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Bageshwar News: सार्वजनिक परिवहन से वंचित ग्रामीण
Mon, 09 Oct 2023 12:29 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Mon, 09 Oct 2023 12:29 AM IST
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बागेश्वर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रोडवेज या कुमाऊं मोटर्स आनर्स यूनियन (केमू) की बसों का संचालन करने की मांग जनता लंबे समय से करती रही है लेकिन सुनवाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्र की आवाजाही पूरी तरह से टैक्सी पर निर्भर हो गई है।
दो दशक पहले तक जिले के कांडा, कपकोट, भराड़ी, गरुड़ क्षेत्र के लिए जिला मुख्यालय से रोडवेज और केमू की बसों का संचालन होता था। लोगों के आवागमन का साधन ही रोडवेज, केमू की बस होती थी लेकिन धीरे-धीरे जिले के आंतरिक हिस्से में बस का संचालन बंद हो गया। आज स्थिति यह है कि जिले से रोडवेज की बस केवल लंबी दूरी पर चल रही है। केमू की बस कुमाऊं के अन्य जिलों के लिए संचालित होती है।
ग्रामीण क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से टैक्सी पर निर्भर हो गई है। बाकायदा ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला मुख्यालय के साथ ही तहसील मुख्यालयों में टैक्सी स्टैंड बने हैं। छोटे-छोटे स्टेशन का भी किराया तय है।
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ग्राम हथरसिया निवासी बुजुर्ग चंद्रशेखर पांडेय लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में बस चलाने की मांग कर रहे हैं। वह कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में बस का संचालन होने से आवागमन में सहूलियत होती। किराया भी कम होता लेकिन रोडवेज और केमू के संचालक इस मांग पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्राम रमाड़ी के बलवंत सिंह, कपकोट के महिमन कपकोटी, लीती के हीरा सिंह कोरंगा आदि ने ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के लिए बस संचालन की मांग की है।
दो सादे कोट
केमू के पास आंतरिक मार्गों पर बस संचालन का परमिट नहीं है। - सुुरेश डसीला, अध्यक्ष, केमू।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बस के संचालन की कोई योजना नहीं है। - राजेंद्र कुमार, प्रभारी सहायक महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, बागेश्वर।
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दो दशक पहले तक जिले के कांडा, कपकोट, भराड़ी, गरुड़ क्षेत्र के लिए जिला मुख्यालय से रोडवेज और केमू की बसों का संचालन होता था। लोगों के आवागमन का साधन ही रोडवेज, केमू की बस होती थी लेकिन धीरे-धीरे जिले के आंतरिक हिस्से में बस का संचालन बंद हो गया। आज स्थिति यह है कि जिले से रोडवेज की बस केवल लंबी दूरी पर चल रही है। केमू की बस कुमाऊं के अन्य जिलों के लिए संचालित होती है।
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ग्रामीण क्षेत्रों की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से टैक्सी पर निर्भर हो गई है। बाकायदा ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला मुख्यालय के साथ ही तहसील मुख्यालयों में टैक्सी स्टैंड बने हैं। छोटे-छोटे स्टेशन का भी किराया तय है।
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ग्राम हथरसिया निवासी बुजुर्ग चंद्रशेखर पांडेय लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों में बस चलाने की मांग कर रहे हैं। वह कहते हैं कि ग्रामीण इलाकों में बस का संचालन होने से आवागमन में सहूलियत होती। किराया भी कम होता लेकिन रोडवेज और केमू के संचालक इस मांग पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्राम रमाड़ी के बलवंत सिंह, कपकोट के महिमन कपकोटी, लीती के हीरा सिंह कोरंगा आदि ने ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन के लिए बस संचालन की मांग की है।
दो सादे कोट
केमू के पास आंतरिक मार्गों पर बस संचालन का परमिट नहीं है। - सुुरेश डसीला, अध्यक्ष, केमू।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बस के संचालन की कोई योजना नहीं है। - राजेंद्र कुमार, प्रभारी सहायक महाप्रबंधक, रोडवेज डिपो, बागेश्वर।