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शामा के कमलेश को रिंगाल के उत्पाद बनाने में महारत
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रिंगाल उत्पाद के साथ नन्हा कमलेश। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कहते हैं प्रतिभा उम्र, रुतबा और सुविधाओं की मोहताज नहीं है। मौका मिलने पर हुनरमंद अपनी प्रतिभा को साबित कर ही देता है। इसी बात को चरितार्थ कर रहे हैं शामा के लोहारकुड़ा तोक निवासी 12 वर्षीय बालक कमलेश। जूनियर हाईस्कूल लोहारकुड़ा में पढ़ने वाले कमलेश ने छोटी सी उम्र में ही रिंगाल के उत्पाद बनाने में महारत हासिल कर ली है। वह शिक्षा के साथ-साथ रिंगाल के उत्पाद बनाने में पिता का सहयोग करते हैं। क्षेत्र के लोग भी उनके हुनर और प्रतिभा के कायल हैं।
कमलेश के परिवार में उसके पिता चंचल राम के अलावा माता और हाईस्कूल में पढ़ने वाला बड़ा भाई हैं। पिता स्थानीय स्तर पर मिलने वाले रिंगाल के उत्पाद बनाकर आजीविका कमाते हैं। क्षेत्र में रिंगाल की बहुतायत होने के कारण कारोबार बेहद मंदा रहता है। जिसके कारण परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। छोटी सी उम्र में कमलेश ने परिवार की हालत को समझ चुका था। कक्षा चार की पढ़ाई के दौरान ही उसने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। पिता के साथ काम करते हुए उसके हाथों में सफाई आने लगी। अब वह अपने दम पर टोकरी, डलिया सहित रिंगाल के अन्य सजावटी सामान को बड़ी कुशलता से बना लेता है। ग्राम प्रधान सुनीता देवी और सामाजिक कार्यकर्ता मोहन राम ने बताया कि कमलेश हुनरमंद होने के साथ काफी समझदार भी है।
प्रशिक्षण शिविर में दिखाया हुनर
बागेश्वर। शामा में आयोजित रिंगाल उत्पाद के प्रशिक्षण शिविर में कमलेश का हुनर लोगों के सामने आया। उसने प्रशिक्षकों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाते हुए रिंगाल से टोकरी का निर्माण किया। उसने पारंपरिक टोकरी की बजाय ढक्कन बंद करने वाली टोकरी का निर्माण किया था। सफाई के साथ बनाई टोकरी की शिविर में मौजूद लोगों ने काफी सराहना की। सामाजिक कार्यकर्ता और मशरूम मैन भगवत सिंह कोरंगा भी उनके हुनर के कायल हो गए। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र के लोगों को संसाधन और सुविधाएं दी जाएं तो क्षेत्र के रिंगाल के उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा सकते हैं। संवाद
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कमलेश के परिवार में उसके पिता चंचल राम के अलावा माता और हाईस्कूल में पढ़ने वाला बड़ा भाई हैं। पिता स्थानीय स्तर पर मिलने वाले रिंगाल के उत्पाद बनाकर आजीविका कमाते हैं। क्षेत्र में रिंगाल की बहुतायत होने के कारण कारोबार बेहद मंदा रहता है। जिसके कारण परिवार को आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। छोटी सी उम्र में कमलेश ने परिवार की हालत को समझ चुका था। कक्षा चार की पढ़ाई के दौरान ही उसने पिता का हाथ बंटाना शुरू कर दिया। पिता के साथ काम करते हुए उसके हाथों में सफाई आने लगी। अब वह अपने दम पर टोकरी, डलिया सहित रिंगाल के अन्य सजावटी सामान को बड़ी कुशलता से बना लेता है। ग्राम प्रधान सुनीता देवी और सामाजिक कार्यकर्ता मोहन राम ने बताया कि कमलेश हुनरमंद होने के साथ काफी समझदार भी है।
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प्रशिक्षण शिविर में दिखाया हुनर
बागेश्वर। शामा में आयोजित रिंगाल उत्पाद के प्रशिक्षण शिविर में कमलेश का हुनर लोगों के सामने आया। उसने प्रशिक्षकों के सामने अपनी प्रतिभा दिखाते हुए रिंगाल से टोकरी का निर्माण किया। उसने पारंपरिक टोकरी की बजाय ढक्कन बंद करने वाली टोकरी का निर्माण किया था। सफाई के साथ बनाई टोकरी की शिविर में मौजूद लोगों ने काफी सराहना की। सामाजिक कार्यकर्ता और मशरूम मैन भगवत सिंह कोरंगा भी उनके हुनर के कायल हो गए। उन्होंने कहा कि अगर क्षेत्र के लोगों को संसाधन और सुविधाएं दी जाएं तो क्षेत्र के रिंगाल के उत्पाद राष्ट्रीय स्तर पर धूम मचा सकते हैं। संवाद
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