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निर्माणाधीन सड़क के मलबे से मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाला पैदल पुल ध्वस्त
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बागेश्वर। पतियासार से झूनी खलझूनी के लिए बन रही सड़क के मलबे से मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाला पैदल पुल ध्वस्त हो गया। इसकी वजह से क्षेत्र की 500 की आबादी का शेष दुनिया से संपर्क कट गया है। मलबे से पुल ध्वस्त होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने कलक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया और एडीएम को ज्ञापन सौंपकर प्रकरण की जांच कराने के साथ पैदल पुल का पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। पुल का निर्माण नहीं होेने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
क्षेत्र का विकास सड़कों की बुनियाद पर टिका होता है पर यही सड़कें जब विनाश की वजह बनने लगें तो लोगों का नाराज होना स्वाभाविक है। बृहस्पतिवार को यही हुआ जब भद्रतुंगा के पास सरयू नदी पर मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाला पैदल पुल टूटा तो स्थानीय लोग सड़क निर्माण में लगी कार्यदायी संस्था पर भड़क गए। ग्रामीणों का कहना है कि पतियासार से झूनी खलझूनी के लिए बन रही सड़क निर्माण के दौरान बोल्डर गिरने से पुल टूटा है। शुक्रवार को मिखिलाखलपट्टा की ग्राम प्रधान दुर्गा देवी ने कपकोट के एसडीएम को भेजे पत्र में पुल ध्वस्त होने की जानकारी दी। इधर, मिखिलाखलपट्टा के पूर्व प्रधान सूप सिंह के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने एडीएम चंद्र सिंह इमलाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि पतियासार से झूनी खलझूनी के लिए बनाई जा रही सड़क से लगातार मलबा गिर रहा है। सड़क निर्माण में विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क निर्माण का मलबा और बोल्डर सरयू में डाले जा रहे हैं। पुल ध्वस्त होने से मिखिलाखलपट्टा के लोगों के पास आवागमन का साधन नहीं रह गया है। पुल ध्वस्त होने से मिखिलाखलपट्टा के लोग बारिश के मौसम में घरों में कैद होकर रह जाएंगे और राशन तक की किल्लत हो जाएगी। प्रदर्शन में वन पंचायत सरपंच उछप सिंह, राजेंद्र सिंह, लछम सिंह, गोविंद सिंह, दीवान राम, भवान राम आदि शामिल थे।
नदियों को बना दिया डंपिंग जोन
बागेश्वर। जिले में सड़क निर्माण से निकले मलबे को डंपिंग जोन के बजाये नदियों में डालने के मामले में प्रशासन भी कम दोषी है। लोगों का कहना है कि कार्यदायी विभाग के साथ प्रशासनिक अमला डंपिंग जोन से इतर मलबा डालने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है। ठेकेदारों को मलबा डंपिंग जोन में डालने के लिए अतिरिक्त रकम मिलती है इसके बावजूद ठेकेदार मलबा घाटियों और नदियों में डाल देते हैं। कपकोट के काफलीकमेड़ा में सड़क निर्माण का मलबा डंपिंग जोन में नहीं डालने का पहले ही सामने आ चुका है। बीते 11 जून की बारिश में काफलीकमेड़ा में सड़क के निर्माण के दौरान निकला मलबा ग्रामीणों के लिए आफत बन गया था। सड़क से नीचे लुढ़काया गया मलबा लोगों के घरों तक पहुंच गया था। तमाम लोगों के खेत सड़क निर्माण के मलबे से पटे हैं। सड़क के मलबे के साथ आए बोल्डरों से पैदल पुल ध्वस्त हो गया ।
