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घांघली में 31 वर्ष से हो रही रामलीला, 40 गांवों के मध्य होता है आयोजन
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बागेश्वर के घांघली में रामलीला की तालीम लेते कलाकार। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। आधुनिक समय में जहां अधिकांश स्थानों पर रामलीला का आयोजन सिमटता जा रहा है, वहीं गरुड़ के घांघली में पिछले 31 वर्ष से रामलीला अनवरत चल रही है। कोरोना के चलते पिछले वर्ष रामलीला नहीं हो सकी थी, लेकिन इस साल महामारी का असर कम होने के चलते रामलीला के भव्य आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इन दिनों पात्रों को तालीम देने का काम चल रहा है। शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही रामलीला का मंचन शुरू हो जाएगा।
घांघली की रामलीला मल्ला कत्यूर क्षेत्र का प्रमुख महोत्सव है। वर्ष 1992 में क्षेत्रीय लोगों ने रामलीला कमेटी बनाकर धान काटने के बाद खाली हुए खेतों में रामलीला मंचन की शुरुआत की। उस वर्ष आसपास के एक दर्जन गांवों से ही लोगों ने रामलीला में भागीदारी की। धीरे-धीरे घांघली की रामलीला का प्रचार होता गया और मल्ला कत्यूर क्षेत्र के लोग हर वर्ष रामलीला का लुत्फ उठाने आने लगे।
रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ने के साथ गांवों से एकत्र होने वाले चंदे की राशि भी बढ़ने लगी। जिसका सदुपयोग करते हुए रामलीला कमेटी ने सार्वजनिक स्थान पर रामलीला कराना शुरू कर दिया। खेतों से निकलकर रामलीला सार्वजनिक स्थान पर आई, मंच निर्माण की भी कार्यवाही शुरू हुई। मंच निर्माण होने के बाद कलाकारों को फायदा हुआ है। जहां अधिकांश स्थानों पर रामलीला में दर्शक नहीं मिलते हैं, लेकिन घांघली की रामलीला देखने के लिए आज भी सैकड़ों ग्रामीण पहुंचते हैं।
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अभिनय के लिए कलाकार जुटाना हुआ मुश्किल
बागेश्वर। घांघली में रामलीला की शुरुआत से निर्देेशक की भूमिका निभाते आ रहे कांति मोहन जोशी कहते हैं कि पूर्व में रामलीला देखने के लिए एक हजार से अधिक दर्शक पहुंचते थे। मंचन स्थल के आसपास के खेत लोगों से भर जाते थे, लेकिन अब दर्शकों की तादाद काफी कम हो गई हैं। हालांकि अन्य स्थानों की अपेक्षा घांघली में अब भी अधिक लोग रामलीला का लुत्फ उठाने आते हैं। कहा कि टीवी और मोबाइल के चलन ने रामलीला को प्रभावित किया है। अब रामलीला में अभिनय करने के लिए कलाकार खोजना मुश्किल हो गया है। कलाकार नहीं मिलने से एक ही व्यक्ति को कई पात्र निभाने पड़ते हैं।
बागेश्वर में इस बार भी नहीं होगा रामलीला मंचन
बागेश्वर। पिछले वर्ष की भांति इस साल भी जिला मुख्यालय में रामलीला का आयोजन नहीं होगा। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज पांडेय ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कमेटी ने इस वर्ष भी सूक्ष्म रूप से पूजा कराने का निर्णय लिया है। जिसमें मंच पर रामलीला महोत्सव के प्रारूप के रूप में सुबह और शाम भगवान राम की पूजा अर्चना और प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा।
बदलते समय के साथ रामलीला का क्रेज कम होता जा रहा है, वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए रामलीला का आयोजन बेहद जरूरी है। रामलीला कमेटी लगातार युवाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। युवा कलाकारों को आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उम्मीद है कि घांघली की रामलीला आने वाले सालों में भी अपनी पहचान कायम रखेगी।
महेशानंद जोशी, अध्यक्ष रामलीला कमेटी घांघली
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घांघली की रामलीला मल्ला कत्यूर क्षेत्र का प्रमुख महोत्सव है। वर्ष 1992 में क्षेत्रीय लोगों ने रामलीला कमेटी बनाकर धान काटने के बाद खाली हुए खेतों में रामलीला मंचन की शुरुआत की। उस वर्ष आसपास के एक दर्जन गांवों से ही लोगों ने रामलीला में भागीदारी की। धीरे-धीरे घांघली की रामलीला का प्रचार होता गया और मल्ला कत्यूर क्षेत्र के लोग हर वर्ष रामलीला का लुत्फ उठाने आने लगे।
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रामलीला के प्रति लोगों का उत्साह बढ़ने के साथ गांवों से एकत्र होने वाले चंदे की राशि भी बढ़ने लगी। जिसका सदुपयोग करते हुए रामलीला कमेटी ने सार्वजनिक स्थान पर रामलीला कराना शुरू कर दिया। खेतों से निकलकर रामलीला सार्वजनिक स्थान पर आई, मंच निर्माण की भी कार्यवाही शुरू हुई। मंच निर्माण होने के बाद कलाकारों को फायदा हुआ है। जहां अधिकांश स्थानों पर रामलीला में दर्शक नहीं मिलते हैं, लेकिन घांघली की रामलीला देखने के लिए आज भी सैकड़ों ग्रामीण पहुंचते हैं।
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अभिनय के लिए कलाकार जुटाना हुआ मुश्किल
बागेश्वर। घांघली में रामलीला की शुरुआत से निर्देेशक की भूमिका निभाते आ रहे कांति मोहन जोशी कहते हैं कि पूर्व में रामलीला देखने के लिए एक हजार से अधिक दर्शक पहुंचते थे। मंचन स्थल के आसपास के खेत लोगों से भर जाते थे, लेकिन अब दर्शकों की तादाद काफी कम हो गई हैं। हालांकि अन्य स्थानों की अपेक्षा घांघली में अब भी अधिक लोग रामलीला का लुत्फ उठाने आते हैं। कहा कि टीवी और मोबाइल के चलन ने रामलीला को प्रभावित किया है। अब रामलीला में अभिनय करने के लिए कलाकार खोजना मुश्किल हो गया है। कलाकार नहीं मिलने से एक ही व्यक्ति को कई पात्र निभाने पड़ते हैं।
बागेश्वर में इस बार भी नहीं होगा रामलीला मंचन
बागेश्वर। पिछले वर्ष की भांति इस साल भी जिला मुख्यालय में रामलीला का आयोजन नहीं होगा। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष मनोज पांडेय ने बताया कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कमेटी ने इस वर्ष भी सूक्ष्म रूप से पूजा कराने का निर्णय लिया है। जिसमें मंच पर रामलीला महोत्सव के प्रारूप के रूप में सुबह और शाम भगवान राम की पूजा अर्चना और प्रार्थना का आयोजन किया जाएगा।
बदलते समय के साथ रामलीला का क्रेज कम होता जा रहा है, वर्तमान पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखने के लिए रामलीला का आयोजन बेहद जरूरी है। रामलीला कमेटी लगातार युवाओं को प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रही है। युवा कलाकारों को आगे आने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उम्मीद है कि घांघली की रामलीला आने वाले सालों में भी अपनी पहचान कायम रखेगी।
महेशानंद जोशी, अध्यक्ष रामलीला कमेटी घांघली