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किशोर की मौत से फूटा गुस्सा, ग्रामीणों ने एनएच पर लगाया जाम
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 10 Nov 2018 10:28 PM IST
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बागेश्वर में जाम लगाते आक्रोषित ग्रामीणों को समझाते डीएफओ।
- फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर नगर से लगे द्यांगण गांव में तीन दिन के भीतर तेंदुए द्वारा एक बच्चे को मारने, गांव में तेंदुए देखने के बाद मची भगदड़ के दौरान नाले में गिरने से एक अन्य किशोर की मौत होने से गुस्साए ग्रामीणों ने शनिवार को तीन घंटे तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया। उन्होंने वन विभाग से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने, आदमखोर को मारने की मांग की।
द्यांगण गांव में तीन दिन के भीतर दो की मौत से गुस्साए लोग सुबह दस बजे ही सड़क पर उतर आए। उन्होंने द्यांगण बाईपास के पास एनएच पर जाम लगा दिया। इस मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि सरकार व प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। बीते कई महीनों से चली आ रही समस्या को प्रशासन ने हल्के रूप में लिया जिस कारण बच्चे व किशोर की जान चली गई। प्रभावित परिवारों की भी सुध नहीं ली जा रही है। तेंदुआ दिनभर गांव में घूम रहा है, लेकिन वन विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तेंदुए के भय से महिलाओं का खेतों में जाना तथा बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है।
द्यांगण सहित आस पास के ग्रामीण दहशत के साये में जी रहे हैं। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिन में करीब एक बजे एसडीएम राकेश तिवारी, प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह व सीओ महेश जोशी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाएगा तथा आदमखोर को मारने के लिए शिकारी लखपत सिंह को गांव में तैनात किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि रविवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सोमवार से फिर चक्का जाम किया जाएगा।
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इंसेट-
20 घंटे बाद उठाया हेमंत का शव
बागेश्वर। शुक्रवार की सायं द्यांगण गांव में तेंदुए की डर से भागते समय गधेरे में गिरने से जान गंवा चुके किशोर हेमंत टंगड़िया के शव को उसके परिजनों ने शनिवार को एक बजे घटना के 20 घंटे बाद उठाया। ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन कर रहे हेमंत के परिजनों ने आरोप लगाया कि वन विभाग व जिला प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है। जबकि बच्चे की जान विभाग की लापरवाही के चलते गई है। इस गांव में दो दिन पहले ही एक बच्चे पर तेंदुए ने हमला कर उसे मार डाला था। उसके बाद भी वन विभाग व जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार की शाम हेमंत टंगड़िया की गधेरे में गिर जाने से दर्दनाक मौत हो गई थी। दिन में करीब एक बजे एसडीएम राकेश तिवारी व वन विभाग के अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही परिजन पंचनामा कराने को तैयार हुए। पंचनामा में कमल सिंह, हुकुम सिंह, भूपेश सिंह, लाल सिंह, कवींद्र सिंह ने हस्ताक्षर किए।
25 लाख के मुआवजे पर अड़े ग्रामीण
बागेश्वर। एनएच पर जाम लगा रहे ग्रामीण प्रभावित परिवारों को 25-25 लाख का मुआवजा देने पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि इनकी मौत वन विभाग की लापरवाही के चलते हुई है। आंदोलन कर रहे पूर्व प्रमुख राजेंद्र टंगड़िया, जिपं उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, ग्रामीण पप्पू लाल, पूरन रावल, गोविंद कठायत, दर्शन कठायत, आदर्श कठायत, लीला देवी, माया देवी, मंजू देवी, चंपा देवी, गीता देवी, दीपक कठायत, मुन्ना परिहार, कमलेश मेहता ने प्रभावित परिवार को 25 लाख मुआवजा देने की मांग की।
दुखी ग्रामीण बोले, आदमखोर को नहीं मार सकते तो हमें भी मार दो
बागेश्वर। किशोर व बच्चे की मौत से दुखी ग्रामीण जाम स्थल पर अधिकारियों के समक्ष रो पड़े। उन्होंने कहा कि महीनों से चली आ रही समस्या से मुंह फेरने का नतीजा यह हुआ कि गांव में एक किशोर व एक बच्चे को जान गंवानी पड़ी। सरकार व प्रशासन को इस पर ठोस नीति बनाते हुए आदमखोर के आतंक से निजात दिलाना होगा।
शहर में फिर दिखा तेंदुआ, दहशत
बागेश्वर। शनिवार की देर सायं शहर के स्टेशन रोड में तेंदुआ दिखने से लोगों में दहशत फैल गई। स्टेशन रोड में सिद्धार्थ होटल के समीप सायं करीब छह बजे तेंदुआ दिखाई दिया। इससे से लोगों में दहशत फैल गई। तेंदुए दिखते मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। व्यापारियों ने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को भगाने का प्रयास किया। तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों ने तेंदुए के आतंक से निजात दिलाने की मांग की।
कोट...............
