर्रा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: टूर गाइड दिनेश दानू ने चौथी बार पार किया ट्रेल दर्रा
Thu, 10 Oct 2024 12:01 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Thu, 10 Oct 2024 12:01 AM IST
विज्ञापन
बागेश्वर। जांतोली गांव के टूर गाइड दिनेश सिंह दानू ने प्रसिद्ध ट्रेल पास (दर्रा) को चौथी बार सफलता पूर्वक पार किया है। दिल्ली, यूपी और उत्तराखंड के छह ट्रैकरों को लेकर उन्होंने अपनी टीम के साथ खाती से मुनस्यारी तक का ट्रैक सफलतापूर्वक पार किया। इससे पूर्व भी वह तीन बार ट्रैकरों के दल को सफलता पूर्वक ट्रेल पास से पार करा चुके हैं।
टूर गाइड दानू ने बताया कि 22 सितंबर 2024 को खाती से उनका दल ट्रैक पर रवाना हुआ। दल में दिल्ली के चार, यूपी और देहरादून के एक-एक ट्रैकर और स्टाफ के नौ सदस्य शामिल थे। पहले दिन दल खाती से द्वाली तक पहुंचा। दूसरे दिन द्वाली से बेस कैंप तक की यात्रा की।
तीसरे दिन बेस कैंप से एडवांस बैस कैंप की लौटाफेरी की। चौथे दिन कैंप शिफ्ट किया। पांचवें दिन कैंप वन की लौटाफेरी की। छठे दिन कैंप वन तक पहुंचे। सातवें दिन 200 मीटर की रॉक वाॅल के कठिन हिस्से को पार किया। आठवें दिन पांच किमी का आइस फील्ड पार करने के बाद कैंप दो में पहुंचे।
विज्ञापन
नौवे दिन ट्रेल पास तक रोप लगाने का काम किया। 10वें दिन नंदादेवी बेस कैंप पहुंचे। 11वें दिन पाटा कैंप पहुंचे और अंतिम दिन मर्तोली-रेलकोट, बोगडियार होते हुए मुनस्यारी में यात्रा पूरी हुई।
पांच प्रयास में मात्र एक हुआ है विफल
बागेश्वर। गाइड दिनेश दानू अब तक ट्रेल दर्रे को पार करने के पांच प्रयास कर चुके हैं। वर्ष 2019 में सऊदी अरब में रहने वाले अप्रवासी को वह पहली बार ट्रेल दर्रे तक ले गए। वर्ष 2020 और 2022 में बंगाली ट्रैकरों के दल को सकुशल ट्रेल दर्रा पार कराया। वर्ष 2023 में भी वह ट्रेल दर्रे से ट्रैकरों के दल को ले जाने वाले थे, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण आधे रास्ते में ही अभियान रोकना पड़ा था।
आसान नहीं है डगर, अतिरिक्त सावधानी जरूरी
बागेश्वर। दिनेश बताते हैं कि ट्रैकिंग रोमांच से भरपूर है, लेकिन आसान कार्य नहीं है। पहाड़ और बर्फ पर चलने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी जरूरी है। ग्लेशियर में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। टूर गाइड को ट्रैकरों के साथ-साथ अपने दल और खुद की भी परवाह करनी पड़ती है। मौसम का भी अनुकूल होना जरूरी है। मौसम बिगड़ते ही हालात विपरीत होते देर नहीं लगती। ऐसे में धैर्य, हिम्मत से काम लेना और भाग्य का साथ मिलने पर ही सुरक्षित रहा जा सकता है।
विज्ञापन
टूर गाइड दानू ने बताया कि 22 सितंबर 2024 को खाती से उनका दल ट्रैक पर रवाना हुआ। दल में दिल्ली के चार, यूपी और देहरादून के एक-एक ट्रैकर और स्टाफ के नौ सदस्य शामिल थे। पहले दिन दल खाती से द्वाली तक पहुंचा। दूसरे दिन द्वाली से बेस कैंप तक की यात्रा की।
विज्ञापन
तीसरे दिन बेस कैंप से एडवांस बैस कैंप की लौटाफेरी की। चौथे दिन कैंप शिफ्ट किया। पांचवें दिन कैंप वन की लौटाफेरी की। छठे दिन कैंप वन तक पहुंचे। सातवें दिन 200 मीटर की रॉक वाॅल के कठिन हिस्से को पार किया। आठवें दिन पांच किमी का आइस फील्ड पार करने के बाद कैंप दो में पहुंचे।
विज्ञापन
नौवे दिन ट्रेल पास तक रोप लगाने का काम किया। 10वें दिन नंदादेवी बेस कैंप पहुंचे। 11वें दिन पाटा कैंप पहुंचे और अंतिम दिन मर्तोली-रेलकोट, बोगडियार होते हुए मुनस्यारी में यात्रा पूरी हुई।
पांच प्रयास में मात्र एक हुआ है विफल
बागेश्वर। गाइड दिनेश दानू अब तक ट्रेल दर्रे को पार करने के पांच प्रयास कर चुके हैं। वर्ष 2019 में सऊदी अरब में रहने वाले अप्रवासी को वह पहली बार ट्रेल दर्रे तक ले गए। वर्ष 2020 और 2022 में बंगाली ट्रैकरों के दल को सकुशल ट्रेल दर्रा पार कराया। वर्ष 2023 में भी वह ट्रेल दर्रे से ट्रैकरों के दल को ले जाने वाले थे, लेकिन भारी बर्फबारी के कारण आधे रास्ते में ही अभियान रोकना पड़ा था।
आसान नहीं है डगर, अतिरिक्त सावधानी जरूरी
बागेश्वर। दिनेश बताते हैं कि ट्रैकिंग रोमांच से भरपूर है, लेकिन आसान कार्य नहीं है। पहाड़ और बर्फ पर चलने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी जरूरी है। ग्लेशियर में लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं रहती है। टूर गाइड को ट्रैकरों के साथ-साथ अपने दल और खुद की भी परवाह करनी पड़ती है। मौसम का भी अनुकूल होना जरूरी है। मौसम बिगड़ते ही हालात विपरीत होते देर नहीं लगती। ऐसे में धैर्य, हिम्मत से काम लेना और भाग्य का साथ मिलने पर ही सुरक्षित रहा जा सकता है।