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Bageshwar News: जिला अस्पताल में संसाधनों का टोटा, फिर भी 28 दिन में कर डालीं 135 सर्जरी
Wed, 28 Jan 2026 11:43 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 28 Jan 2026 11:43 PM IST
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बागेश्वर। जिले में लो-वोल्टेज का संकट और जिला अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के बावजूद तैनात चिकित्सकों ने सेवा का अनूठा उदाहरण पेश किया है। सीमित संसाधनों और गिने-चुने हाथों के सहारे अस्पताल ने जनवरी महीने के महज 28 दिनों के भीतर 135 सफल ऑपरेशन कर एक नई मिसाल कायम की है।
जिला अस्पताल में जनरल सर्जरी, ऑर्थो और गाइनी के लिए मात्र एक-एक ही ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध है। नगर में इन दिनों गहराया लो-वोल्टेज का संकट सर्जरी के दौरान आधुनिक उपकरणों के संचालन में बड़ी बाधा बन रहा है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर और वैकल्पिक साधनों से सर्जरी का करना जारी रखा। जिला अस्पताल में गाइनी और ऑर्थो विभागों में मात्र एक-एक विशेषज्ञ तैनात है। इन्हीं दो कंधों पर पूरे जिले की गर्भवतियों और हड्डी के मरीजों की जिम्मेदारी है। जनवरी में इन दोनों ने मिलकर कुल 58 ऑपरेशन किए जिनमें से 33 मेजर और 25 माइनर ऑपरेशन शामिल हैं। वहीं जरनल सर्जरी के लिए सप्ताह में तीन दिन दो सर्जन उपलब्ध रहते हैं जबकि बाकी तीन दिन अकेले एक चिकित्सक के भरोसे ही पूरा विभाग चलता है। इस विभाग ने सीमित समय में 77 ऑपरेशन निपटाए हैं। अस्पताल से प्राप्त आकड़ों के अनुसार हर दिन औसतन 4.8 सर्जरी की जा रही हैं। 28 दिनों के भीतर जनरल सर्जरी में 77, ऑर्थो में 33 और गाइनी में 25 ऑपरेशन किए गए।
सीएमएस, डॉ. तपन कुमार शर्मा ने कहा कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। हमारे पास विशेषज्ञ चिकित्सकों के सीमित पद हैं। चिकित्सकों की टीम पूरी निष्ठा से काम कर रही है जिसका नतीजा है कि हमने 28 दिनों में 135 सफल सर्जरी की हैं। शासन स्तर पर संसाधनों और स्टाफ की बढ़ोतरी के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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जिला अस्पताल में जनरल सर्जरी, ऑर्थो और गाइनी के लिए मात्र एक-एक ही ऑपरेशन थिएटर उपलब्ध है। नगर में इन दिनों गहराया लो-वोल्टेज का संकट सर्जरी के दौरान आधुनिक उपकरणों के संचालन में बड़ी बाधा बन रहा है। बावजूद इसके अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर और वैकल्पिक साधनों से सर्जरी का करना जारी रखा। जिला अस्पताल में गाइनी और ऑर्थो विभागों में मात्र एक-एक विशेषज्ञ तैनात है। इन्हीं दो कंधों पर पूरे जिले की गर्भवतियों और हड्डी के मरीजों की जिम्मेदारी है। जनवरी में इन दोनों ने मिलकर कुल 58 ऑपरेशन किए जिनमें से 33 मेजर और 25 माइनर ऑपरेशन शामिल हैं। वहीं जरनल सर्जरी के लिए सप्ताह में तीन दिन दो सर्जन उपलब्ध रहते हैं जबकि बाकी तीन दिन अकेले एक चिकित्सक के भरोसे ही पूरा विभाग चलता है। इस विभाग ने सीमित समय में 77 ऑपरेशन निपटाए हैं। अस्पताल से प्राप्त आकड़ों के अनुसार हर दिन औसतन 4.8 सर्जरी की जा रही हैं। 28 दिनों के भीतर जनरल सर्जरी में 77, ऑर्थो में 33 और गाइनी में 25 ऑपरेशन किए गए।
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सीएमएस, डॉ. तपन कुमार शर्मा ने कहा कि हमारा प्राथमिक लक्ष्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। हमारे पास विशेषज्ञ चिकित्सकों के सीमित पद हैं। चिकित्सकों की टीम पूरी निष्ठा से काम कर रही है जिसका नतीजा है कि हमने 28 दिनों में 135 सफल सर्जरी की हैं। शासन स्तर पर संसाधनों और स्टाफ की बढ़ोतरी के लिए लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
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