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कुमाऊं की काशी में गूंजा हर-हर महादेव का जयकारा
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महाशिवरात्रि पर्व पर सुबह 6.35 बजे बागेश्वर के बागनाथ धाम में लाइन में लगे लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर/गरुड़। महाशिवरात्रि पर बागेश्वर जिले के शिवधाम हर-हर महादेव के जयकारे से गुंजायमान रहे। लोग ब्रह्म मुहूर्त में ही बागनाथ धाम पहुंचने लगे थे। श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान के बाद बागनाथ बाबा का जलाभिषेक कर भगवान शंकर को विल्वपत्र अर्पित किए। बैजनाथ, नीलेश्वर समेत जिले के सभी शिवधामों में लोगों ने शीश नवा पूजा-अर्चना की। लोगों ने शिवरात्रि का व्रत रखा। शाम को फलाहार से व्रत तोड़ा।
बाबा बागनाथ के कपाट शिवरात्रि पर तड़के चार बजे से भी पहले खुल गए थे। मंदिर में तड़के 3:42 बजे से घंटे, घड़ियाल बजने लगे थे। बागनाथ धाम में लोगों का तांता लग गया। लोगों ने सरयू और गोमती के पवित्र संगम पर स्नान कर सूर्य और सरयू, गोमती नदी को अर्घ्य दिया। लोग भगवान बागनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रात: 4:38 बजे से ही मंदिर में लोगों को लाइन लगानी पड़ी। दिन चढ़ने के बाद बाबा बागनाथ के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में लोग आए। शाम तक मंदिर दर्शन का सिलसिला जारी था। श्रद्धालुओं ने बागनाथ मंदिर में स्थित प्राचीन कालभैरव मंदिर, बाणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। पंडितों से रुद्री पाठ कराया।
जिला मुख्यालय के नील पर्वत पर स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान शंकर के दर्शन किए। गरुड़ के बैजनाथ धाम, कपकोट के शिव मंदिर, शिखर मंदिर, सप्तेश्वर, भद्रतुंगा, तप्तकुंड, दुगनाकुरी के महोली शिवालय के साथ ही सभी शिवधामों में भक्तों ने पूजा, अर्चना की। मंदिरों में देर रात तक अनुष्ठान होते रहे। शयन आरती के बाद मंदिरों के कपाट बंद हुए।
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गरुड़ के बैजनाथ धाम में प्रात: चार बजे से पूजा, अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह आठ बजे बाद भक्तों की भीड़ बढ़ने पर लोगों को मुख्य मंदिर के दर्शन करने के लिए लाइन लगानी पड़ी। दो बजे तक लंबी लाइन लगी रही। भक्तों ने जलाभिषेक के बाद मंदिर के पास गोमती नदी में पली मछलियों को दाना खिलाया। भक्तों ने बैजनाथ मंदिर के पास बनी झील में नौकायन भी किया। वहीं प्रकटेश्वर, चक्रवृतेश्वर, कार्तिकेश्वर, दिव्येश्वरी, कपिलेश्वर मंदिर में भी शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया।
जलता दीपक लेकर मंदिर पहुंचीं महिलाएं, दीप ज्योति लेकर घर लौटीं
बागेश्वर। महाशिवरात्रि को शिवधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक थी। महिलाएं तड़के से ही शिव पूजन के लिए घरों से निकल गईं। पूजा की थाल में जलता दीपक लेकर मंदिर पहुंचीं महिलाएं बागनाथ धाम की पूजा-अर्चना के बाद दीप ज्योति लेकर घर लौटीं।
सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम
बागेश्वर। बागनाथ मंदिर समिति के अनुरोध पर हर साल की तरह ही इस बार भी बागनाथ मंदिर में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस कर्मियों ने भगवान बागनाथ के दर्शन कराने में लोगों की मदद की। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल और पुजारियों ने महाशिवरात्रि का पर्व उल्लास के संपन्न होने पर सभी लोगों को शुभकामना दी। वहीं मंगलवार दोपहर 3:21 बजे से दिला मुख्यालय के साथ ही कई इलाकों में हल्की बारिश होने लगी। बारिश से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भगवान शंकर दूल्हा बनने से पहले स्नान कर रहे हों। अक्सर महाशिवरात्रि पर्व पर बारिश होते हुए बागनाथ नगरी के लोग देखते आए हैं।
कंदमूल, फलों की खूब हुई बिक्री