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भद्रतुंगा के पास निर्माणाधीन सड़क के मलबे से मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाले पैदल पुल के ध्वस्त होने की सूचना मिली है। सड़क का निर्माण कार्यदायी संस्था वैपकॉश कर रहा है। ग्रामीणों ने ज्ञापन भी सौंपा है। कपकोट के एसडीएम को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, इसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - चंद्र सिंह इमलाल एडीएम बागेश्वर।
कपकोट में 62.5 मिमी बारिश, 10 सड़कें हुईं बंद
बागेश्वर/अल्मोड़ा। जिले में मानसून दस्तक देने लगा है। कपकोट तहसील क्षेत्र में रात को झमाझम बारिश के बीच आए मलबे से 10 सड़कों पर यातायात ठप हो गया है। उधर, अल्मोड़ा में शुक्रवार दिन में कुछ देर हल्की बूंदाबांदी हुई।
कपकोट में बृहस्पतिवार रात गर्जना के साथ 62.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान बिजली गिरने से कपकोट के बसंती देवी और कुंवर सिंह की दुधारू भैंस की मौत हो गई। भूस्खलन और मलबा जमा होने से कई सड़काें पर यातायात भी प्रभावित हुआ। बारिश से चीराबगड़-पोथिंग, तोली, धरमघर-माजखेत, शामा-लीती-गोगिना, हरसीला-पुड़कूनी, कपकोट-कर्मी, सरण-बघर, शामा-नौकोड़ी, रिखाड़ी-वाछम और धूर-बदियाकोट मोटर मार्ग बंद हो गए। सड़कों के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया। आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल ने कहा कि बारिश के कारण बंद सात मोटर मार्गों पर शाम यातायात सुचारु करा दिया गया है। बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित अन्य तहसीलों में मौसम सामान्य रहा। इस कारण लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा। उधर, अल्मोड़ा में भी पूरा दिन धूप खिलने से उमस और तपिश जारी है। शुक्रवार सुबह नगर समेत तमाम क्षेत्रों में आसमान में हल्के बादल छाए रहे। दिन में बादलों के बीच धूप निकली, जिससे उमस बढ़ी रही। दोपहर करीब दो बजे हल्की बारिश हुई। कुछ ही मिनट हुई बूंदाबांदी के बाद शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। इस बीच भी अधिकतम पारा 30 डिग्री दर्ज किया गया।
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क्षेत्र का विकास सड़कों की बुनियाद पर टिका होता है पर यही सड़कें जब विनाश की वजह बनने लगें तो लोगों का नाराज होना स्वाभाविक है। बृहस्पतिवार को यही हुआ जब भद्रतुंगा के पास सरयू नदी पर मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाला पैदल पुल टूटा तो स्थानीय लोग सड़क निर्माण में लगी कार्यदायी संस्था पर भड़क गए। ग्रामीणों का कहना है कि पतियासार से झूनी खलझूनी के लिए बन रही सड़क निर्माण के दौरान बोल्डर गिरने से पुल टूटा है। शुक्रवार को मिखिलाखलपट्टा की ग्राम प्रधान दुर्गा देवी ने कपकोट के एसडीएम को भेजे पत्र में पुल ध्वस्त होने की जानकारी दी। इधर, मिखिलाखलपट्टा के पूर्व प्रधान सूप सिंह के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने एडीएम चंद्र सिंह इमलाल को सौंपे ज्ञापन में कहा कि पतियासार से झूनी खलझूनी के लिए बनाई जा रही सड़क से लगातार मलबा गिर रहा है। सड़क निर्माण में विस्फोटकों का प्रयोग किया जा रहा है। आरोप है कि सड़क निर्माण का मलबा और बोल्डर सरयू में डाले जा रहे हैं। पुल ध्वस्त होने से मिखिलाखलपट्टा के लोगों के पास आवागमन का साधन नहीं रह गया है। पुल ध्वस्त होने से मिखिलाखलपट्टा के लोग बारिश के मौसम में घरों में कैद होकर रह जाएंगे और राशन तक की किल्लत हो जाएगी। प्रदर्शन में वन पंचायत सरपंच उछप सिंह, राजेंद्र सिंह, लछम सिंह, गोविंद सिंह, दीवान राम, भवान राम आदि शामिल थे।
