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सुंदरता अपार पर सुविधा की दरकार, पिंडारी-कफनी के रास्तों में मौजूद हैं 2013 की आपदा के जख्म
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बागेश्वर के पिंडारी और कफनी ग्लेशियर मार्ग का प्रमुख स्थल द्वाली। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। पिंडारी और कफनी ग्लेशियर जिले के प्रमुख साहसिक पर्यटक स्थल हैं। देश और विदेश से हर साल पर्यटक यहां ट्रैकिंग के लिए आते हैं। किसी समय यह ट्रैक जोहार होकर तिब्बत के व्यापारियों के आवागमन का प्रमुख मार्ग था। शासन और प्रशासन की अनदेखी के चलते यह ट्रैक क्षतिग्रस्त पड़ा है। आज भी पिंडारी और कफनी के मार्ग में वर्ष 2013 की आपदा के जख्म भरे नहीं हैं।
पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक को खोजने का श्रेय अंग्रेज घुमक्कड़ सर विलियम ट्रेल को जाता है। उन्होंने वर्ष 1830 में सूपी गांव के मलक सिंह के साथ पिंडारी ट्रैक को खोजा। हालांकि वह स्वास्थ्य कारणों से आधे रास्ते से ही लौट आए लेकिन मलक सिंह ने जोहार होते हुए मुनस्यारी तक की पैदल यात्रा की। वह मुनस्यारी से पैदल बागेश्वर पहुंचे थे, जिसके बाद सर विलियम ट्रेल ने उन्हें बूढ़ा (इलाके का मुखिया) की उपाधि प्रदान की थी। पिंडारी ट्रैक के एक दर्रे को विलियम ट्रेल के नाम पर ट्रेल दर्रे के रूप में जाना जाता है।
कैसे पहुंचें पिंडारी और कफनी ग्लेशियर
पिंडारी जाने के लिए बागेश्वर से खर्किया तक करीब 65 किमी की यात्रा वाहन से की जाती है। खर्किया से पैदल यात्रा शुरू होती है। यहां से पांच किमी दूर खातीगांव और 12 किमी दूर द्वाली तक पहुंचा जाता है। द्वाली से एक रास्ता पिंडारी और दूसरा कफनी को जाता है। द्वाली से पांच किमी की दूरी पर फुर्किया और यहां से सात किमी की दूरी पर पिंडारी का जीरो प्वाइंट आता है। द्वाली से कफनी ग्लेशियर 12 किमी की दूरी पर है। सुंदरढूं्गा घाटी को को जाने के लिए खातीगांव से पांच किमी जांतोली तक जाना पड़ता है। जहां से 11 किमी की दूरी पर कठपुलिया पहुंचा जाता है। यह स्थान मैकतोली, बैलूनी टॉप, देवीकुंड ट्रैक के बेस कैंप के रूप में भी जाना जाता है।
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द्वाली में नहीं बनी पुल, कफनी में रास्ता बहने से बंद है यात्रा
बागेश्वर। पिंडारी और कफनी ग्लेशियर को जाने वाले मार्ग में वर्ष 2013 में आई आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया था। द्वाली में पिंडर और कफनी नदियों पर बना पैदल पुल आपदा में बह गया था, जिसका आज तक निर्माण नहीं हो सका है। ट्रैकिंग करने वालों को लकड़ी के लट्ठों से पुल बनाकर नदी पार करनी पड़ती है। कफनी ग्लेशियर में जांतोली से आगे जाने के बाद करीब तीन किमी रास्ता गायब हो गया है। इसके बाद सेे इस ट्र्रैक की यात्रा ठप पड़ी है। पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते में फुर्किया से जीरो प्वाइंट तक सात किमी की दूरी के बीच तीन ग्लेशियरी नालों में भूस्खलन होता रहता है।