बागेश्वर। शिवरात्रि पर लोग फलाहार करते हैं। बेर भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं। इस कारण तरुड़, बेर की खूब बिक्री हुई। बेर 60 से 80 रुपये किलो बिके। हालांकि इस बार बाजार में पहाड़ी तरुड़ काफी कम मिला। पहाड़ी तरुड़ 120 से 140 रुपये किलो, मैदानी तरुड़ 60 से 80 रुपये किलो बिका। पहाड़ी तरुड़ काफी स्वादिष्ट होता है। इसलिए लोगों की पहली पसंद रहता है। पहाड़ी तरुड़ महाशिवरात्रि को काफी कम दुकानों में बेहद कम मात्रा में बचा था।
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बाबा बागनाथ के कपाट शिवरात्रि पर तड़के चार बजे से भी पहले खुल गए थे। मंदिर में तड़के 3:42 बजे से घंटे, घड़ियाल बजने लगे थे। बागनाथ धाम में लोगों का तांता लग गया। लोगों ने सरयू और गोमती के पवित्र संगम पर स्नान कर सूर्य और सरयू, गोमती नदी को अर्घ्य दिया। लोग भगवान बागनाथ के दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रात: 4:38 बजे से ही मंदिर में लोगों को लाइन लगानी पड़ी। दिन चढ़ने के बाद बाबा बागनाथ के दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में लोग आए। शाम तक मंदिर दर्शन का सिलसिला जारी था। श्रद्धालुओं ने बागनाथ मंदिर में स्थित प्राचीन कालभैरव मंदिर, बाणेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। पंडितों से रुद्री पाठ कराया।
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जिला मुख्यालय के नील पर्वत पर स्थित नीलेश्वर महादेव मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान शंकर के दर्शन किए। गरुड़ के बैजनाथ धाम, कपकोट के शिव मंदिर, शिखर मंदिर, सप्तेश्वर, भद्रतुंगा, तप्तकुंड, दुगनाकुरी के महोली शिवालय के साथ ही सभी शिवधामों में भक्तों ने पूजा, अर्चना की। मंदिरों में देर रात तक अनुष्ठान होते रहे। शयन आरती के बाद मंदिरों के कपाट बंद हुए।
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गरुड़ के बैजनाथ धाम में प्रात: चार बजे से पूजा, अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया था। सुबह आठ बजे बाद भक्तों की भीड़ बढ़ने पर लोगों को मुख्य मंदिर के दर्शन करने के लिए लाइन लगानी पड़ी। दो बजे तक लंबी लाइन लगी रही। भक्तों ने जलाभिषेक के बाद मंदिर के पास गोमती नदी में पली मछलियों को दाना खिलाया। भक्तों ने बैजनाथ मंदिर के पास बनी झील में नौकायन भी किया। वहीं प्रकटेश्वर, चक्रवृतेश्वर, कार्तिकेश्वर, दिव्येश्वरी, कपिलेश्वर मंदिर में भी शिव भक्तों ने जलाभिषेक किया।
जलता दीपक लेकर मंदिर पहुंचीं महिलाएं, दीप ज्योति लेकर घर लौटीं
बागेश्वर। महाशिवरात्रि को शिवधाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक थी। महिलाएं तड़के से ही शिव पूजन के लिए घरों से निकल गईं। पूजा की थाल में जलता दीपक लेकर मंदिर पहुंचीं महिलाएं बागनाथ धाम की पूजा-अर्चना के बाद दीप ज्योति लेकर घर लौटीं।
सुरक्षा के थे पुख्ता इंतजाम
बागेश्वर। बागनाथ मंदिर समिति के अनुरोध पर हर साल की तरह ही इस बार भी बागनाथ मंदिर में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे। पुलिस कर्मियों ने भगवान बागनाथ के दर्शन कराने में लोगों की मदद की। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल और पुजारियों ने महाशिवरात्रि का पर्व उल्लास के संपन्न होने पर सभी लोगों को शुभकामना दी। वहीं मंगलवार दोपहर 3:21 बजे से दिला मुख्यालय के साथ ही कई इलाकों में हल्की बारिश होने लगी। बारिश से ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भगवान शंकर दूल्हा बनने से पहले स्नान कर रहे हों। अक्सर महाशिवरात्रि पर्व पर बारिश होते हुए बागनाथ नगरी के लोग देखते आए हैं।
कंदमूल, फलों की खूब हुई बिक्री
बागेश्वर। शिवरात्रि पर लोग फलाहार करते हैं। बेर भगवान शिव को चढ़ाए जाते हैं। इस कारण तरुड़, बेर की खूब बिक्री हुई। बेर 60 से 80 रुपये किलो बिके। हालांकि इस बार बाजार में पहाड़ी तरुड़ काफी कम मिला। पहाड़ी तरुड़ 120 से 140 रुपये किलो, मैदानी तरुड़ 60 से 80 रुपये किलो बिका। पहाड़ी तरुड़ काफी स्वादिष्ट होता है। इसलिए लोगों की पहली पसंद रहता है। पहाड़ी तरुड़ महाशिवरात्रि को काफी कम दुकानों में बेहद कम मात्रा में बचा था।