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सुहागिनों ने पति की लंबी उम्र की कामना को रखा वट सावित्री का उपवास
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बागेश्वर में वट-सावित्री पर्व पर सजी-धजी महिलाएं। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। वट सावित्री पूजा पर सुहागिनों ने पति की दीघार्यु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए उपवास रखा। नगर के बागनाथ मंदिर, बाजारी गोल्ज्यू मंदिर, कठायतबाड़ा के भगवती मंदिर सहित जिले के तमाम स्थानों पर सुहागिनों ने पूजा अर्चना की। जिले के कपकोट, कांडा, गरुड़, काफलीगैर, दुग नाकुरी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं ने उत्साह के साथ वट सावित्री का उपवास रखा।
वट सावित्री को सौभाग्यशाली महिलाओं केे मुख्य त्योहार है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिनें उपवास रखकर सावित्री, सत्यवान, धर्मराज यमदेव और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। कोरोना काल के चलते इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षा बागनाथ मंदिर में भीड़ कम रही। महिलाओं ने सामूहिक एकत्र होने की बजाय छोटी-छोटी टोली बनाकर वट वृक्ष की पूजा की। नगर की महिलाओं ने बाजारी गोल्ज्यू मंदिर में पूजा अर्चना की। वहीं कठायतबाड़ा क्षेत्र की महिलाओं ने देवी भगवती मंदिर में उपासना की। विभिन्न पूजा स्थलों में मौजूद सुहागिनें गीता रावल, कल्पना चंदोला, किरन पांडेय, विमला पांडेय, नेहा रावल, ममता रावल, अनीता, माया, पूजा, शालिनी कोरंगा आदि ने कहा कि वट सावित्री का व्रत सुहागिनों के जीवन का मुख्य पर्व है। जिसे वह हर साल पूरे विधिविधान से करती हैं। इधर, पंडित गणेश चंद्र तिवारी ने बताया कि विधिविधान से वट सावित्री का व्रत रखने से सुहागिनों की हर मनोकामना की पूर्ति होती है।
वट सावित्री के दिन रोपा बरगद का पौधा
बागेश्वर। वट सावित्री के दिन मंडलसेरा के देवकी लघु वाटिका में सुहागिनों ने बरगद का पौधा रोपकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। वट सावित्री की पूजा के बाद सुहागिनों ने वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के मार्गदर्शन में बरगद का पोधरोपण किया। मलड़ा ने बताया कि बरगद के पौधे को सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला बताया गया है। इसके पेड़ जल को स्थिरीकरण देता है और भूमि की रक्षा भी करता है। उन्होंने कहा कि वाटिका के माध्यम से अन्य स्थानों पर भी बरगद के पौधे रोपने और उनका संरक्षण करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रम में देवकी देवी, रमा देवी, ममता देवी, मनीषा मलड़ा, टीना, दिया बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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वट सावित्री के दिन रोपा बरगद का पौधा
बागेश्वर। वट सावित्री के दिन मंडलसेरा के देवकी लघु वाटिका में सुहागिनों ने बरगद का पौधा रोपकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। वट सावित्री की पूजा के बाद सुहागिनों ने वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के मार्गदर्शन में बरगद का पौधा रोपा। कार्यक्रम में देवकी देवी, रमा देवी, ममता देवी, मनीषा मलड़ा, टीना, दिया बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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वट सावित्री को सौभाग्यशाली महिलाओं केे मुख्य त्योहार है। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिनें उपवास रखकर सावित्री, सत्यवान, धर्मराज यमदेव और वट वृक्ष की पूजा करती हैं। कोरोना काल के चलते इस बार अन्य वर्षों की अपेक्षा बागनाथ मंदिर में भीड़ कम रही। महिलाओं ने सामूहिक एकत्र होने की बजाय छोटी-छोटी टोली बनाकर वट वृक्ष की पूजा की। नगर की महिलाओं ने बाजारी गोल्ज्यू मंदिर में पूजा अर्चना की। वहीं कठायतबाड़ा क्षेत्र की महिलाओं ने देवी भगवती मंदिर में उपासना की। विभिन्न पूजा स्थलों में मौजूद सुहागिनें गीता रावल, कल्पना चंदोला, किरन पांडेय, विमला पांडेय, नेहा रावल, ममता रावल, अनीता, माया, पूजा, शालिनी कोरंगा आदि ने कहा कि वट सावित्री का व्रत सुहागिनों के जीवन का मुख्य पर्व है। जिसे वह हर साल पूरे विधिविधान से करती हैं। इधर, पंडित गणेश चंद्र तिवारी ने बताया कि विधिविधान से वट सावित्री का व्रत रखने से सुहागिनों की हर मनोकामना की पूर्ति होती है।
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वट सावित्री के दिन रोपा बरगद का पौधा
बागेश्वर। वट सावित्री के दिन मंडलसेरा के देवकी लघु वाटिका में सुहागिनों ने बरगद का पौधा रोपकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। वट सावित्री की पूजा के बाद सुहागिनों ने वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के मार्गदर्शन में बरगद का पोधरोपण किया। मलड़ा ने बताया कि बरगद के पौधे को सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला बताया गया है। इसके पेड़ जल को स्थिरीकरण देता है और भूमि की रक्षा भी करता है। उन्होंने कहा कि वाटिका के माध्यम से अन्य स्थानों पर भी बरगद के पौधे रोपने और उनका संरक्षण करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। कार्यक्रम में देवकी देवी, रमा देवी, ममता देवी, मनीषा मलड़ा, टीना, दिया बिष्ट आदि मौजूद रहे।
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वट सावित्री के दिन रोपा बरगद का पौधा
बागेश्वर। वट सावित्री के दिन मंडलसेरा के देवकी लघु वाटिका में सुहागिनों ने बरगद का पौधा रोपकर उसके संरक्षण का संकल्प लिया। वट सावित्री की पूजा के बाद सुहागिनों ने वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा के मार्गदर्शन में बरगद का पौधा रोपा। कार्यक्रम में देवकी देवी, रमा देवी, ममता देवी, मनीषा मलड़ा, टीना, दिया बिष्ट आदि मौजूद रहे।