पिंडारी और कफनी का ट्रैकिंग रूट सर्दियों में बंद रहता है। इन दिनों यहां कोई सैलानी नहीं फंसा है। द्वाली में टूटी पुल का काम निर्माणाधीन है। कफनी ग्लेशियर के रास्ते की मरम्मत के लिए कार्रवाई गतिमान है। - कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर।
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पिंडारी ग्लेशियर ट्रैक को खोजने का श्रेय अंग्रेज घुमक्कड़ सर विलियम ट्रेल को जाता है। उन्होंने वर्ष 1830 में सूपी गांव के मलक सिंह के साथ पिंडारी ट्रैक को खोजा। हालांकि वह स्वास्थ्य कारणों से आधे रास्ते से ही लौट आए लेकिन मलक सिंह ने जोहार होते हुए मुनस्यारी तक की पैदल यात्रा की। वह मुनस्यारी से पैदल बागेश्वर पहुंचे थे, जिसके बाद सर विलियम ट्रेल ने उन्हें बूढ़ा (इलाके का मुखिया) की उपाधि प्रदान की थी। पिंडारी ट्रैक के एक दर्रे को विलियम ट्रेल के नाम पर ट्रेल दर्रे के रूप में जाना जाता है।
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कैसे पहुंचें पिंडारी और कफनी ग्लेशियर
पिंडारी जाने के लिए बागेश्वर से खर्किया तक करीब 65 किमी की यात्रा वाहन से की जाती है। खर्किया से पैदल यात्रा शुरू होती है। यहां से पांच किमी दूर खातीगांव और 12 किमी दूर द्वाली तक पहुंचा जाता है। द्वाली से एक रास्ता पिंडारी और दूसरा कफनी को जाता है। द्वाली से पांच किमी की दूरी पर फुर्किया और यहां से सात किमी की दूरी पर पिंडारी का जीरो प्वाइंट आता है। द्वाली से कफनी ग्लेशियर 12 किमी की दूरी पर है। सुंदरढूं्गा घाटी को को जाने के लिए खातीगांव से पांच किमी जांतोली तक जाना पड़ता है। जहां से 11 किमी की दूरी पर कठपुलिया पहुंचा जाता है। यह स्थान मैकतोली, बैलूनी टॉप, देवीकुंड ट्रैक के बेस कैंप के रूप में भी जाना जाता है।
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द्वाली में नहीं बनी पुल, कफनी में रास्ता बहने से बंद है यात्रा
बागेश्वर। पिंडारी और कफनी ग्लेशियर को जाने वाले मार्ग में वर्ष 2013 में आई आपदा ने भारी नुकसान पहुंचाया था। द्वाली में पिंडर और कफनी नदियों पर बना पैदल पुल आपदा में बह गया था, जिसका आज तक निर्माण नहीं हो सका है। ट्रैकिंग करने वालों को लकड़ी के लट्ठों से पुल बनाकर नदी पार करनी पड़ती है। कफनी ग्लेशियर में जांतोली से आगे जाने के बाद करीब तीन किमी रास्ता गायब हो गया है। इसके बाद सेे इस ट्र्रैक की यात्रा ठप पड़ी है। पिंडारी ग्लेशियर के रास्ते में फुर्किया से जीरो प्वाइंट तक सात किमी की दूरी के बीच तीन ग्लेशियरी नालों में भूस्खलन होता रहता है।
पिंडारी और कफनी का ट्रैकिंग रूट सर्दियों में बंद रहता है। इन दिनों यहां कोई सैलानी नहीं फंसा है। द्वाली में टूटी पुल का काम निर्माणाधीन है। कफनी ग्लेशियर के रास्ते की मरम्मत के लिए कार्रवाई गतिमान है। - कीर्ति चंद्र आर्या, जिला पर्यटन अधिकारी, बागेश्वर।

बागेश्वर का प्रसिद्ध साहसिक पर्यटन स्थल पिंडारी ग्लेशियर। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : BAGESHWAR

पिंडारी को जाने वाले मार्ग में द्वाली के पास आपदा में पुल बहने के बाद इस तरह से लकड़ी के लट्ठों से ?- फोटो : BAGESHWAR