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सड़क नहीं बनने से नाराज लोगों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दी
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Thu, 12 Jan 2017 10:31 PM IST
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प्रदर्शन करते ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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पालड़ीछीना-कनगाड़छीना मोटर मार्ग का मिलान कर सड़क का नाम शहीद कुंदन सिंह बिष्ट के नाम पर रखने की मांग को लेकर करासमाफी के ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। इस मौके पर ग्रामीणों ने सड़क निर्माण को लेकर शीघ्र उचित कार्रवाई नहीं होने पर विधान सभा चुनावों का बहिष्कार करने की चेतावनी दी। ग्रामीणों ने कहा कि सड़क नहीं बनने से क्षेत्र के एक हजार से अधिक लोग पलायन कर चुके हैं।
करासमाफी, जैनकरास, डालखोलिया, हरखोला, बगनीगाड़ आदि क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने कहा कि दुबगड़ा से हरखोला, डालखोलिया से जैनकरास मार्ग के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। सड़क नहीं बनने से हजारों की आबादी को 12 किलोमीटर से अधिक की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि इस क्षेत्र के सैकड़ों जवान सेना में कार्यरत हैं। परंतु देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के गृह क्षेत्र की इस तरह उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है। बीमार होने पर मरीजों को डोली में बिठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सुविधाओं के अभाव में एक हजार लोग गांवों से पलायन कर चुके हैं।
जो परिवार रह रहे हैं वह परिवार जंगली जानवरों की समस्या से जूझ रहे हैं। खेती को बचाने के लिए सरकारों ने कोई प्रबंध नहीं किए। हर बार चुनावों में उनसे झूठे वायदे किए जाते हैं, लेकिन उसके बाद भुला दिया जाता है। यदि क्षेत्र के लिए सड़क का निर्माण नहीं किया जाता है तो क्षेत्र के लोग 15 फरवरी को होने वाले चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। बाद में ग्रामीणों ने एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
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करासमाफी, जैनकरास, डालखोलिया, हरखोला, बगनीगाड़ आदि क्षेत्रों से आए ग्रामीणों ने कहा कि दुबगड़ा से हरखोला, डालखोलिया से जैनकरास मार्ग के निर्माण के लिए धनराशि स्वीकृत नहीं हुई है। सड़क नहीं बनने से हजारों की आबादी को 12 किलोमीटर से अधिक की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीणों ने कहा कि इस क्षेत्र के सैकड़ों जवान सेना में कार्यरत हैं। परंतु देश की सुरक्षा में तैनात जवानों के गृह क्षेत्र की इस तरह उपेक्षा की जा रही है। ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में शिक्षा और चिकित्सा की कोई व्यवस्था नहीं है। बीमार होने पर मरीजों को डोली में बिठाकर सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। सुविधाओं के अभाव में एक हजार लोग गांवों से पलायन कर चुके हैं।
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जो परिवार रह रहे हैं वह परिवार जंगली जानवरों की समस्या से जूझ रहे हैं। खेती को बचाने के लिए सरकारों ने कोई प्रबंध नहीं किए। हर बार चुनावों में उनसे झूठे वायदे किए जाते हैं, लेकिन उसके बाद भुला दिया जाता है। यदि क्षेत्र के लिए सड़क का निर्माण नहीं किया जाता है तो क्षेत्र के लोग 15 फरवरी को होने वाले चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। बाद में ग्रामीणों ने एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
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