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बागेश्वर में मूसलाधार वर्षा से उफनाए नदी नाले

Mon, 16 May 2016 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर Updated Mon, 16 May 2016 12:09 AM IST
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rains in the river valley from Bageshwar
बागेश्वर के घरों में पहुंचा पानी - फोटो : अमर उजाला

बागेश्वर। रविवार को जिले भर के कई स्थानों में हुई मूसलाधार बारिश हुई। इससे नदी नाले उफान पर आ गए। इस दौरान मेहनरबुंगा के सात घरों में मलबा घुस गया। इससे लोग खौफजदा हो गए। उफान पर आई गोमती नदी में टनों के हिसाब से चीड़ के गिल्टे बहकर आए।

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रविवार को दोपहर बाद करीब तीन बजे तक धूप खिली रही। इसके बाद अचानक आसमान बादलों के घिरते ही तेज गरज और अंधड़ के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। लगातार दो घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश से सभी नदी नाले उफान पर आ गए।
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उधर, मेहनरबुंगा क्षेत्र में कई घरों में बरसाती पानी के साथ बहकर आया मलबा घुस गया। गांव के शेर राम, इंद्र लाल, अर्जुन लाल, महेश चंद्र, नवीन चंद्र, राजन राम, हिम्मत राम के घरों में मलबा घुसने से ग्रामीण दहशत में आ गए। मकानों के आसपास तलैया जैसी बन गई।
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घरों में मलबा घुसने से ग्रामीणों को भारी क्षति उठानी पड़ी है। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन से सुरक्षा दीवार व नाला निर्माण की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक सुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इसके चलते उन्हें हर साल बरसात में खौफ के साये में रहना पड़ता है। इधर, बारिश से मजियाखेत से बाजार को आने वाला रास्ता नाला बन गया। गंदा नाला कई लोगों के घरों के आंगन व खेतों में घुस गया।

मूसलाधार बारिश के कारण गरुड़ से निकलने वाली गोमती नदी उफान पर आ गई। नालों के भयंकर रूप लेने से जंगलों से बड़ी संख्या में चीड़ की लकड़ी के गिल्टे बहकर गोमती नदी में समा गए। गोमती नदी अपने साथ टनों लकड़ी बहा ले आई। बारिश से लगभग दो घंटे तक सड़कों और रास्तों में आवाजाही पूरी तरह से बंद रही। 


बागेश्वर। गोमती नदी में बहकर आए लकड़ी को निकालने के लिए कई लोग जान जोखिम में डालकर नदी में उतर गए। इनमें छोटे बच्चे भी शामिल थे। सरयू-गोमती संगम के बीच में जब चार युवक गिल्टे निकालने का प्रयास कर रहे थे, तभी गोमती दोबारा उफान पर आ गई। समय रहते युवकों के नदी से सुरक्षित स्थान पर भाग जाने से सभी बाल-बाल बचे गए। यदि कुछ पल की भी देरी हुई होती तो इन युवकों को नदी की लहरों में समाते देर नहीं लगती। कई छोटे-छोटे बच्चे भी जान जोखिम में डालकर नदी से लकड़ियां निकालते नजर आए। इसके बावजूद सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। 

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