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सरयू पार कौआ बुलाया, सरयू वार बने घुघते
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बागेश्वर में मकर संक्रांति पर घुघते की माला पहनकर कौआ बुलाते बच्चे। संवाद न्यूज एजेंसी।
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिले में घुघुतिया त्योहार धूमधाम से मनाया गया। मकर संक्राति के दिन सरयू वार के गांवों में घुघते बनाए गए तो सरयू पार के लोगों ने कौआ बुलाया। बच्चों ने उत्साह के साथ काले कौआ काले की आवाज लगाकर कौओं को आमंत्रित किया। उन्हें घुघुते के साथ ही अन्य पकवान दिए गए और बदले में प्रभु से सुख, संपन्नता का आशीर्वाद मांगा।
मकर संक्राति को प्रदेश में घुघुतिया त्यार के नाम से भी जाना जाता है। जिले में घुघुतिया त्योहार दो दिन मनाया जाता है। सरयू नदी के पार के तहसील दुग नाकुरी, कांडा और कपकोट में मकर संक्रांति के पहले दिन यानी पौष माह के अंतिम दिन त्योहार मनता है। सरयू वार के तहसील बागेश्वर, गरुड़ और काफलीगैर में मकर संक्राति के दिन घुघुते बनाए जाते हैं। गुरुवार को सरयू पार के बच्चों ने सुबह कौआ बुलाया। गांवों में सुबह से ही काले कौआ काले की गूं्ज सुनाई दी। इधर, सरयू वार के घरों में दोपहर के बाद से महिलाओं और बच्चों ने मिलकर घुघुते बनाए। इस क्षेत्र के बच्चे शुक्रवार की सुबह कौआ बुलाएंगे।
आटे और गुड़ के मिश्रण को मिलाकर बनते हैं पकवान
बागेश्वर। घुघुतिया त्यार में बनने वाले घुघुते आटे और गुड़ को मिलाकर बनने वाले पकवान हैं। एक विशेष प्रकार की आकृति बनने के कारण इसे घुघुत कहा जाता है। इसके अलावा तलवार, डमरू की आकृति के पकवान भी बनाए जाते हैं। पूरी, खजूर और उड़द की दाल का पकवान बड़ा भी बनता है। संतरे की छोटे दाने जिन्हें नारंगी कहा जाता है उनको भी घुघुते की माला में पिरोया जाता हैं।
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शुभ माना जाता है कौआ खिलाना
बागेश्वर। सनातन धर्म के त्योहार और पर्व प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े होते हैं। घुघुतिया त्यार भी इससे अछूता नहीं है। इस पर्व पर कौआ बुलाकर भोजन कराना शुभ माना जाता है। बच्चे घर में बने पकवान कौओं को खिलाते हैं। इससे पूर्व उन्हें गीत गाकर बुलाया जाता है। (संवाद)
कौआ बुलाने को गाया जाने वाला गीत
काले कौआ काले, घुघुति माला खाले
ले कावा बड़, मैंकु दिजा सुनक घड़
ले कावा पुरि, मैंकु दिजा सुनूक धुरी
धूमधाम से मनाया मकर संक्रांति का त्योहार
गरुड़ (बागेश्वर)। मकर संक्रांति का पर्व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने बैजनाथ धाम के पास गोमती नदी में डुबकी लगाई। लोगों ने अपने घरों में घुघते बनाये। मकर संक्रांति पर कई लोगों ने बैजनाथ धाम के पास गोमती नदी में डुबकी लगाई और मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने घरों में घुघते बनाए। ग्रामीणों ने नर सिंह मंदिर, चक्रवृतेश्वर, प्रकटेश्वर, वृद्ध बागेश्वर, कपिलेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की। (संवाद)
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मकर संक्राति को प्रदेश में घुघुतिया त्यार के नाम से भी जाना जाता है। जिले में घुघुतिया त्योहार दो दिन मनाया जाता है। सरयू नदी के पार के तहसील दुग नाकुरी, कांडा और कपकोट में मकर संक्रांति के पहले दिन यानी पौष माह के अंतिम दिन त्योहार मनता है। सरयू वार के तहसील बागेश्वर, गरुड़ और काफलीगैर में मकर संक्राति के दिन घुघुते बनाए जाते हैं। गुरुवार को सरयू पार के बच्चों ने सुबह कौआ बुलाया। गांवों में सुबह से ही काले कौआ काले की गूं्ज सुनाई दी। इधर, सरयू वार के घरों में दोपहर के बाद से महिलाओं और बच्चों ने मिलकर घुघुते बनाए। इस क्षेत्र के बच्चे शुक्रवार की सुबह कौआ बुलाएंगे।
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आटे और गुड़ के मिश्रण को मिलाकर बनते हैं पकवान
बागेश्वर। घुघुतिया त्यार में बनने वाले घुघुते आटे और गुड़ को मिलाकर बनने वाले पकवान हैं। एक विशेष प्रकार की आकृति बनने के कारण इसे घुघुत कहा जाता है। इसके अलावा तलवार, डमरू की आकृति के पकवान भी बनाए जाते हैं। पूरी, खजूर और उड़द की दाल का पकवान बड़ा भी बनता है। संतरे की छोटे दाने जिन्हें नारंगी कहा जाता है उनको भी घुघुते की माला में पिरोया जाता हैं।
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शुभ माना जाता है कौआ खिलाना
बागेश्वर। सनातन धर्म के त्योहार और पर्व प्रकृति और पर्यावरण से जुड़े होते हैं। घुघुतिया त्यार भी इससे अछूता नहीं है। इस पर्व पर कौआ बुलाकर भोजन कराना शुभ माना जाता है। बच्चे घर में बने पकवान कौओं को खिलाते हैं। इससे पूर्व उन्हें गीत गाकर बुलाया जाता है। (संवाद)
कौआ बुलाने को गाया जाने वाला गीत
काले कौआ काले, घुघुति माला खाले
ले कावा बड़, मैंकु दिजा सुनक घड़
ले कावा पुरि, मैंकु दिजा सुनूक धुरी
धूमधाम से मनाया मकर संक्रांति का त्योहार
गरुड़ (बागेश्वर)। मकर संक्रांति का पर्व क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। लोगों ने बैजनाथ धाम के पास गोमती नदी में डुबकी लगाई। लोगों ने अपने घरों में घुघते बनाये। मकर संक्रांति पर कई लोगों ने बैजनाथ धाम के पास गोमती नदी में डुबकी लगाई और मंदिर में पूजा अर्चना की। इसके बाद ग्रामीणों ने अपने घरों में घुघते बनाए। ग्रामीणों ने नर सिंह मंदिर, चक्रवृतेश्वर, प्रकटेश्वर, वृद्ध बागेश्वर, कपिलेश्वर मंदिर में पूजा अर्चना की। (संवाद)