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श्रावण चतुदर्शी को बागनाथ और कालभैरव मंदिर में उमड़े भक्त
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शनिवार को बागेश्वर के बागनाथ धाम में पूजा के लिए पहुंचे श्रद्धालु। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। श्रावण चतुर्दशी (काली चतुर्दशी) पर बागनाथ और कालभैरव मंदिर में पूजा के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। इस दौरान भक्तों की भीड़ के कारण कोरोना गाइडलाइन की भी अनदेखी हुई।
सनातन धर्म में श्रावण का विशेष महत्व माना गया है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए मंदिरों में लोग उमड़ते हैं।
श्रावणी चतुर्दशी को छोटी शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ बाबा कालभैरव की पूजा का भी विशेष विधान है। पूर्व के वर्षों में भैरव मंदिर में बकरियों का चढ़ावा होता था।
मन्नत पूरी होने पर बकरियों का बलिदान करते थे। बाद में न्यायालय ने मंदिरों में बलि प्रथा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से मंदिर में विशेष पूजा ही कराई जाती है। शनिवार को श्रावणी चतुर्दशी के पर्व पर तड़के से ही मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया था।
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दिन निकलने तक मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। सुरक्षा कर्मचारियों ने भक्तों को कोविड गाइडलाइन के पालन की अपील की। भक्तों ने लाइन लगाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
बाबा भैरवनाथ की पूजा कर सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद लिया। भक्तों की भीड़ से मंदिर परिसर में पूजा करवाने वाले पंडितों और पुरोहितों के चेहरों पर भी रौनक रही।
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सनातन धर्म में श्रावण का विशेष महत्व माना गया है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए मंदिरों में लोग उमड़ते हैं।
श्रावणी चतुर्दशी को छोटी शिवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ बाबा कालभैरव की पूजा का भी विशेष विधान है। पूर्व के वर्षों में भैरव मंदिर में बकरियों का चढ़ावा होता था।
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मन्नत पूरी होने पर बकरियों का बलिदान करते थे। बाद में न्यायालय ने मंदिरों में बलि प्रथा पर रोक लगा दी थी। इसके बाद से मंदिर में विशेष पूजा ही कराई जाती है। शनिवार को श्रावणी चतुर्दशी के पर्व पर तड़के से ही मंदिरों में भक्तों का आना शुरू हो गया था।
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दिन निकलने तक मंदिर परिसर भक्तों से खचाखच भर गया। सुरक्षा कर्मचारियों ने भक्तों को कोविड गाइडलाइन के पालन की अपील की। भक्तों ने लाइन लगाकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
बाबा भैरवनाथ की पूजा कर सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद लिया। भक्तों की भीड़ से मंदिर परिसर में पूजा करवाने वाले पंडितों और पुरोहितों के चेहरों पर भी रौनक रही।