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Bageshwar News: कछुआ चढ़ा पहाड़, 900 मीटर ऊंचाई तक पहुंचा दरिया का मेहमान
Fri, 03 Apr 2026 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 03 Apr 2026 11:21 PM IST
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बागेश्वर। दरिया किनारे और मैदानी दलदली इलाकों में रहने वाला सॉफ्टशेल प्रजाति का कछुआ हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंच गया है। बागेश्वर के भनारतोली गांव में पहली बार करीब 900 मीटर की ऊंचाई पर इसकी माैजूदगी से लोगों में उत्सुकता के साथ हैरानी भी है। वैज्ञानिक इसे बदलती आबोहवा और क्षेत्र की जैव विविधता के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में कछुआ दिखना सामान्य घटना नहीं है। सॉफ्टशेल कछुआ संरक्षित प्रजाति में शामिल है। यह जलचर सामान्यतः समुद्र तल से 400 से 600 मीटर की ऊंचाई तक मिलता है। कुछ मामलों में 700 मीटर तक भी इनकी माैजूदगी दर्ज की गई है। अब काफलीगैर तहसील क्षेत्र के भनारतोली के एक गधेरे में लगभग 900 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में इसका मिलना दुर्लभ घटना है।
सॉफ्टशेल कछुए की खास बातें
यह कछुआ आमतौर पर तराई क्षेत्र की दलदली भूमि, धीमी बहाव वाली नदियों, झीलों और तालाबों में पाया जाता है। मुलायम और चमड़े जैसे खोल के कारण इसे सॉफ्टशेल कहा जाता है। लंबा सिर और नली जैसी नाक वाला यह जलचर दुर्लभ जीव है। ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में सॉफ्टशेल कछुए का मिलना असामान्य माना जाता है।
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ऐसे हुई पहचान
भनारतोली के ग्रामीण मोहन चंद्र जोशी ने बृहस्पतिवार को गांव के गधेरे में इस कछुए को देखा। उन्होंने इसकी सूचना अपने पुत्र पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हेम चंद्र जोशी, होमगार्ड हेम जोशी और प्रकाश जोशी के माध्यम से वन विभाग को दी। वन दरोगा शमसेर सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की और कछुए काे सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे जिला मुख्यालय ले जाकर नियमानुसार प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
कोट
बागेश्वर में सॉफ्टशेल कछुए का दिखना वहां की जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत हो सकता है। जिस तरह से मैदानी क्षेत्र के जीव जिले में दिख रहे हैं उससे क्षेत्रीय वातावरण को लेकर गहन शोध करने की जरूरत है।
डाॅ. विपुल मौर्या, वैज्ञानिक/शोधकर्ता, भारतीय वन्य जीव अनुसंधान संस्थान देहरादून
कोट
सॉफ्टशेल प्रजाति के कछुए गंगा नदी के दलदली क्षेत्र में मिलते हैं। जिले में इसका दिखना सामान्य घटना नहीं है। यह गांव के गधेरे तक कैसे आया, इसकी पड़ताल की जाएगी। बागेश्वर में अन्य स्थानों पर भी कछुओं की मौजूदगी होने के प्रमाण भी जुटाए जाएंगे।
आदित्य रत्न, डीएफओ, बागेश्वर
विशेषज्ञों के मुताबिक पहाड़ों में कछुआ दिखना सामान्य घटना नहीं है। सॉफ्टशेल कछुआ संरक्षित प्रजाति में शामिल है। यह जलचर सामान्यतः समुद्र तल से 400 से 600 मीटर की ऊंचाई तक मिलता है। कुछ मामलों में 700 मीटर तक भी इनकी माैजूदगी दर्ज की गई है। अब काफलीगैर तहसील क्षेत्र के भनारतोली के एक गधेरे में लगभग 900 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्र में इसका मिलना दुर्लभ घटना है।
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सॉफ्टशेल कछुए की खास बातें
यह कछुआ आमतौर पर तराई क्षेत्र की दलदली भूमि, धीमी बहाव वाली नदियों, झीलों और तालाबों में पाया जाता है। मुलायम और चमड़े जैसे खोल के कारण इसे सॉफ्टशेल कहा जाता है। लंबा सिर और नली जैसी नाक वाला यह जलचर दुर्लभ जीव है। ठंडे पहाड़ी क्षेत्रों में सॉफ्टशेल कछुए का मिलना असामान्य माना जाता है।
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ऐसे हुई पहचान
भनारतोली के ग्रामीण मोहन चंद्र जोशी ने बृहस्पतिवार को गांव के गधेरे में इस कछुए को देखा। उन्होंने इसकी सूचना अपने पुत्र पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य हेम चंद्र जोशी, होमगार्ड हेम जोशी और प्रकाश जोशी के माध्यम से वन विभाग को दी। वन दरोगा शमसेर सिंह ने मौके पर पहुंचकर जांच की और कछुए काे सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे जिला मुख्यालय ले जाकर नियमानुसार प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
कोट
बागेश्वर में सॉफ्टशेल कछुए का दिखना वहां की जैव विविधता के लिए अच्छा संकेत हो सकता है। जिस तरह से मैदानी क्षेत्र के जीव जिले में दिख रहे हैं उससे क्षेत्रीय वातावरण को लेकर गहन शोध करने की जरूरत है।
डाॅ. विपुल मौर्या, वैज्ञानिक/शोधकर्ता, भारतीय वन्य जीव अनुसंधान संस्थान देहरादून
कोट
सॉफ्टशेल प्रजाति के कछुए गंगा नदी के दलदली क्षेत्र में मिलते हैं। जिले में इसका दिखना सामान्य घटना नहीं है। यह गांव के गधेरे तक कैसे आया, इसकी पड़ताल की जाएगी। बागेश्वर में अन्य स्थानों पर भी कछुओं की मौजूदगी होने के प्रमाण भी जुटाए जाएंगे।
आदित्य रत्न, डीएफओ, बागेश्वर