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Bageshwar News: प्राकृतिक स्रोतों को बचाने की मुहिम में जुटे शिक्षक पूना
Wed, 04 Jun 2025 11:57 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Wed, 04 Jun 2025 11:57 PM IST
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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष:
बागेश्वर। राजकीय हाईस्कूल लेटी में तैनात सामाजिक विज्ञान के शिक्षक राजेंद्र पूना शिक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी समर्पण भाव से कार्य करते हैं। दो प्राकृतिक स्राेतों की देखरेख और सुरक्षा के साथ लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। स्कूल में बनाई नर्सरी से वह लोगों को निशुल्क पौधे भी बांटते हैं।
शिक्षक पूना ने बताया कि सात-आठ साल की उम्र में घरवालों को हरेला पर्व और मानसून काल में फलों के पौधे लगाते देखकर उनका भी इस ओर रुझान हो गया था। धीरे-धीरे यह जीवन का हिस्सा बनता गया। स्कूल में पढ़ने के दौरान भी उन्हाेंने पौधरोपण को अपने रुटीन में शामिल किया और मित्रों के साथ मिलकर नगर के चंडिका मंदिर, नीलेश्वर मंदिर समेत अन्य स्थानों पर पौधे रोपे। उनके गांव बड़ेत (अब नारायणदेव वार्ड) के गोदावरी धारे को संरक्षित रखने के लिए वह हर साल इसके आसपास चौड़ी पत्तीदार पौधे रोपते हैं। अब तक वह इस क्षेत्र में एक हजार से अधिक पौधे रोप चुके हैं।
महीने में एक बार धारे के आसपास वृहद सफाई करना उनके काम में शामिल है। वर्ष 2021 में वह अपने स्कूल के समीप रिसते पानी के स्रोत को नवजीवन दे चुके हैं। छात्र-छात्राओं की मदद से उन्होंने स्रोत को धारे की शक्ल दी और वहां पर खाल बनाकर बहते पानी को संरक्षित किया। आज भी छात्र-छात्राएं इस धारे से पानी पीते हैं। खाल के पानी से मवेशी प्यास बुझाते हैं।
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हर साल गांव में बांटते हैं पौधे
बागेश्वर। शिक्षक पूना ने इस साल स्कूल परिसर के आसपास 400 पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन्होंने स्कूल में ही नर्सरी तैयार की है। इस नर्सरी से वह पिछले साल तक ग्रामीणों को पौधे निशुल्क बांटते थे। मानसून काल में प्रत्येक ग्रामीण के घर जाकर उसे निशुल्क पौधे बांटते हैं। संवाद
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बागेश्वर। राजकीय हाईस्कूल लेटी में तैनात सामाजिक विज्ञान के शिक्षक राजेंद्र पूना शिक्षण के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी समर्पण भाव से कार्य करते हैं। दो प्राकृतिक स्राेतों की देखरेख और सुरक्षा के साथ लोगों को पौधरोपण के लिए प्रेरित करना उनकी दिनचर्या में शामिल है। स्कूल में बनाई नर्सरी से वह लोगों को निशुल्क पौधे भी बांटते हैं।
शिक्षक पूना ने बताया कि सात-आठ साल की उम्र में घरवालों को हरेला पर्व और मानसून काल में फलों के पौधे लगाते देखकर उनका भी इस ओर रुझान हो गया था। धीरे-धीरे यह जीवन का हिस्सा बनता गया। स्कूल में पढ़ने के दौरान भी उन्हाेंने पौधरोपण को अपने रुटीन में शामिल किया और मित्रों के साथ मिलकर नगर के चंडिका मंदिर, नीलेश्वर मंदिर समेत अन्य स्थानों पर पौधे रोपे। उनके गांव बड़ेत (अब नारायणदेव वार्ड) के गोदावरी धारे को संरक्षित रखने के लिए वह हर साल इसके आसपास चौड़ी पत्तीदार पौधे रोपते हैं। अब तक वह इस क्षेत्र में एक हजार से अधिक पौधे रोप चुके हैं।
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महीने में एक बार धारे के आसपास वृहद सफाई करना उनके काम में शामिल है। वर्ष 2021 में वह अपने स्कूल के समीप रिसते पानी के स्रोत को नवजीवन दे चुके हैं। छात्र-छात्राओं की मदद से उन्होंने स्रोत को धारे की शक्ल दी और वहां पर खाल बनाकर बहते पानी को संरक्षित किया। आज भी छात्र-छात्राएं इस धारे से पानी पीते हैं। खाल के पानी से मवेशी प्यास बुझाते हैं।
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हर साल गांव में बांटते हैं पौधे
बागेश्वर। शिक्षक पूना ने इस साल स्कूल परिसर के आसपास 400 पौधे लगाने और उन्हें संरक्षित करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उन्होंने स्कूल में ही नर्सरी तैयार की है। इस नर्सरी से वह पिछले साल तक ग्रामीणों को पौधे निशुल्क बांटते थे। मानसून काल में प्रत्येक ग्रामीण के घर जाकर उसे निशुल्क पौधे बांटते हैं। संवाद