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नागर शैली में नक्काशी कर रहे राजस्थान के कारीगर
आनंद बिष्ट, अमर उजाला गरुड़ (बागेश्वर)।
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:17 AM IST
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मंदिर का सुधार
- फोटो : अमर उजाला
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गरुड़ (बागेश्वर)। राजस्थान के कारीगरों ने गढ़सेर के जीर्णशीर्ण बदरीनाथ मंदिर की नक्काशी करनी शुरू कर दी है। क्षेत्रपाल के मंदिर की नक्काशी का काम करीब पूरा हो गया है। मंदिर के मध्य में उगे पीपल के पेड़ को विभाग ने उखाड़ दिया है। मंदिर की नक्काशी होने से गढ़सेर और क्षेत्र के लोगों में उत्साह है।
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प्राचीन शिलालेखों के अनुसार गढ़सेर के प्राचीन बदरीनाथ मंदिर का निर्माण 1313 शताब्दी में हुआ था। मुख्य मंदिर बदरीनाथ मंदिर के मध्य में एक दस साल पहले एक पीपल का पेड़ उग गया था। जड़ों ने मंदिर की दीवारों को क्षति पहुंचाई थी। कुछ साल पहले अमर उजाला ने ‘गढ़सेर के बदरीनाथ मंदिर का अस्तित्व खतरे में’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था।
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पुरातत्व विभाग ने तब पीपल के पेड़ की कुछ टहनी काट दी थी। पुरातत्व विभाग ने मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए कुछ दिन पहले प्रांतीय खंड लोनिवि को सात लाख रुपये अवमुक्त कर दिए थे। क्षेत्रीय पुरातत्व प्रभारी चंद्र सिंह चौहान ने बताया कि विभाग दोनों मंदिरों की नक्काशी करवा रहा है। मंदिर में लगे घिसे पत्थरों को बदला जाएगा। अन्य पत्थरों की नक्काशी होगी।
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नक्काशी के बाद मंदिर एकदम नागर शैली में दिखेगा। मंदिर का ढांचा पहले जैसा रहेगा। राजस्थान से आए कारीगरों का कहना है कि पत्थरों की नक्काशी के बाद उनमें पॉलिस की जाएगी। मंदिर का निर्माण कार्य देख रहे आनंद सिंह नेगी ने बताया कि जो पत्थर घिस गए हैं, उनकी जगह पर नये पत्थरों की खोजबीन की जा रही है। ग्राम प्रधान गढ़सेर नवीन ममगई ने बताया कि बदरीनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार होने से बैजनाथ ही नहीं समूचे उत्तराखंड के पर्यटन विकास को बल मिलेगा।
गरुड़ (बागेश्वर)। इतिहासकार गोपाल दत्त पाठक ने बताया कि गढ़सेर का बदरीनाथ मंदिर चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर का दूसरा अंग है। उन्होंने बताया कि देश की आजादी से पहले तक चमोली जिले के बदरीनाथ मंदिर से गढ़सेर के बदरीनाथ मंदिर में पूजा पाठ की सामग्री और मंदिर के पुजारी के लिए कुछ नकदी आती थी। देश की आजादी के बाद पूजा सामग्री आना बंद हो गया है।