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Bageshwar News: हुड़के की थाप और पौराणिक गाथाओं के साथ शुरू हुई रोपाई

Wed, 25 Jun 2025 12:10 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Wed, 25 Jun 2025 12:10 AM IST
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The plantation started with the beats of the drum and mythological tales
कपकोट गांव में धान की रोपाई लगाती महिलाएं और हुड़क्या बौल लगाते महेश राम। स्रोत- महिमन कपकोटी
कपकोट (बागेश्वर)। मानसूनी बारिश होते ही कपकोट क्षेत्र में धान की रोपाई शुरू हो गई है। खेतों में महिलाएं सामूहिक रूप धान की पौध रोपने में जुट गई हैं। उमस भरी गर्मी के बीच उनकी थकान को कम करने की जिम्मेदारी दोनों आंखों से दृष्टिबाधित महेश राम संभाल रहे हैं। हुड़के की थाप के साथ पौराणिक गाथाओं को गाते हुए वह हमारी सांस्कृतिक विरासत को भी सहेजने में जुटे हैं। हुड़किया बौल गायन की वह विधा है, जिसमें पारंपरिक गाथाओं को लयबद्ध करते हुए हुड़के की थाप पर प्रस्तुत किया जाता है। इस विधा में मुख्यत: पुराने राजाओं की वीरगाथाएं, राजुला-मालूशाही और ऐतिहासिक प्रसंगों का वर्णन होता है। कपकोट गांव के दिव्यांग महेश को इस विधा में महारत हासिल है। कपकोट गांव की कमला देवी, दीपा देवी, दया देवी, प्रेमा देवी, सीता देवी, देवकी देवी बताती हैं कि हुड़किया बौल के साथ रोपाई करने से थकान महसूस नहीं होती है। पौराणिक गाथाओं को सुनते-सुनते काम कब खत्म हो गया, इसका पता नहीं चलता। महेश की आवाज और हुड़के की थाप के बीच काम में अधिक ध्यान लगता है।
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