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बरसात में सहमी-सहमी सी रहती है जिंदगी
गणेश उपाध्याय, अमर उजाला, बागेश्वर।
Updated Tue, 28 Jun 2016 10:24 PM IST
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भूस्खलन
- फोटो : अमर उजाला
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भूकंप की दृष्टि से जहां यह जिला जोन पांच में आता है तो वहीं यह बाढ़ और भूस्खलन की दृष्टि से अति संवेदनशील श्रेणी में है। वर्षाकाल आते ही प्रभावित क्षेत्रों में लोगों का सुख-चैन छिन जाता है। कई गांवों में सुरक्षा के नाम पर आज तक एक पत्थर भी नहीं लग सका है। कई गांवों के ऊपर की पहाड़ियां दरक रहीं हैं तो नीचे के हिस्से में बह रही नदियां उनकी जड़ों को खोखली कर रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील गांवों का वर्षों से विस्थापन भी नहीं हो सका है।
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बरसात में बाढ़ और भूस्खलन से बागेश्वर, कपकोट और गरुड़ ब्लाक के कई गांवों में हर साल तबाही मच जाती है। इस आपदा से जानमाल की क्षति होने के साथ ही भारी मात्रा में उपजाऊ भूमि कटकर नदियों और गधेेरों की भेंट चढ़ जाती है। शासन ने दैवी आपदा प्रबंधन मद से नगर के मंडलसेरा और मेहनरबूंगा, कपकोट में बह रही सरयू के दोनों छोरों के कुछ कुछ हिस्सों के अलावा रेवती नदी के किनारे बसे बड़ेत और हरसिंग्याबगड़ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सुरक्षा दीवार बना रखी हैं। लोग इस तरह की सुरक्षा दीवार और चेकडैम अन्य क्षेत्रों में भी बनाने की मांग करते आ रहे हैं।
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1983 में कर्मी गांव में आई आपदा से वहां 37 लोगों की जान चली गई थी। वहां सुरक्षा के नाम पर एक नाले के निर्माण के अलावा कुछ नहीं किया गया है। 1996 में कन्यालीकोट के स्यालढुंगा में बादल फटने से तीन लोगों की जान चली गई थी। वहां भी सिर्फ एक नाला भर ही बनाया गया है। 2010 में आई आपदा से शिशु मंदिर सुमगढ़ के 18 बच्चे जिंदा दफन हो गए थे।
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गांव में भारी तबाही मची है थी, लेकिन खेतों में भरा मलबा आज तक नहीं हटाया गया है और न ही क्षतिग्रस्त पैदल पुलों का निर्माण ही किया गया है। रेवती नदी में क्षतिग्रस्त दो पुलों का पुनर्निर्माण छह साल बाद भी नहीं किया गया है। उधर बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने रमाड़ी गांव को छलनी कर दिया है। गांव के ऊपर से भूस्खलन हो रहा है तो नीचे के हिस्से को रामगंगा की तेज धारा काट रही है। यही हाल सुडिंग गांव का भी है।
बाढ़ और भूस्खलन से लीती, भनार, मल्खाडुंगर्चा, किलपारा, नरगड़ा समेत कई गांवों में लंबी चौड़ी दरारें पड़ी हैं। उधर कांडा और दुग नाकुुरी तरहसील क्षेत्र के गांवों को इसके नजदीक में बह रही क्रमश: कुलूर और पुगंरनदी बरसात में अपनी ॅलहरों से काफी नुकसान पहुंचाती आ रही हैं, लेकिन वहां सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं किया जा सका है। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं होने के कारण प्रभावित भयभीत हैं।
कौन कौन क्षेत्र हैं अतिसंवेदनशील
पुुुंगरघाटी, मल्ला, विचल्ला दानपुर, सरयूघाटी, रेवती घाटी, महरगाड़ घाटी, रामगंगा, कनलगढ़, लाहुर, कुलूूरघाटी, खीरगंगा घाटी के कई गांव बाढ़ और भूस्खलन की दृष्टि से अतिसंवेदनशील श्रेणी में हैं।