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Bageshwar News: कौसानी की प्राकृतिक खूबसूरती और मनमोहक नजारों से अभिभूत दिखे छायाकार
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कौसानी (बागेश्वर)। कौसानी में आयोजित एडवांस फोटोग्राफी कार्यशाला में देशभर के 26 छायाकार भागीदारी कर रहे हैं। महानगरों की भागदौड़ और चकाचौंध भरी जिंदगी से दूर पर्यटन नगरी के शांत इलाके में आकर छायाकार अभिभूत हैं। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती और मनमोहक नजारों को छायाकार कैमरों में कैद करने के साथ-साथ पहाड़ों की जीवन शैली को भी करीब से जान रहे हैं। आयोजक थ्रीश कपूर ने बताया कि कार्यशाला के माध्यम से क्षेत्र के पर्यटन को बढ़ाने और अधिकाधिक सैलानियों को आकर्षित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कोट
कार्यशाला में आकर काफी अच्छा अनुभव मिला। सभी मेंटोर ने खूब अच्छे से सिखाया। कौसानी की सुंदरता को कैमरे में कैद करने के साथ-साथ यहां के वातावरण और संस्कृति को समझने का मौका मिला। भविष्य में भी यहां जरूर आना चाहूंगा। -निर्मल जैन, छायाकार, इंदौर
कोट
कार्यशाला में आकर फोटोग्राफी में समय के साथ हो रहे बदलाव को सीखने का मौका मिला। वरिष्ठ छायाकारों के सानिध्य में प्रकृति के बीच रहना काफी सुखद पल है। हिमालय और चांद-तारों को करीब से देखना और कैमरे में कैद करने का अनुभव काफी अच्छा रहा। -अजय मेहरा, छायाकार, गुड़गांव
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कोट
मुझे कौसानी से काफी प्यार है। हर साल यहां होने वाली कार्यशाला में आकर लोगाें को एस्ट्रो और लैंडस्केप फोटोग्राफी के गुर सिखाने का मौका मिलता है। आगे भी इस तरह के आयोजनों में बार-बार कौसानी आना चाहूंगा। -उमेश गोगना, छायाकार, जयपुर
कोट
फोटोग्राफी मेरे लिए नया क्षेत्र है। कार्यशाला में छायांकन की बेसिक प्रक्रियाओं को सीखने का मौका मिला। ग्रामीण परिवेश और रहन-सहन को करीब से देखना भी यादगार अनुभव है। -मोनिला दास गुप्ता, छायाकार, कोलकाता
कोट
कार्यशाला में पांचवीं बार भागीदारी करने का मौका मिला है। कौसानी में आकर कार्यशाला में भाग लेना मुझे घर आने के समान लगता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता भी बार-बार आने का आमंत्रण देती है। -निरंजना मुखर्जी, छायाकार, गुरुग्राम
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कार्यशाला में आकर काफी अच्छा अनुभव मिला। सभी मेंटोर ने खूब अच्छे से सिखाया। कौसानी की सुंदरता को कैमरे में कैद करने के साथ-साथ यहां के वातावरण और संस्कृति को समझने का मौका मिला। भविष्य में भी यहां जरूर आना चाहूंगा। -निर्मल जैन, छायाकार, इंदौर
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कार्यशाला में आकर फोटोग्राफी में समय के साथ हो रहे बदलाव को सीखने का मौका मिला। वरिष्ठ छायाकारों के सानिध्य में प्रकृति के बीच रहना काफी सुखद पल है। हिमालय और चांद-तारों को करीब से देखना और कैमरे में कैद करने का अनुभव काफी अच्छा रहा। -अजय मेहरा, छायाकार, गुड़गांव
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मुझे कौसानी से काफी प्यार है। हर साल यहां होने वाली कार्यशाला में आकर लोगाें को एस्ट्रो और लैंडस्केप फोटोग्राफी के गुर सिखाने का मौका मिलता है। आगे भी इस तरह के आयोजनों में बार-बार कौसानी आना चाहूंगा। -उमेश गोगना, छायाकार, जयपुर
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फोटोग्राफी मेरे लिए नया क्षेत्र है। कार्यशाला में छायांकन की बेसिक प्रक्रियाओं को सीखने का मौका मिला। ग्रामीण परिवेश और रहन-सहन को करीब से देखना भी यादगार अनुभव है। -मोनिला दास गुप्ता, छायाकार, कोलकाता
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कार्यशाला में पांचवीं बार भागीदारी करने का मौका मिला है। कौसानी में आकर कार्यशाला में भाग लेना मुझे घर आने के समान लगता है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता भी बार-बार आने का आमंत्रण देती है। -निरंजना मुखर्जी, छायाकार, गुरुग्राम