- गांव में तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। सायं चार बजे ही ग्रामीण घरों में दुबकने को मजबूर हैं। बच्चे स्कूल व महिलाएं खेतों में नही जा पा रहे हैं। - मोहन सिंह, रिटा. सूबेदार
- बच्चों को स्कूल व ट्यूशन ले जाना भी दूभर हो गया है। तेंदुआ दिन दहाड़े गांव में घूम रहा है। तीन दिन के भीतर दो की मौत से हम सहमे हैं। - जानकी कठायत, ग्रामीण
- आदमखोर के डर से गांव के बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। वन विभाग से फरियाद करते करते थक गए हैं। हम लोग आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। - नीमा खेतवाल, ग्रामीण
- महिलाओं का खेतों में जाना व पेयजल स्रोतों से पानी लाना दूभर हो गया है। आदमखोर के आतंक से गांव में रहने में ही डर लग रहा है। कभी भी तेंदुआ हमला कर सकता है। - हीरा देवी, ग्रामीण
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द्यांगण गांव में तीन दिन के भीतर दो की मौत से गुस्साए लोग सुबह दस बजे ही सड़क पर उतर आए। उन्होंने द्यांगण बाईपास के पास एनएच पर जाम लगा दिया। इस मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि सरकार व प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। बीते कई महीनों से चली आ रही समस्या को प्रशासन ने हल्के रूप में लिया जिस कारण बच्चे व किशोर की जान चली गई। प्रभावित परिवारों की भी सुध नहीं ली जा रही है। तेंदुआ दिनभर गांव में घूम रहा है, लेकिन वन विभाग इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। तेंदुए के भय से महिलाओं का खेतों में जाना तथा बच्चों का स्कूल जाना मुश्किल हो गया है।
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द्यांगण सहित आस पास के ग्रामीण दहशत के साये में जी रहे हैं। गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग व जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। दिन में करीब एक बजे एसडीएम राकेश तिवारी, प्रभागीय वनाधिकारी आरके सिंह व सीओ महेश जोशी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाया। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिया कि प्रभावित परिवार को मुआवजा दिया जाएगा तथा आदमखोर को मारने के लिए शिकारी लखपत सिंह को गांव में तैनात किया जाएगा। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि रविवार तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो सोमवार से फिर चक्का जाम किया जाएगा।
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20 घंटे बाद उठाया हेमंत का शव
बागेश्वर। शुक्रवार की सायं द्यांगण गांव में तेंदुए की डर से भागते समय गधेरे में गिरने से जान गंवा चुके किशोर हेमंत टंगड़िया के शव को उसके परिजनों ने शनिवार को एक बजे घटना के 20 घंटे बाद उठाया। ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन कर रहे हेमंत के परिजनों ने आरोप लगाया कि वन विभाग व जिला प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है। जबकि बच्चे की जान विभाग की लापरवाही के चलते गई है। इस गांव में दो दिन पहले ही एक बच्चे पर तेंदुए ने हमला कर उसे मार डाला था। उसके बाद भी वन विभाग व जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। शुक्रवार की शाम हेमंत टंगड़िया की गधेरे में गिर जाने से दर्दनाक मौत हो गई थी। दिन में करीब एक बजे एसडीएम राकेश तिवारी व वन विभाग के अधिकारियों के आश्वासन के बाद ही परिजन पंचनामा कराने को तैयार हुए। पंचनामा में कमल सिंह, हुकुम सिंह, भूपेश सिंह, लाल सिंह, कवींद्र सिंह ने हस्ताक्षर किए।
25 लाख के मुआवजे पर अड़े ग्रामीण
बागेश्वर। एनएच पर जाम लगा रहे ग्रामीण प्रभावित परिवारों को 25-25 लाख का मुआवजा देने पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि इनकी मौत वन विभाग की लापरवाही के चलते हुई है। आंदोलन कर रहे पूर्व प्रमुख राजेंद्र टंगड़िया, जिपं उपाध्यक्ष देवेंद्र परिहार, ग्रामीण पप्पू लाल, पूरन रावल, गोविंद कठायत, दर्शन कठायत, आदर्श कठायत, लीला देवी, माया देवी, मंजू देवी, चंपा देवी, गीता देवी, दीपक कठायत, मुन्ना परिहार, कमलेश मेहता ने प्रभावित परिवार को 25 लाख मुआवजा देने की मांग की।
दुखी ग्रामीण बोले, आदमखोर को नहीं मार सकते तो हमें भी मार दो
बागेश्वर। किशोर व बच्चे की मौत से दुखी ग्रामीण जाम स्थल पर अधिकारियों के समक्ष रो पड़े। उन्होंने कहा कि महीनों से चली आ रही समस्या से मुंह फेरने का नतीजा यह हुआ कि गांव में एक किशोर व एक बच्चे को जान गंवानी पड़ी। सरकार व प्रशासन को इस पर ठोस नीति बनाते हुए आदमखोर के आतंक से निजात दिलाना होगा।
शहर में फिर दिखा तेंदुआ, दहशत
बागेश्वर। शनिवार की देर सायं शहर के स्टेशन रोड में तेंदुआ दिखने से लोगों में दहशत फैल गई। स्टेशन रोड में सिद्धार्थ होटल के समीप सायं करीब छह बजे तेंदुआ दिखाई दिया। इससे से लोगों में दहशत फैल गई। तेंदुए दिखते मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। व्यापारियों ने इसकी सूचना वन विभाग को दे दी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर तेंदुए को भगाने का प्रयास किया। तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। लोगों ने तेंदुए के आतंक से निजात दिलाने की मांग की।
कोट...............
- गांव में तेंदुए की मौजूदगी से ग्रामीण दहशत में जी रहे हैं। सायं चार बजे ही ग्रामीण घरों में दुबकने को मजबूर हैं। बच्चे स्कूल व महिलाएं खेतों में नही जा पा रहे हैं। - मोहन सिंह, रिटा. सूबेदार
- बच्चों को स्कूल व ट्यूशन ले जाना भी दूभर हो गया है। तेंदुआ दिन दहाड़े गांव में घूम रहा है। तीन दिन के भीतर दो की मौत से हम सहमे हैं। - जानकी कठायत, ग्रामीण
- आदमखोर के डर से गांव के बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया है। वन विभाग से फरियाद करते करते थक गए हैं। हम लोग आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। - नीमा खेतवाल, ग्रामीण
- महिलाओं का खेतों में जाना व पेयजल स्रोतों से पानी लाना दूभर हो गया है। आदमखोर के आतंक से गांव में रहने में ही डर लग रहा है। कभी भी तेंदुआ हमला कर सकता है। - हीरा देवी, ग्रामीण