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नदियों को बना दिया डंपिंग जोन
बागेश्वर। जिले में सड़क निर्माण से निकले मलबे को डंपिंग जोन के बजाये नदियों में डालने के मामले में प्रशासन भी कम दोषी है। लोगों का कहना है कि कार्यदायी विभाग के साथ प्रशासनिक अमला डंपिंग जोन से इतर मलबा डालने वाले ठेकेदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करता है। ठेकेदारों को मलबा डंपिंग जोन में डालने के लिए अतिरिक्त रकम मिलती है इसके बावजूद ठेकेदार मलबा घाटियों और नदियों में डाल देते हैं। कपकोट के काफलीकमेड़ा में सड़क निर्माण का मलबा डंपिंग जोन में नहीं डालने का पहले ही सामने आ चुका है। बीते 11 जून की बारिश में काफलीकमेड़ा में सड़क के निर्माण के दौरान निकला मलबा ग्रामीणों के लिए आफत बन गया था। सड़क से नीचे लुढ़काया गया मलबा लोगों के घरों तक पहुंच गया था। तमाम लोगों के खेत सड़क निर्माण के मलबे से पटे हैं। सड़क के मलबे के साथ आए बोल्डरों से पैदल पुल ध्वस्त हो गया ।
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भद्रतुंगा के पास निर्माणाधीन सड़क के मलबे से मिखिलाखलपट्टा को जोड़ने वाले पैदल पुल के ध्वस्त होने की सूचना मिली है। सड़क का निर्माण कार्यदायी संस्था वैपकॉश कर रहा है। ग्रामीणों ने ज्ञापन भी सौंपा है। कपकोट के एसडीएम को प्रकरण की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, इसके अनुरूप कार्रवाई की जाएगी। - चंद्र सिंह इमलाल एडीएम बागेश्वर।
कपकोट में 62.5 मिमी बारिश, 10 सड़कें हुईं बंद
बागेश्वर/अल्मोड़ा। जिले में मानसून दस्तक देने लगा है। कपकोट तहसील क्षेत्र में रात को झमाझम बारिश के बीच आए मलबे से 10 सड़कों पर यातायात ठप हो गया है। उधर, अल्मोड़ा में शुक्रवार दिन में कुछ देर हल्की बूंदाबांदी हुई।
कपकोट में बृहस्पतिवार रात गर्जना के साथ 62.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान बिजली गिरने से कपकोट के बसंती देवी और कुंवर सिंह की दुधारू भैंस की मौत हो गई। भूस्खलन और मलबा जमा होने से कई सड़काें पर यातायात भी प्रभावित हुआ। बारिश से चीराबगड़-पोथिंग, तोली, धरमघर-माजखेत, शामा-लीती-गोगिना, हरसीला-पुड़कूनी, कपकोट-कर्मी, सरण-बघर, शामा-नौकोड़ी, रिखाड़ी-वाछम और धूर-बदियाकोट मोटर मार्ग बंद हो गए। सड़कों के बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया। आपदा प्रबंधन अधिकारी शिखा सुयाल ने कहा कि बारिश के कारण बंद सात मोटर मार्गों पर शाम यातायात सुचारु करा दिया गया है। बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित अन्य तहसीलों में मौसम सामान्य रहा। इस कारण लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ा। उधर, अल्मोड़ा में भी पूरा दिन धूप खिलने से उमस और तपिश जारी है। शुक्रवार सुबह नगर समेत तमाम क्षेत्रों में आसमान में हल्के बादल छाए रहे। दिन में बादलों के बीच धूप निकली, जिससे उमस बढ़ी रही। दोपहर करीब दो बजे हल्की बारिश हुई। कुछ ही मिनट हुई बूंदाबांदी के बाद शाम तक आसमान में बादल छाए रहे। इस बीच भी अधिकतम पारा 30 डिग्री दर्ज किया गया।